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Norovirus Alert in Winter | सर्दियों में अगर पेट खराब हो या दस्त लगे तो इसे कतई इग्नोर न करें, वरना पेट की पूरी संरचना बिगड़ सकती है. दरअसल, सर्दियों में नोरा वायरस का आक्रमण ज्यादा है. इसलिए इसे विंटर वोमिटिंग बग कहा जाता है. यह इतना खतरनाकर होता है कि यह बहुत ही तेजी से आंतों की दीवार की परत को खरोंचने लगता है जिससे आंतों की दीवार कमजोर होने लगती है और और उस कारण आंतों में भोजन को अवशोषित करने वाले एंजाइम निकलना बंद हो जाता है. इसका परिणाम यह होता है कि बहुत जोर से दस्त लगता है. ऐसे में यह पूरे पेट की संरचना को बिगाड़ कर रख देता है. आइए इस बीमारी के बारे में विस्तार से जानते हैं.
नोरावायरस जिसे विंटर वोमिटिंग बग कहा जाता है यह सर्दियों के मौसम में कई लोगों को डराता है. नोरोवायरस (Norovirus) बेहद संक्रामक वायरस है, जो पेट और आंतों पर तेज़ी से हमला करता है. इससे संक्रमित व्यक्ति कुछ दिनों तक बेहद असहज और बीमार महसूस करता है, और इसका सीधा असर गट हेल्थ पर पड़ता है. नोरोवायरस पाचन तंत्र में सूजन पैदा करता है, जिससे पेट और आंतों की सामान्य कार्यप्रणाली बिगड़ जाती है. इसके कारण अचानक उल्टी, दस्त, पेट में ऐंठन और दर्द, मितली, कभी-कभी हल्का बुखार और शरीर में दर्द करने लगता है.

नोरावायरस आंत में कैसे जाता – नोरोवायरस शरीर में प्रवेश करने के बाद सीधे छोटी आंत (स्मॉल इंटेस्टाइन) तक पहुंच जाता है और वहां आंतों की अंदरुनी परत से चिपक जाता है. यह वायरस बहुत तेज़ी से अपनी संख्या को बढ़ लेता है, जिससे सूजन पैदा होती है और इन संवेदनशील ऊतकों का झड़ना तेज़ हो जाता है. इसके कारण आंतों में तरल और नमक को अवशोषित करने की सामान्य प्रक्रिया बाधित हो जाती है. नतीजतन तरल पदार्थ आंतों में जमा होने लगता है और मल पानी जैसा हो जाता है. पेट में ऐंठन आंतों की मांसपेशियों के संकुचन के कारण होती है, क्योंकि वे इस बाहरी उत्तेजक (इरिटेंट) तत्व को बाहर निकालने की कोशिश करती हैं. वहीं, उल्टी शरीर की एक आपातकालीन प्रतिक्रिया होती है, जिसका उद्देश्य पेट से वायरस को बाहर निकालना होता है. यह पूरी प्रक्रिया शरीर से बड़ी मात्रा में तरल पदार्थ बाहर निकाल देती है, जिससे व्यक्ति बहुत जल्दी डिहाइड्रेशन का शिकार हो सकता है. बार-बार उल्टी और दस्त से शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी हो सकती है, जिससे कमजोरी बढ़ जाती है. अधिकतर मामलों में इसके लक्षण 24 से 72 घंटों तक रहते हैं. हालांकि, व्यक्ति ठीक होने के बाद भी कुछ दिनों तक कमजोरी या पेट की गड़बड़ी महसूस कर सकता है.

संक्रमण कैसे फैलता है-सर्दियों के महीनों में यह अधिक देखने को मिलते हैं. सर्दियों में लोग ज़्यादातर समय घरों या बंद जगहों में एक साथ रहते हैं. इससे नोरोवायरस के बेहद सूक्ष्म कण आसानी से फैलने लगते हैं. इस कारण घरों के अंदर गेट के हैंडल, बाथरूम सीट, नल, फर्श आदि की सतहों पर ये वायरस चिपक जाते हैं जिसे हम नंगी आंखों से नहीं देख पाते हैं. वहीं संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से, दूषित भोजन या पानी से, गंदे हाथों से मुंह छूने पर भी नोरावायरस से लोग संक्रमित हो जाते हैं. नोरोवायरस केवल बैक्टीरिया से होने वाले फूड पॉइज़निंग पर निर्भर नहीं करता. यह किसी संक्रमित व्यक्ति के सीधे संपर्क से भी फैल सकता है. इसी वजह से यह क्रूज़ शिप्स, नर्सिंग होम्स और भीड़भाड़ वाली जगहों पर आम तौर पर पाया जाता है.
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आंतों के माइक्रोबायोम में बदलाव- नोरोवायरस सिर्फ सूजन ही नहीं करता, बल्कि माइक्रोबायोम यानी आंतों में मौजूद उन बैक्टीरिया के संतुलन को भी बिगाड़ देता है, जो पाचन और रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने का काम करते हैं. शोध बताते हैं कि इस संक्रमण से माइक्रोबायोटा की विविधता कम हो सकती है और कुछ हानिकारक बैक्टीरिया जैसे प्रोटियोबैक्टीरिया समूह के ई.कोलाई (E. coli) की मात्रा आंतों में बढ़ सकती है. अगर आंतों में ई कोलाई की संख्या ज्यादा हो जाए तो गुड बैक्टीरिया की संख्या कम हो जाती है. गुड बैक्टीरिया की संख्या में कमी बीमारी के लक्षण खत्म हो जाने के बाद भी बने रहते हैं. नोरोवायरस संक्रमण पर किए गए पशु-अध्ययनों में यह भी देखा गया है कि आंतों में मौजूद कुछ खास बैक्टीरिया संक्रमण की गंभीरता को प्रभावित कर सकते हैं. गट में मौजूद कुछ बैक्टीरिया ऐसे कारक छोड़ते हैं जो या तो नोरोवायरस को बढ़ावा दे सकते हैं, या फिर प्रतिरक्षा कोशिकाओं को सक्रिय कर वायरस से लड़ने में मदद करते हैं.

विंटर वोमिटिंग बग की पहचान कैसे करें- नोरोवायरस का संक्रमण होने पर अचानक उल्टियों होने लगती है. इसके साथ अक्सर पानी जैसे दस्त, मितली और पेट में ऐंठन होती है. कुछ मामलों में हल्का बुखार या सिरदर्द भी हो सकता है. दूषित मल, उल्टी, सतहों, भोजन या पानी के संपर्क में आने के 12 से 48 घंटे के भीतर इसके लक्षण तेजी से सामने आ जाते हैं. यदि डिहाइड्रेशन के लक्षण दिखें—जैसे मुंह का सूखना, चक्कर आना, कई घंटों तक पेशाब न होना या बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर प्रतिरक्षा वाले लोगों में लक्षण बने रहें, तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए.

रिकवरी के उपाय- अधिकांश लोग 1 से 3 दिनों के भीतर ठीक हो जाते हैं, बशर्ते उन्हें पर्याप्त आराम मिले. ऐसे में समय-समय पर ओआरएस (ORS) लेना बहुत जरूरी है. इसके साथ ही उल्टी बंद होने के बाद चावल, केला और टोस्ट जैसे हल्के और सादे भोजन करना चाहिए. लक्षण खत्म होने के बाद भी कम से कम 48 घंटे तक घर पर ही रहें, ताकि संक्रमण दूसरों में न फैले. बचाव का सबसे प्रभावी तरीका व्यक्तिगत स्वच्छता है. इस बचने के लिए 20 सेकंड तक साबुन से हाथ धोना, सतहों की सफाई के लिए ब्लीच जैसे कीटाणुनाशकों का इस्तेमाल करना और किसी प्रकोप के दौरान कच्चे खाद्य पदार्थों को खाने से बचना चाहिए. हालांकि नोरोवायरस का न तो कोई इलाज है और न ही वैक्सीन, लेकिन अच्छी स्वच्छता की आदतें इस वायरस के संपर्क में आने के जोखिम को काफी हद तक कम कर सकती हैं.

आंतों पर लंबे समय तक असर-अगर गट पर पड़े प्रभाव पूरी तरह खत्म न हों, तो कुछ मामलों में समस्या बनी रह सकती है. हालांकि यह अधिकतर लोगों में कम देखने को मिलता है, लेकिन आंतों की परत ठीक होने के दौरान ढीला मल या पेट में असहजता हो सकती है. ऐसे में आंतों की रिकवरी के लिए दही या अन्य फर्मेंटेड खाद्य पदार्थ, पर्याप्त तरल पदार्थ और धीरे-धीरे फाइबर को आहार में शामिल करना फायदेमंद होता है. लक्षणों पर नजर रखना जरूरी है. यदि समस्या बनी रहे, तो हाइड्रेशन की जांच या किसी अन्य संक्रमण की संभावना को देखने की सलाह दी जाती है. विंटर वोमिटिंग बग हमें यह याद दिलाता है कि चालाक वायरस किस तरह हमारे पाचन तंत्र को अचानक प्रभावित कर सकते हैं. लेकिन साधारण सावधानियां—जैसे सही तरीके से हाथ धोना—इसे दूर रखने में मदद करती हैं और सर्दियों के महीनों में परिवार को सुरक्षित रखती हैं.