काश्यां मरणं मुक्तिः का रहस्य: क्यों काशी में मृत्यु को मोक्ष का द्वार माना जाता है?

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Shiv Tarak Mantra: कभी काशी की यात्रा के दौरान काश्यां मरणं मुक्तिः सुनें तो हैरान होने की जगह इसे समझने की कोशिश करें. इसका मतलब होता है, ‘काशी में मृत्यु मोक्ष की ओर ले जाती है.’ काशी जिसे लोग वाराणसी या बनारस के नाम से भी जानते हैं, जो दुनिया के सबसे प्राचीन जीवंत शहरों में से एक है.

स्कंद पुराण के अनुसार, काशी खंड में इस बात का जिक्र देखने को मिलता है कि, वाराणसी में मौत के बाद व्यक्ति को जन्म-मृत्यु के चक्र से मुक्ति मिलती है. इसे सदियों पुराना शहर भी माना जाता है. 

तारक मंत्र से मोक्ष की प्राप्ति 

माना जाता है कि, बनारस शहर की रचना स्वयं भगवान शिव ने की थी और यह उनके त्रिशूल पर स्थित है. काशी में मौत को भय नहीं माना जाता. जब कभी भी यहां किसी हिंदू की मृत्यु होती है, तो उन्हें अंतिम संस्कार के लिए काशी के मणिकर्णिका घाट ले जाया जाता है.

तब माना जाता है कि, खुद भगवान शिव दिवंगत आत्मा के कानों में तारक मंत्र का उच्चारण करते हैं और जिसके बाद आत्मा को मोक्ष की प्राप्ति होती है. 

माना जाता है कि, यह मंत्र आत्मा का भौतिक संसार से संबंध तोड़ देता है और तत्काल मोक्ष की प्राप्ति होती है. मान्यताओं के मुताबिक, वाराणसी के अत्यंत पवित्र नगरी में मृत्यु के देवता यम की जगह भगवान शिव ही आत्मा को मोक्ष प्रदान करते हैं.

सबसे पहले देवी पार्वती को मिला तारक मंत्र का ज्ञान

ये तारक मंत्र है राम नाम, जो दो मंत्रों अष्टाक्षर ‘ऊँ नमो नारायणाय’ और पंचाक्षर ‘नमः शिवाय’ से मिलकर बना है. पौराणिक परंपराओं के मुताबिक, भगवान शिव ने सबसे पहले देवी पार्वती को तारक मंत्र के बारे में बताया था. ऐसा भी माना जाता है कि, तारक मंत्र का जाप करने से विष्णु सहस्त्रनाम के समान फल की प्राप्ति होती है. 

दार्शनिक नजरिए से देखा जाए तो यह हिंदू धर्म के प्रमुख विचारों को दर्शाता है. तारक मंत्र भगवान शिव के प्रमुख मार्गदर्शन में भौतिक जगत से आध्यात्मिक आजादी का प्रतीक है.

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