Khargone New Year Visit Place: नया साल परिवार और दोस्तों के साथ यादगार बनाना चाहते हैं और बजट कम है तो मध्य प्रदेश के खरगोन जिले में स्थित पर्यटन नगरी महेश्वर आपके लिए एक बेहतरीन विकल्प हो सकता है. नर्मदा नदी के किनारे बसा यह ऐतिहासिक शहर शांति, आस्था, खूबसूरत नजारों ओर ऐतिहासिक किले के लिए जाना जाता है. नए साल के मौके पर यहां देशभर से ही नहीं, बल्कि विदेशी पर्यटक भी बड़ी संख्या में पहुंचते हैं.
महेश्वर जितना खूबसूरत है, उसका इतिहास उतना ही समृद्ध और गौरवशाली रहा है. यह नगरी कभी होलकर वंश की राजधानी रही है. मराठा शासिका लोकमाता अहिल्याबाई होलकर ने इंदौर को छोड़ महेश्वर को अपनी राजधानी बनाया था, उन्होंने इस शहर को धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान दिलाई. नर्मदा घाटों का निर्माण कराया और कई मंदिरों का जीर्णोद्धार करवाया. आज भी अहिल्याबाई का योगदान महेश्वर की हर गली और घाट में देखने को मिलता है.
घूमने लायक प्रमुख जगहें
अगर आप महेश्वर आएं और अहिल्या किला न देखें, ऐसा हो ही नहीं सकता. नर्मदा किनारे बना करीब 5वीं शताब्दी में बना यह किला वास्तुकला का शानदार उदाहरण है. यहां मराठा काल ओर मुगल काल की झलक देखने को मिलती है. राजवाड़ा परिसर, अहिल्या बाई की राजगद्दी और उनके पूजा घर में रखा स्वर्ण झूला खास आकर्षण का केंद्र है. इसके साथ ही यहां का राजराजेश्वर मंदिर, काशी विश्वनाथ मंदिर, कालेश्वर महादेव मंदिर और नर्मदा के बीचों बीच बाणेश्वर मंदिर धार्मिक आस्था के प्रमुख केंद्र हैं. शाम के समय सामने घाट पर रात 8 बजे गंगा की तर्ज पर होने वाली भव्य नर्मदा आरती खास आकर्षण होती है, जिसे देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक जुटते हैं.
आसपास की धार्मिक जगहें
महेश्वर से महज 5 किलोमीटर दूर सहस्त्रधारा भी घूम सकते हैं, जहां नर्मदा हजार धाराओं में बहती नजर आती है. यहीं मध्यप्रदेश का एकमात्र दत्त धाम स्थित है. वहीं, महेश्वर से करीब 8 किलोमीटर दूर पवित्र नगरी मंडलेश्वर में स्थित प्राचीन श्री गुप्तेश्वर महादेव मंदिर (शंकराचार्य परकाया प्रवेश स्थल), देश का इकलौता श्री छप्पन देव मंदिर (आद्य गुरु शंकराचार्य और मंडन मिश्र शास्त्रार्थ स्थल), प्राचीन राम मंदिर, ग्राम चोली में विश्व की एकमात्र नृत्य मुद्रा में 9 फिट गणेश प्रतिमा, गोरी सोमनाथ मंदिर, साढ़े ग्यारह हनुमान और चौसठ योगिनी माता मंदिर भी दर्शन योग्य हैं. ये सभी स्थान धार्मिक पर्यटन के साथ-साथ आध्यात्मिक शांति का अनुभव कराते हैं.
कितने दिन का ट्रिप बनाएं
अगर आप परिवार या दोस्तों के साथ आते है तो महेश्वर के लिए 2 से 3 दिन का ट्रिप पर्याप्त माना जाता है. पहले दिन किला, घाट और मंदिरों के दर्शन, दूसरे दिन सहस्त्रधारा और मंडलेश्वर की यात्रा, जबकि तीसरे दिन नर्मदा किनारे सुकून और लोकल बाजार में शॉपिंग की जा सकती है. यहां की माहेश्वरी साड़ी पूरी दुनिया में अपनी खास बनावट के लिए प्रसिद्ध है. ये साड़िया हैंडलूम पर बुनकरों द्वारा हाथों से बुनी जाती है.
ठहरने और खाने का बजट
महेश्वर में बजट अनुसार धर्मशाला से लेकर हेरिटेज होटल तक हर तरह की ठहरने की सुविधा है. साधारण होटल में 500 से 1500 रुपये, जबकि अच्छे होटल या नर्मदा किनारे रुकने के लिए 3000 से 5000 रुपये प्रति रात तक खर्च आ सकता है. खाने-पीने का खर्च औसतन 200 से 500 रुपये प्रति व्यक्ति प्रतिदिन रहता है. वहीं, दो दिन के सामान्य ट्रिप में प्रति व्यक्ति 2000 से 3000 रुपये काफी हैं. बेहतर होटल और घूमने-फिरने को शामिल करें तो बजट 5000 से 6000 रुपये प्रति व्यक्ति तक हो सकता है.
महेश्वर कैसे पहुंचें
महेश्वर सड़क मार्ग से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है. इंदौर से महेश्वर की दूरी करीब 90 किलोमीटर है. जबकि राजधानी भोपाल से 210 किलोमीटर है. खरगोन मुख्यालय से महेश्वर की दूरी 59 किलोमीटर है. इंदौर रेलवे स्टेशन और एयरपोर्ट सबसे नजद है. इंदौर से बस, टैक्सी या निजी वाहन से आसानी से महेश्वर पहुंचा जा सकता है.
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