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Burhanpur news: ऐसे शख्स की कहानी जो 15 साल की उम्र से ही बच्चों के खिलौने बनाना सीख गए थे. आज भी ये शख्स बच्चों के खिलौने बनाते हैं. यह खिलौने प्लास्टिक के नहीं होते हैं और न ही ज्यादा महंगे होते हैं. जिसकी वजह से छतरपुर जिले में ये खिलौने खूब खरीदे जाते हैं.
छतरपुरः ऐसे शख्स की कहानी जो 15 साल की उम्र से ही बच्चों के खिलौने बनाना सीख गए थे. आज भी ये शख्स बच्चों के खिलौने बनाते हैं. यह खिलौने प्लास्टिक के नहीं होते हैं और न ही ज्यादा महंगे होते हैं. जिसकी वजह से छतरपुर जिले में ये खिलौने खूब खरीदे जाते हैं.
बच्चों के लिए बनाते हैं ये आइटम
हर दिन होती है इतनी कमाई
वह बच्चों के लिए जो खिलौने बनाते हैं यह बेहद ही सस्ते दामों में बिकते हैं. हर आयटम 10 रुपए में बेचते हैं जिससे कि यह खिलौने कुछ ही घंटों में खत्म हो जाते हैं. मलखान बताते हैं कि हर दिन उन्हें खिलौने बेचकर 1000 रुपए की कमाई हो जाती है जिससे उनकी रोजी-रोटी आराम से चल जाती है. वह चाहे तो घर बैठकर आराम से खा सकते हैं लेकिन उनका मानना है कि जितना चलते-फिरते रहेंगे उतना मन से भी खुश रहेंगे और शरीर से भी स्वस्थ रहेंगे. इसलिए इस उम्र में भी खिलोने बनाकर घूमना उन्हें बेहद ही पसंद है.
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मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें
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