तुलसी और बेसिल को लेकर कंफ्यूज, तो यहां जानिए दोनों में अंतर और क्या है इनका इस्तेमाल

ऋषिकेश: तुलसी और बेसिल देखने में भले ही एक जैसी लगें, लेकिन इनके गुण, उपयोग और प्रभाव में बड़ा अंतर है. अक्सर लोग इन्हें एक ही पौधा समझ लेते हैं, जबकि हकीकत इससे बिल्कुल अलग है. तुलसी भारतीय संस्कृति, धर्म और आयुर्वेद का अहम हिस्सा है, वहीं बेसिल पश्चिमी देशों की रसोई में खुशबू और स्वाद बढ़ाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है. दोनों पौधे अलग-अलग जलवायु, परंपरा और जरूरतों से जुड़े हुए हैं.

तुलसी में गुण

लोकल 18 के साथ बातचीत के दौरान डॉ राजकुमार (आयुष)ने बताया कि तुलसी को भारत में केवल एक औषधीय पौधा ही नहीं, बल्कि देवी लक्ष्मी का रूप माना जाता है. लगभग हर हिंदू घर में तुलसी का पौधा मिल जाना आम बात है. सुबह-शाम इसकी पूजा की जाती है और इसे सकारात्मक ऊर्जा का स्रोत माना जाता है. आयुर्वेद में तुलसी को इम्युनिटी बढ़ाने वाला, सर्दी-खांसी, बुखार, गले के संक्रमण और सांस संबंधी समस्याओं में बेहद लाभकारी बताया गया है. तुलसी की पत्तियों से काढ़ा, चाय और औषधियां बनाई जाती हैं. इसकी पत्तियां स्वाद में तीखी और खुशबू में तेज होती हैं, जो इसके औषधीय गुणों की पहचान हैं.

बेसिल की खासियत

वहीं दूसरी ओर बेसिल, जिसे स्वीट बेसिल भी कहा जाता है, मुख्य रूप से इटैलियन और यूरोपीय व्यंजनों में इस्तेमाल होता है. पास्ता, पिज्जा, सूप और सॉस में बेसिल की पत्तियां स्वाद और खुशबू को खास बना देती हैं. बेसिल की पत्तियां तुलसी की तुलना में ज्यादा मुलायम, चौड़ी और हल्के मीठे स्वाद वाली होती हैं. इसका इस्तेमाल ज्यादातर खाना पकाने तक सीमित रहता है, हालांकि इसमें भी कुछ स्वास्थ्य लाभ पाए जाते हैं. बेसिल पाचन में मदद करता है और इसमें एंटीऑक्सीडेंट गुण होते हैं, लेकिन इसका औषधीय प्रभाव तुलसी जितना शक्तिशाली नहीं माना जाता.

तुलसी की तासीर होती है गर्म

तुलसी की कई किस्में पाई जाती हैं जैसे राम तुलसी, कृष्ण तुलसी और वन तुलसी. हर किस्म के अपने अलग औषधीय गुण होते हैं. तुलसी को गर्म तासीर का माना जाता है और इसका सेवन संतुलित मात्रा में करने की सलाह दी जाती है. यह शरीर को डिटॉक्स करने में मदद करती है और मानसिक तनाव को कम करने में भी सहायक मानी जाती है.

तुलसी का धार्मिक महत्व

धार्मिक दृष्टि से भी तुलसी का विशेष महत्व है. कई व्रत, पूजा और संस्कार तुलसी के बिना अधूरे माने जाते हैं. इसके विपरीत बेसिल का धार्मिक या आध्यात्मिक महत्व लगभग नहीं के बराबर है. इसे मुख्य रूप से एक किचन हर्ब के रूप में उगाया और इस्तेमाल किया जाता है. पश्चिमी देशों में बेसिल को ताजा सलाद या गार्निश के रूप में भी खाया जाता है. इसकी खुशबू हल्की और मन को सुकून देने वाली होती है, लेकिन यह किसी धार्मिक आस्था से नहीं जुड़ी होती.

Share me..

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *