Bhagirathpura contaminated water Scandal: इंदौर के भागीरथपुरा में गंदे पानी का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा. यहां अभी तक लगभग 16 लोगों की मौत हो चुकी है और सैकड़ों लोग अस्पतालों में भर्ती हैं. भागीरथपुरा कांड से करीब 3 हजार लोग प्रभावित हुए हैं. हालांकि अब भागीरपुरा के पानी को लेकर एक और खुलासा हुआ है. भोपाल के ही एक अधिकारी ने बताया कि भागीरथपुरा के कई बोरवेल में से लिए गए भूजल के आधे से ज्यादा नमूनों में ई-कोलाई बैक्टीरिया मौजूद मिला है.
जानकारी के मुताबिक इलाके के बोरवेल से लिए गए 69 भूजल नमूनों में से 35 में फीकल कोलिफॉर्म (मलजनित जीवाणु) संदूषण पाया गया है. सिर्फ ई-कोलाई ही नहीं इस पानी में साल्मोनेला और विब्रियो कॉलरा बैक्टीरिया के साथ-साथ वायरस, फंगस और प्रोटोजोआ के भी मिलने की पुष्टि हुई है. इन्हीं की वजहों से लोगों को बहु-जीवाणु संक्रमण हुआ और उनकी जान चली गई.
कितना खतरनाक है ई-कोलाई, एम्स के डॉक्टर ने दिया जवाब ?
एम्स के प्रोफेसर डॉ. शालीमार ने बताया कितना खतरनाक है ई-कोलाई बैक्टीरिया…
ई-कोलाई बैक्टीरिया को लेकर ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज नई दिल्ली में गैस्ट्रोएंट्रोलॉजी विभाग में प्रोफेसर डॉक्टर शालीमार ने बताया कि साल्मोनेला और ई. कोलाई दोनों ही हानिकारक बैक्टीरिया हैं. पीने के पानी में ये नहीं होने चाहिए. ई. कोलाई मानव मल (पाखाना) में पाया जाता है. पीने के पानी में इस बैक्टीरिया की मौजूदगी यह दिखाती है कि पानी मलजनित पदार्थ (सीवर) से दूषित है. जबकि घरों तक पीने के पानी की सप्लाई से पहले उसमें किसी भी प्रकार के बैक्टीरिया की उपस्थिति की जांच की जाती है.
डॉ. बताते हैं कि साल्मोनेला और ई. कोलाई जैसे बैक्टीरिया पानी के माध्यम से शरीर के अंदर पहुंचकर गंभीर बीमारियां पैदा कर सकते हैं, विशेषकर शिशुओं, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और उन लोगों में जिनकी रोग-प्रतिरोधक क्षमता कम होती है. जो लोग स्टेरॉयड जैसी इम्यूनोसप्रेसिव दवाएं ले रहे हैं या जिनको कैंसर जैसी गंभीर बीमारियां हैं, उनके लिए ये दोनों काफी खतरनाक हैं. साल्मोनेला और ई. कोलाई से संक्रमण होने पर बुखार, पेट दर्द, दस्त, टाइफाइड और शरीर के अन्य अंगों पर असर पड़ सकता है. मल्टी-ऑर्गन फेल्योर तक हो सकते हैं, गंभीर मामलों में यह बीमारी जानलेवा भी साबित हो सकती है.
इंदौर में महामारी के बाद उठाया गया ये कदम
भागीरथपुरा में हुई मौतों के बाद इस आपदा को महामारी घोषित कर दिया गया है. प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों में स्ट्रीट वेंडरों के खाद्य पदार्थ बेचने पर भी रोक लगा दी है. स्थानीय लोगों से नर्मदा पाइपलाइन का पानी और बोरवेल का पानी न पीने के लिए कहा गया है. वहीं टैंकर से भेजे जा रहे पानी को उबाल कर पीने की सलाह दी गई है.
हालांकि इस संबंध में अधिकारियों ने यह भी कहा कि संदूषण क्षतिग्रस्त बोरवेल में है, भूजल में नहीं है, क्योंकि अलग-अलग बोरवेल से अलग-अलग परिणाम सामने आए हैं. हालांकि अब वहां टूटे हुए जलाशयों की मरम्मत की जा रही है और बाकी में क्लोरीन डाला जा रहा है.
क्या है इंदौर कांड, कैसे भागीरथपुरा में लोगों पर टूट पड़ा काल?
इंदौर का भागीरथपुरा तब अचानक चर्चा में आ गया जब यहां पीने के पानी के कारण लोग अस्पतालों में भर्ती होने लगे. उल्टी-दस्त की शिकायत के साथ अस्पताल पहुंचे लोगों के किडनी आदि ऑर्गन फेल हो गए और वे काल के गाल में समा गए. एक ही इलाके में अचानक हुई इन मौतों के पीछे की वजह वह दूषित पानी था जो सप्लाई किया जा रहा था. देखते ही देखते अस्पतालों में भर्ती होने वाले मरीजों की संख्या सैकड़ों में पहुंच गई और मरने वालों की संख्या भी 16 तक पहुंच गई. इलाके में हुई इन मौतों के बाद इसे महामारी घोषित किया गया है और यहां पानी में फैले संक्रमण की जांच की गई है. साथ ही आईसीएमआर की टीम और अन्य विशेषज्ञों की टीमें भी इलाके के लिए रवाना हो चुकी हैं.
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