FPI Withdrawal 2025: साल 2025 में विदेशी निवेशकों ने भारतीय घरेलू बाजार पर भरोसा नहीं दिखाया. लगभग पूरे साल विदेशी निवेशकों ने बाजार से पैसों की निकासी की. विदेशी निवेशकों ने इस साल रिकॉर्ड 1.6 लाख करोड़ रुपये मार्केट से निकाले हैं.
बाजार जानकारों ने इस ट्रेड के पीछे करेंसी की अस्थिर चाल, वैश्विक स्तर की अनिश्चितता, अमेरिकी टैरिफ इत्यादि को मुख्य कारण बताया हैं. इसके साथ ही अमेरिकी बॉन्ड की बढ़ती यील्ड, मजबूत डॉलर और ग्लोबल अनिश्चितता के कारण निवेशकों का ध्यान उभरते बाजारों से हटाकर विकसित बाजार की ओर कर दिया. जिसके कारण विदेशी निवेशक भारतीय घरेलू बाजार से दूर होते दिखे. आइए जानते हैं, इस विषय में…
इक्विटी फ्लो के लिए सबसे खराब रहा साल
साल 2025 में विदेशी निवेशकों का रुख भारतीय शेयर बाजार के प्रति काफी सतर्क नजर आया हैं. अब तक विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने इक्विटी बाजार से करीब 1.58 लाख करोड़ रुपये निकाल लिए हैं. वहीं 26 दिसंबर तक डेट सेगमेंट में उन्होंने 59,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का निवेश किया है.
इन आंकड़ों से साफ पता चलता है कि, 2025 इक्विटी निवेश के मामले में सबसे कमजोर साल बन गया है. इससे पहले 2022 में एफपीआई ने 1.21 लाख करोड़ रुपये की निकासी की थी. 2024 में विदेशी निवेशकों ने बाजार में सिर्फ 427 करोड़ रुपये और साल 2023 में भारतीय बाजार में 1.71 लाख करोड़ रुपये का निवेश किया था.
क्या आगे भी यही ट्रेंड देखने को मिलेगा?
न्यूज एजेंसी पीटीआई से मिली जानकारी के अनुसार, एलारा सिक्योरिटीज इंडिया में रिसर्च की डिप्टी हेड और इकोनॉमिस्ट गरिमा कपूर का मानना है कि 2026 में यह ट्रेंड बदल सकता है. उनका कहना है कि नॉमिनल ग्रोथ और कमाई में सुधार से एफपीआई दोबारा भारत की ओर लौट सकते हैं.
साथ ही अमेरिका के साथ ट्रेड डील से टैरिफ का अंतर घटेगा. फेड की संभावित रेट कटौती से डॉलर कमजोर हो सकता है. जिसका फायदा उभरते बाजारों को मिलने की उम्मीद उन्होंने जताई है.
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