बच्चों के पेट के कीड़े खत्म करेगा कच्चा पपीता? देने से पहले जान लें सही उम्र, मात्रा और सावधानियां

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Udaipur News Hindi: बच्चों के पेट में कीड़े एक आम समस्या है, जिसके लिए कच्चा पपीता और उसके बीज पारंपरिक घरेलू उपाय माने जाते हैं. लेकिन इसे देने से पहले बच्चे की उम्र, सही मात्रा और तरीका जानना बेहद जरूरी है. अधिक मात्रा या गलत समय पर सेवन से पेट दर्द या एलर्जी हो सकती है. इसलिए घरेलू उपाय अपनाने से पहले सावधानी रखें और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह जरूर लें.

आजकल छोटे बच्चों में पेट के कीड़ों की समस्या आम होती जा रही है. साफ-सफाई में कमी, बाहर का खाना, मिट्टी में खेलना और हाथ धोने की आदत न होने के कारण बच्चों के पेट में कीड़े हो सकते हैं. इससे बच्चे को पेट दर्द, बार-बार उल्टी, दस्त, वजन न बढ़ना और भूख कम लगने जैसी परेशानियां होने लगती हैं. ऐसे में कई माता-पिता घरेलू उपाय तलाशते हैं, जिनमें कच्चा पपीता भी एक नाम है.

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आयुर्वेद में कच्चे पपीते को पाचन के लिए उपयोगी माना गया है. इसमें मौजूद पपेन एंजाइम पाचन तंत्र को मजबूत करने और आंतों में मौजूद हानिकारक कीड़ों को कमजोर करने में मदद कर सकता है.हालांकि बच्चों के मामले में इसका इस्तेमाल बेहद सावधानी से करना जरूरी है.

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बच्चों में कच्चा पपीता कैसे दें: विशेषज्ञों के अनुसार बहुत छोटे बच्चों को कच्चा पपीता नहीं देना चाहिए.आमतौर पर 5 साल से ऊपर के बच्चों में ही इसे सीमित मात्रा में दिया जा सकता है और वह भी डॉक्टर की सलाह के बाद. पहला तरीका है कच्चे पपीते का रस.इसके लिए कच्चा पपीता कद्दूकस कर उसका रस निकाल लें। ½ चम्मच रस में 2–3 चम्मच पानी मिलाएं और सुबह खाली पेट बच्चे को दें. इसके बाद बच्चे को थोड़ा गुनगुना पानी पिला सकते हैं. यह तरीका हल्का माना जाता है.

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दूसरा तरीका है उबला हुआ कच्चा पपीता. कच्चे पपीते के बहुत छोटे टुकड़े काटकर हल्का उबाल लें.ठंडा होने पर 1–2 छोटे टुकड़े बच्चे को खिलाए जा सकते हैं। इससे कच्चे पपीते की तीव्रता कुछ कम हो जाती है.इन उपायों को 3 से 5 दिन से ज्यादा न अपनाएं. अगर सुधार दिखे तो बीच में 2–3 दिन का ब्रेक जरूर दें.

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कच्चा पपीता बच्चों को देने के संभावित फायदे: सीमित मात्रा में दिया गया कच्चा पपीता बच्चों के पेट में मौजूद कीड़ों को कम करने में मदद कर सकता है.इससे पाचन बेहतर होता है, गैस और पेट दर्द में राहत मिल सकती है और बच्चे की भूख धीरे-धीरे सुधर सकती है. साथ ही आंतों की सफाई में भी यह सहायक माना जाता है.

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बच्चों को कच्चा पपीता बिना डॉक्टर की सलाह के न दें. 5 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए यह उपाय बिल्कुल न अपनाएं. अगर बच्चे को उल्टी, दस्त, तेज पेट दर्द, एलर्जी या कमजोरी महसूस हो, तो तुरंत इसका सेवन बंद कर दें. लंबे समय तक या रोजाना इसका इस्तेमाल न करें. अगर कीड़े ज्यादा हों, वजन तेजी से घट रहा हो या खून की कमी के लक्षण दिखें, तो घरेलू उपायों पर निर्भर न रहें और तुरंत बाल रोग विशेषज्ञ से इलाज कराएं.

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