नई दिल्ली11 मिनट पहले
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चांदी आज यानी, सोमवार 29 दिसंबर को क्रैश हो गई। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर 8% या करीब ₹21,000 प्रति किलो तक गिर गए।
चांदी सुबह 2.39 लाख रुपए पर खुली थी फिर 2.54 लाख रुपए के ऑल-टाइम हाई पर पहुंच गई। बाद में अचानक लुढ़क कर 2.33 लाख रुपए पर आ गई।
एक्सपर्ट्स के मुताबिक तेजी से चढ़ी कीमतों में गिरावट की वजह जियोपॉलिटिकल तनाव कम होने के संकेत से लेकर टेक्निकल फैक्टर्स हैं। मार्जिन बढ़ना भी एक वजह है।

सिल्वर ने सुबह 2.54 लाख रुपए का ऑलटाइम हाई बनाया था। फिर एक घंटे में ये ये गिरकर 2.33 लाख के करीब आ गई।
1. डिमांड घटी: रूस-यूक्रेन में शांति वार्ता की उम्मीद से बिकवाली
चांदी की कीमतों में गिरावट का सबसे बड़ा और तात्कालिक कारण रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर आई शांति वार्ता की खबर को माना जा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने रविवार को बयान दिया कि वे और यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की एक शांति समझौते के बहुत करीब हैं।
युद्ध खत्म होने की सुगबुगाहट से निवेशकों ने सुरक्षित निवेश के तौर पर चांदी से अपना पैसा निकालना शुरू कर दिया।
2. तकनीकी संकेत: 200 दिनों के औसत से 89% ऊपर था भाव
मार्केट एनालिस्ट्स के मुताबिक, चांदी अपने 200 दिनों के मूविंग एवरेज (DMA) से 89% ऊपर ट्रेड कर रही थी। पहले भी ऐसा देखा गया है कि जब भी कीमतें इस स्तर पर पहुंचती हैं, तो उनमें 20-30% का बड़ा करेक्शन आता है। 1979-80 और 2011 में इसी तरह की तेजी के बाद कीमतें 70-90% तक टूटी थीं।
3. मार्जिन बढ़ा: ट्रेडर्स को बेचनी पड़ी अपनी पोजिशन
शिकागो मर्केंटाइल एक्सचेंज यानी CME ने सिल्वर फ्यूचर्स पर शुरुआती मार्जिन करीब 20,000 डॉलर से बढ़ाकर 25,000 डॉलर कर दिया है। इससे ट्रेडर्स को ज्यादा कैश जमा करना पड़ा और कई लोगों ने मजबूरी में अपनी पोजिशन काट दी, जिससे बिकवाली और तेज हो गई।
आगे क्या होगा?
रिलायंस सिक्योरिटीज के एनालिस्ट जिगर त्रिवेदी के मुताबिक लंबी अवधि का ट्रेंड अभी भी पॉजिटिव है, लेकिन वोलैटिलिटी बनी रहेगी। वहीं BTIG का मानना है कि अगर कीमतें 50-DMA तक जाती हैं तो अगले 1-2 महीनों में 25-30% तक का और करेक्शन संभव है।
MCX भारत का सबसे बड़ा कमोडिटी डेरिवेटिव्स एक्सचेंज है। इसे आसान भाषा में ऐसे समझें:
- क्या होता है: जैसे शेयर बाजार (NSE/BSE) में कंपनियों के शेयर खरीदे-बेचे जाते हैं, वैसे ही MCX पर कमोडिटी (जैसे सोना, चांदी, कच्चा तेल, तांबा और कपास) का व्यापार होता है।
- कैसे काम करता है: यहां मुख्य रूप से फ्यूचर्स और ऑप्शंस में ट्रेडिंग होती है। यानी आप भविष्य की किसी तारीख के लिए आज का भाव तय करके सौदा करते हैं।
- रेगुलेटर: यह भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) के नियमों के तहत काम करता है।
- खासियत: भारत में सोने और चांदी के भाव तय करने में MCX की बड़ी भूमिका होती है। निवेश के अलावा, इसका इस्तेमाल ज्वेलर्स और इंडस्ट्रीज कीमतों में होने वाले रिस्क से बचने के लिए करते हैं।
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1980 की बात है। चांदी की कीमत 2 डॉलर प्रति औंस (28.35 ग्राम) से बढ़कर 48 डॉलर तक पहुंच गई। पर यह हुआ कैसे? इसके पीछे थे अमेरिका के हंट ब्रदर्स।
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