नई दिल्ली : इस भाग दौड़ भरी जिंदगी में हर कोई अच्छा दिखना चाहता है. ऐसे में आज सोसाइटी में इसका कंपटीशन भी बढ़ता जा रहा है, जिसमें हर कोई अच्छा दिखना चाहता है. जो जितना अच्छा दिखेगा, उसके लिए उतने ज्यादा अवसर हर जगह खुल जाते हैं, लेकिन यह जो अच्छा दिखने की चाह है. ये युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य पर दबाव डालने के साथ-साथ उनके अंदर चिंताएं बढ़ा रहा है. यह चिंता वजन को लेकर के है, जिनका वजन कम है, वो खुद से संतुष्ट नहीं हैं और जिनका वजन बढ़ गया है, जो मोटापे से संतुष्ट नहीं हैं. वो भी सुबह-सुबह अपने आप को शीशे में देखकर खुश नहीं होते हैं.
रिसर्च में हुआ मोटापे के कारणों का खुलासा
ये सारी बातें 3 साल तक चली लंबी रिसर्च में सामने आया है. इस रिसर्च को अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान यानी दिल्ली एम्स और आईसीएमआर ने मिलकर किया था. आखिर यह रिसर्च क्या कहती है. इस पर डॉ. पीयूष रंजन ने खास बातचीत की. वह दिल्ली एम्स में डिपार्टमेंट ऑफ मेडिसिन में प्रोफेसर हैं. उन्होंने बताया कि 3 साल तक एक रिसर्च की गई थी. जो कि अलग-अलग विषयों पर आधारित थी.
इस रिसर्च को एम्स आईसीएमआर रिसर्च ऑन यंग एडल्ट के रूप में जानते हैं. डॉ. पीयूष रंजन ने बताया कि इस रिसर्च में हमने पाया कि 80% लोग जिन्हें वजन कम करने की जरूरत है. वो 80% लोग वजन नियंत्रण कार्यक्रम में शामिल नहीं होते हैं. जो शामिल हो जाते हैं, वो अपने टारगेट को पूरा नहीं कर पाते और जो टारगेट को पूरा कर लेते हैं. वो उसे बरकरार नहीं रख पाते हैं.
युवाओं में बॉडी इमेज बनी चिंता का सबसे बड़ा कारण
डॉ. पीयूष रंजन ने बताया कि इस रिसर्च में हमने पाया कि एक चौथाई से लेकर एक तिहाई तक युवाओं में अच्छा दिखने का मानसिक दबाव है. यह अच्छा दिखने का मानसिक दबाव दोनों में है, जिनका वजन ज्यादा है. उनमें भी और जिनका वजन कम है उन्हें भी, क्योंकि युवाओं की जो उम्र होती है. उस दौरान उन्हें अपना करियर बनाना होता है. पढ़ाई पूरी करनी होती है. दोस्त बनाने होते हैं. इसी दौरान जब वो अच्छे नहीं दिखते हैं, तो उन्हें चार लोगों के बीच में खड़ा होने में भी शर्म आती है.
उन्होंने बताया कि युवाओं में मोटापे का एक बड़ा कारण है बढ़ता हुआ स्क्रीन टाइम है. आजकल फिजिकल एक्टिविटी कम हो गई है. स्क्रीन टाइम बढ़ गया और खाने पीने पर भी युवा ध्यान नहीं देते हैं. जो जल्दी फटाफट मिल जाए, उसे खा लेते हैं. ऐसे में फटाफट सिर्फ जंक फूड मिलता है. जो स्वादिष्ट भी होता है और सस्ता भी होता है. इन्हीं वजह से युवाओं में हाइपरटेंशन, इंसुलिन डिसऑर्डर, डायबिटीज या प्रीडायबिटीज, फैटी लीवर और अनिद्रा, स्लीप एप्निया जैसी बीमारियां लगातार हम पा रहे हैं.
ओवरवेट है चिंता का विषय
उन्होंने बताया कि जब तक युवाओं को यह समझ में आता है कि वो मोटे हो रहे हैं. तब तक बहुत देर हो जाती है. यहीं से शारीरिक परेशानियों के साथ-साथ उनके मानसिक स्वास्थ्य को भी झटका लगता है. उन्होंने बताया कि एक चौथाई लोग जो मोटे हैं. उनमें 12 से 15% लोग ऐसे हैं, जिनका वजन जरूरत से ज्यादा है. यानी वह ओवरवेट हैं, जो चिंता का विषय है.
कड़े नियमों को फॉलो करने की जरूरत
डॉ. पीयूष रंजन ने बताया कि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मन की बात में लोगों को मोटापा नियंत्रण करने की सलाह दी थी. जब देश के प्रधानमंत्री भी कह रहे हैं, तो लोगों को जरूर अपने मोटापे पर ध्यान देना चाहिए. क्योंकि मोटापा लाइफस्टाइल से जुड़ा हुआ है. आजकल लोग मोटापे को कम करने के लिए एक डाइटिशियन से मिलते हैं. डाइट चार्ट बनाते हैं और जिम को जाकर ज्वाइन कर लेते हैं, लेकिन इन नियमों को वो फॉलो नहीं कर पाते. इसलिए भविष्य के लिए जरूरी है कि मोटापे को कम करने के लिए एक व्यापक प्रोग्राम चलाया जाए.
ऐसे रख सकते हैं वजन का कंट्रोल
हमें एक व्यक्ति पर ध्यान देने के साथ-साथ उस माहौल पर भी ध्यान देने की जरूरत है. जो लोगों को मोटापे का शिकार बना रहा है. माहौल में बदलाव भी होना चाहिए. अब अगर कोई आपसे कहे कि आप खाते पीते घर के हैं तो आपको खुश होने की जरूरत नहीं है. बल्कि आपकी चिंताएं बढ़ जानी चाहिए. मतलब सामने वाला कहना चाहता है कि आप मोटे हो रहे हैं. इसीलिए इसके लिए जरूरी है कि स्कूल कैंटीन, कॉलेज कैंटीन और जो वर्कप्लेस हैं. जहां सभी लोग काम करते हैं. वहां पर जंक फूड की जगह हेल्दी फूड रखे जाएं. खाने-पीने पर लोग बहुत ध्यान दें और अपने वजन को नियंत्रित रखें.
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