सतपुड़ा के जंगल में बसे आदिवासी डर के साये में, मुआवजा कब मिलेगा? प्रशासन ने साधी चुप्पी

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Hydro Project Tribal Eviction: नरसिंहपुर जिले में प्रस्तावित हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट के कारण सतपुड़ा के जंगल में बसे आदिवासी गांव उजड़ने के कगार पर हैं. दिलहेरी और बिनेकी टोला गांवों का हिस्सा डूब क्षेत्र में आता है, जिसमें बिनेकी टोला के 29 परिवारों का विस्थापन लगभग तय हो चुका है. राजस्व विभाग ने गांवों में जाकर घरों की नापजोख कर नंबरिंग कर दी है.

राहुल मेहरा, 

Hydro Project Tribal Eviction: नरसिंहपुर जिले में विकास की बड़ी परियोजना ने एक ओर उम्मीद जगाई है, लेकिन इसके पीछे कई आदिवासियों के जीवन में संकट खड़ा हो गया है. सतपुड़ा के जंगल में बसे आदिवासी गांव अब उजड़ने की कगार पर हैं. डर और अनिश्चितता के साए में लोग अपनी किस्मत को कोस रहे हैं. दरअसल, ग्राम पंचायत हतनापुर में प्रस्तावित हाइड्रो पावर प्लांट का निर्माण होने जा रहा है. इस परियोजना में नरसिंहपुर विधानसभा क्षेत्र के दो गांव, दिलहेरी और बिनेकी टोला, का हिस्सा डूब क्षेत्र में आने वाला है. दिलहेरी गांव का आधा हिस्सा तो जंगल क्षेत्र में है, लेकिन बिनेकी टोला के 29 परिवारों का विस्थापन लगभग तय हो चुका है. राजस्व विभाग की टीम ने गांव में जाकर घरों की नापजोख कर घरों को नंबरिंग दे दी है.

संस्कृति, पहचान और जीवनशैली का आधार
गांव के आदिवासियों का कहना है कि वे कई पीढ़ियों से इसी जंगल में रह रहे हैं और खेती-बाड़ी करके अपना जीवन चला रहे हैं. यही जंगल उनकी संस्कृति, पहचान और जीवनशैली का आधार है. लेकिन प्रशासन ने बिना कोई पूर्व सूचना दिए घरों में नापजोख कर दी. आदिवासियों का कहना है कि अब तक उन्हें यह नहीं बताया गया है कि उन्हें नए घर कहां मिलेगा और जमीन के बदले मुआवजा कितना दिया जाएगा. इस अनिश्चितता ने उनके जीवन को असुरक्षा और तनाव में डाल दिया है.

न्यूज़ 18 की टीम ने राजस्व विभाग के उच्च अधिकारी और एसडीएम मणिन्द्र कुमार सिंह से इस मामले पर जानकारी मांगी, लेकिन अधिकारी कैमरे पर कोई साफ जवाब देने से बचते नजर आए. अब सवाल यही खड़ा होता है कि विस्थापित आदिवासियों को उनके मकान और जमीन के बदले उचित मुआवजा मिलेगा या नहीं. क्या उन्हें नए घर और खेती करने के लिए जमीन मिलेगी, या फिर विकास के नाम पर उन्हें दर-दर भटकना पड़ेगा. इस अनिश्चितता और न्याय की प्रतीक्षा में गांव के लोग हर दिन चिंता और भय के बीच जीवन जी रहे हैं.

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Deepti Sharma

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आदिवासी गांव उजड़ने के कगार पर, हाइड्रो प्रोजेक्ट से घरों की हवा हुई हवाई

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