Last Updated:
Chhatarpur Tourist Places: अगर आप छतरपुर जिले में घूमने का सोच रहे हैं तो हम आपको छतरपुर के ऐसे टॉप 5 टूरिस्ट प्लेस के बारे में बताने जा रहे हैं, जिन्हें हर कोई घूमना पसंद करता है. खासकर, इन्हें ठंड के मौसम में घूमना रोमांचक होता है. न्यू ईयर पर अगर घूमने का प्लान बना रहे हैं तो यहां आ सकते हैं.
आप छतरपुर में हैं तो साल 2026 में पन्ना नेशनल पार्क भी घूम सकते हैं. खजुराहो से पन्ना नेशनल पार्क लगभग 20 किलोमीटर की दूरी पर है. यहां पहुंचने के लिए आप रेल या हवाई मार्ग से भी खजुराहो आ सकते हैं. अगर आप हवाई मार्ग से आना चाहते हैं तो पन्ना नेशनल पार्क के नजदीक खजुराहो एयरपोर्ट है, जहां आप हवाई जहाज से भी पहुंच सकते हैं. इसके अलावा आप रेल मार्ग से खजुराहो, कटनी, सतना रेलवे स्टेशन भी आ सकते हैं.

छतरपुर से लगभग 45 किलोमीटर दूर खजुराहो जिसे विश्व पर्यटन नगरी कहा जाता है. इस जगह को घूमने के लिए सिर्फ देश से ही नहीं, बल्कि विदेश से भी लोग आते हैं. मध्य प्रदेश के सभी पर्यटन स्थलों में से खजुराहो सबसे ज्यादा घूमा जाता है.

खजुराहो में घूमने के लिए लगभग 1 हजार साल पुराने पश्चिमी मंदिर और पूर्वी मंदिर के अलावा प्राचीन जैन मंदिर भी हैं. खजुराहो के ज्यादातर मंदिर चंदेल कालीन हैं. बताते हैं कि खजुराहो में पहले 85 मंदिर थे, लेकिन धीरे-धीरे यह कम होते गए. खजुराहो के पश्चिमी मंदिर समूह में सबसे ज्यादा सैलानी आते हैं.
Add News18 as
Preferred Source on Google

पश्चिमी मंदिर समूह की बात करें तो कंदरिया महादेव इस समूह का सबसे बड़ा मंदिर है. इसी मंदिर पर सबसे ज्यादा कामुक मूर्तियां देखने को मिलती हैं. इसके अलावा यहां चतुर्भुज मंदिर और वराह मंदिर जैसे तमाम मंदिर हैं. पश्चिमी मंदिर समूह के ही बगल से मतंगेश्वर महादेव का मंदिर है जिसे देखने के लिए लाखों की संख्या में भीड रहती है.

खजुराहो के पूर्वी मंदिर की बात करें तो यहां ब्रम्हा मंदिर, जवारी मंदिर और वामन मंदिर देखने को मिलते हैं. जावरी मंदिर को भगवान परशुराम का मंदिर भी कहा जाता है. पूर्वी समूह मंदिर में सबसे बड़ा मंदिर वामन मंदिर है. मतंगेश्वर और कंदरिया महादेव मंदिर के जैसे ही इस मंदिर का भी अपना स्थान है. इस मंदिर को देखने के लिए भी लाखों लोग देश-विदेश विदेश से आते हैं. इसके अलावा यहां भगवान भोलेनाथ का दूल्हा देव मंदिर भी है.

छतरपुर जिले के नौगांव में स्थित मऊसहानिया गांव जो ऐतिहासिक धरोहरों के लिए जाना जाता है. ये गांव छतरपुर से लगभग 16 किलोमीटर की दूरी पर है. यहां महाराजा छत्रसाल की स्मारक से लेकर रानी कमलापति स्मारक, धुबेला महल, मस्तानी महल, हृदय शाह महल और शीतल गढ़ी जैसी धरोहरें आज भी मौजूद हैं. इन धरोहरों को देखने के लिए लाखों लोग दूर-दूर से आते हैं.

खजुराहो में सिर्फ घूमने के लिए मंदिर ही नहीं है, बल्कि यहां बड़े-बड़े होटेल और आइलैंड भी बनाए गए हैं. खजुराहो से लगभग 12 किलोमीटर दूर कुटनी आईलैंड रिसोर्ट है. जहां कुटनी डैम किनारे प्रकृति का आनंद लिया जा सकता है. साथ ही खजुराहो से लगभग 10 किमी दूर बेनी सागर डैम हैं. यहां प्रकृति का आनंद लिया जा सकता है. इसके अलावा यहां चंदेला और रवांडा जैसे बड़े-बड़े होटल भी हैं. जहां आप स्टे कर सकते हैं.

छतरपुर जिले से लगभग 55 किलोमीटर दूर भगवान शिव का एक ऐसा अनोखा धाम है, जिसे लोग बुंदेलखंड के केदारनाथ के नाम से जानते हैं. इस तीर्थ स्थल को लोग जटाशंकर धाम के नाम से भी जानते हैं. इस तीर्थ स्थल में मंदिर के गर्भ गृह में शिवलिंग मौजूद है, जो स्वयंभू हैं. माना जाता है कि, सदियों पहले यह शिवलिंग अपने आप प्रकट हुआ था, जो आज भी ज्यों का त्यों बना हुआ है.
.