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आज की भागदौड़ भरी और डिजिटल लाइफस्टाइल में सबसे ज्यादा अनदेखी हमारी हड्डियों और मांसपेशियों की सेहत की हो रही है. कम चलना-फिरना, लंबे समय तक बैठना और गलत खानपान धीरे-धीरे शरीर को कमजोर बनाने लगता है.
डिजिटल दौर में शारीरिक गतिविधि कम होने का सबसे ज्यादा असर हमारी हड्डियों और मांसपेशियों पर पड़ता है. शुरुआत में हल्की थकावट महसूस होती है, फिर धीरे-धीरे जोड़ों में दर्द, पीठ में खिंचाव और पूरे शरीर में कमजोरी नजर आने लगती है. उम्र बढ़ने के साथ यह परेशानी और गंभीर हो जाती है. आयुर्वेद इसे वात दोष की गड़बड़ी से जोड़ता है, जबकि आधुनिक विज्ञान इसे शरीर में जरूरी मिनरल्स की कमी का परिणाम मानता है. ऐसे में तिल एक प्राकृतिक और असरदार उपाय के रूप में सामने आता है.
काले हों या सफेद, तिल दोनों ही सेहत के लिए बेहद लाभकारी माने जाते हैं. आयुर्वेद में तिल को बल्य यानी शरीर को ताकत देने वाला और स्निग्ध यानी पोषण पहुंचाने वाला बताया गया है. वैज्ञानिक दृष्टि से देखें तो तिल में कैल्शियम, मैग्नीशियम और फॉस्फोरस जैसे जरूरी मिनरल्स भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं. ये तीनों तत्व मिलकर हड्डियों को मजबूत आधार देते हैं और मांसपेशियों को सहारा प्रदान करते हैं.
हड्डियों की मजबूती के लिए सिर्फ कैल्शियम ही काफी नहीं होता. मैग्नीशियम कैल्शियम को सही तरह से शरीर में अवशोषित करने में मदद करता है, जबकि फॉस्फोरस हड्डियों की संरचना को संतुलित बनाए रखता है. तिल में ये तीनों मिनरल्स प्राकृतिक रूप से मौजूद होते हैं, इसलिए इनका असर धीरे-धीरे लेकिन लंबे समय तक देखने को मिलता है. इसी वजह से आयुर्वेद में तिल को रोजमर्रा के आहार में शामिल करने की सलाह दी जाती है.
बढ़ती उम्र के साथ हड्डियों का कमजोर होना एक आम समस्या बन जाती है, खासकर महिलाओं में. विज्ञान इसे ऑस्टियोपोरोसिस के नाम से जानता है. आयुर्वेद मानता है कि अगर समय रहते शरीर को सही पोषण मिल जाए, तो इस परेशानी को काफी हद तक रोका जा सकता है. रोजाना थोड़ी मात्रा में तिल खाने से हड्डियों को अंदर से मजबूती मिलती है और फ्रैक्चर का खतरा कम हो सकता है.
तिल केवल हड्डियों ही नहीं, बल्कि जोड़ों के दर्द में भी राहत देने में मदद करता है. इसमें मौजूद प्राकृतिक गुण शरीर में सूजन को कम करने में सहायक माने जाते हैं. घुटनों का दर्द, गर्दन की अकड़न या गठिया जैसी समस्याओं में तिल एक आसान घरेलू उपाय की तरह काम कर सकता है. सर्दियों के मौसम में इसका लाभ और भी बढ़ जाता है, क्योंकि यह शरीर को अंदर से गर्माहट भी देता है.
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विविधा सिंह न्यूज18 हिंदी (NEWS18) में पत्रकार हैं. इन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में बैचलर और मास्टर्स की डिग्री हासिल की है. पत्रकारिता के क्षेत्र में ये 3 वर्षों से काम कर रही हैं. फिलहाल न्यूज18…और पढ़ें