January Smog Effect : हर साल, शहरी भारत में कार्डियोलॉजिस्ट्स एक चिंता वाली बात देखते हैं. जनवरी में हार्ट अटैक और स्ट्रोक के मामले अचानक बढ़ जाते हैं. डॉ. दिव्या मरीना फर्नांडिस, कंसल्टेंट, हार्ट फेल्योर स्पेशलिस्ट और इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट, एस्टर आरवी हॉस्पिटल के मुताबिक, यह बढ़ोतरी संयोग नहीं है बल्कि कई वजहों से दिल पर एक साथ दबाव पड़ने के कारण होती है.
डॉ. फर्नांडिस बताती हैं कि ठंडा मौसम, त्योहारों में ज्यादा खाना-पीना और एयर पॉल्यूशन मिलकर दिल और ब्लड वेसल्स पर ज्यादा दबाव डालते हैं. इसी को अब ‘जनवरी स्मॉग इफेक्ट’ कहा जा रहा है. ठंड में ब्लड वेसल्स सिकुड़ जाते हैं जिससे ब्लड प्रेशर बढ़ता है और दिल को ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है. सर्दियों में खून भी गाढ़ा हो जाता है जिससे क्लॉट बनने का खतरा बढ़ जाता है और हार्ट अटैक या स्ट्रोक का रिस्क भी बढ़ जाता है.
ठंड में शारीरिक गतिविधि में कमी
ठंड में शारीरिक गतिविधि कम हो जाती है, वजन बढ़ता है, हैवी खाना और ज्यादा नमक भी दिल पर दबाव डालते हैं. क्रिसमस-न्यू ईयर के दौरान ओवरईटिंग, शराब, स्मोकिंग, अनियमित नींद और देर रात पार्टी आम है. डॉ. फर्नांडिस बताती हैं कि शराब ब्लड प्रेशर बढ़ा सकती है, दिल की धड़कन अनियमित कर सकती है और डिहाइड्रेशन से खून गाढ़ा हो जाता है.
प्रोसेस्ड और ज्यादा नमक वाले चीजें खाना
प्रोसेस्ड और ज्यादा नमक वाले खाने से शरीर में पानी रुकता है और ब्लड प्रेशर बढ़ता है. नींद की कमी और स्ट्रेस से कोर्टिसोल लेवल बढ़ता है जिससे हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है, खासकर उन लोगों में जिन्हें पहले से दिल की बीमारी, डायबिटीज या हाई ब्लड प्रेशर है. सर्दियों में एयर पॉल्यूशन भी बड़ा कारण है.
प्रदूषित हवा
स्मॉग में बारीक कण (PM2.5), नाइट्रोजन ऑक्साइड्स और जहरीली गैसें होती हैं जो गाड़ियों, इंडस्ट्री, पटाखों और बायोमास जलाने से आती हैं. ये कण फेफड़ों से होते हुए खून में पहुंच जाते हैं और सूजन व ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस बढ़ाते हैं. इससे ब्लड वेसल्स को नुकसान होता है और आर्टरी में प्लाक टूट सकता है जिससे हार्ट अटैक या स्ट्रोक हो सकता है. प्रदूषित हवा से शरीर में ऑक्सीजन कम पहुंचती है, दिल पर ज्यादा बोझ पड़ता है और खतरनाक धड़कनें हो सकती हैं.
रिसर्च बताती है कि स्मॉग के कुछ घंटों या दिनों के अंदर हार्ट अटैक का रिस्क बढ़ जाता है, खासकर बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों में. जनवरी में ठंड, घना स्मॉग और त्योहारों के बाद का तनाव एक साथ आ जाता है. नए साल पर पटाखों से हवा और खराब हो जाती है और सर्दी की धुंध से प्रदूषक हवा में ही रह जाते हैं. छुट्टियों के बाद काम पर लौटने का मानसिक तनाव भी दिल पर असर डालता है. इन सब वजहों से जनवरी में हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा सबसे ज्यादा होता है. सबसे ज्यादा रिस्क किन्हें है? हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज या हाई कोलेस्ट्रॉल वाले लोग, जिन्हें पहले हार्ट अटैक या स्ट्रोक हो चुका है, स्मोकर्स, बुजुर्ग और जो लोग लंबे समय तक बाहर प्रदूषण में रहते हैं.
किन लक्षणों को कभी नजरअंदाज न करें
किन लक्षणों को कभी नजरअंदाज न करें? छाती में दर्द, सांस फूलना, अचानक पसीना आना, चक्कर आना, बोलने में दिक्कत, शरीर के एक तरफ कमजोरी या अचानक दिखना बंद होना – ये सब मेडिकल इमरजेंसी हैं. जल्दी इलाज से जान बच सकती है.
बचाव के लिए क्या करें
सर्दी और स्मॉग में दिल की सुरक्षा के लिए डॉ. फर्नांडिस सलाह देती हैं कि ज्यादा प्रदूषण वाले दिनों में बाहर कम जाएं और बाहर निकलते वक्त अच्छी क्वालिटी का मास्क (जैसे N95) पहनें. इसके अलावा, ब्लड प्रेशर, शुगर और कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल में रखें, ठंड में भी पानी खूब पिएं, हल्का और घर का बना खाना खाएं, नमक, शराब और जंक फूड कम करें, नींद पूरी लें और स्ट्रेस कम करें, हल्की एक्सरसाइज जैसे वॉकिंग या स्ट्रेचिंग करें और दवाएं समय पर लें. डॉ. फर्नांडिस कहती हैं कि जनवरी में हार्ट अटैक और स्ट्रोक के मामले काफी हद तक रोके जा सकते हैं. जागरूकता, छोटी-छोटी लाइफस्टाइल में बदलाव और लक्षण दिखते ही तुरंत इलाज से रिस्क काफी कम हो सकता है. सर्दी, प्रदूषण और त्योहारों के बाद की आदतें जब एक साथ आती हैं, तो दिल की सेहत का ध्यान रखना बहुत जरूरी हो जाता है.
Disclaimer : इस खबर में दी गई जानकारी और सलाह एक्सपर्ट्स से बातचीत पर आधारित है. यह सामान्य जानकारी है, पर्सनल सलाह नहीं. इसलिए किसी भी सलाह को अपनाने से पहले एक्सपर्ट से सलाह जरूर लें. किसी भी नुकसान के लिए News-18 जिम्मेदार नहीं होगा.
.