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Drinking Water Benefits in Brass or Copper Vessels: सर्दियों में पीतल-तांबे का पानी पीना केवल परंपरा नहीं, बल्कि सेहत के लिए फायदेमंद माना जाता है. आयुर्वेदिक विशेषज्ञ डॉ. श्रीराम वैद्य के अनुसार, पीतल में तांबे के गुण पानी को शुद्ध रखते हैं और शरीर की गर्माहट व इम्यूनिटी बनाए रखते हैं. यही वजह है कि सर्दियों में यह पानी स्वास्थ्यवर्धक विकल्प बन जाता है. तांबा दोषों को नियंत्रित करता है और पीतल शरीर को स्थिरता देता है. सर्दियों में इन दोनों का मेल शरीर के लिए अनुकूल माना जाता है.
पीतल कोई अलग धातु नहीं, बल्कि तांबे और जस्ते के मिश्रण से बना होता है. यही वजह है कि पीतल के बर्तन में रखे पानी में तांबे के गुण भी स्वतः आ जाते हैं. सर्दियों में जब शरीर को संतुलित तापमान और शुद्ध पानी की जरूरत होती है, तब तांबा मिला पीतल खास माना जाता है. यह पानी न ज्यादा ठंडा होता है और न ही शरीर को नुकसान पहुंचाता है. साथ ही यह परंपरागत रूप से सुरक्षित और स्वास्थ्यवर्धक माना गया है.

तांबा पानी को शुद्ध करने की प्राकृतिक क्षमता रखता है, जबकि पीतल पानी को लंबे समय तक सुरक्षित रखने में मदद करता है. दोनों के मेल से बना पीतल सर्दियों में पानी को न ज्यादा ठंडा होने देता है और न ही खराब. यही संतुलन इसे खास बनाता है. इसी कारण पुराने समय से पीतल की टंकी और बर्तनों का उपयोग किया जाता रहा है. बदलते मौसम में यह पानी शरीर के अनुकूल माना जाता है.

तांबा पाचन क्रिया को सक्रिय करता है और पीतल शरीर की अंदरूनी गर्माहट बनाए रखता है. सर्दियों में जब कब्ज और गैस की शिकायत बढ़ती है, तब पीतल की टंकी में रखा तांबे वाला पानी पेट के लिए फायदेमंद माना जाता है. इससे भोजन सही तरीके से पचता है और पेट भारी रहने की समस्या कम होती है. नियमित सेवन से पाचन तंत्र संतुलित बना रहता है.
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तांबा शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने में सहायक माना जाता है. जब यही तांबा पीतल के जरिए पानी में मिलता है, तो सर्दियों में वायरल और सर्दी-खांसी से बचाव में मदद मिलती है. यही कारण है कि बुज़ुर्ग इस पानी पर भरोसा करते हैं. ठंड के मौसम में यह शरीर को अंदर से मजबूत बनाता है. साथ ही मौसमी बीमारियों का खतरा भी कम करता है.

आयुर्वेद में तांबे को शुद्धिकरण और पीतल को संतुलन का प्रतीक माना गया है. तांबा दोषों को नियंत्रित करता है और पीतल शरीर को स्थिरता देता है. सर्दियों में इन दोनों का मेल शरीर के लिए अनुकूल माना जाता है. यह पानी शरीर में गर्माहट बनाए रखता है और मौसम बदलने के बावजूद स्वास्थ्य को संतुलित रखता है। इसलिए यह परंपरा आज भी कई घरों में कायम है.

आधुनिक दौर में भले ही स्टील और प्लास्टिक का उपयोग बढ़ गया हो, लेकिन सर्दियों में लोग फिर से तांबा मिले पीतल की ओर लौट रहे हैं. यह परंपरा अब केवल आस्था नहीं, बल्कि सेहत के प्रति समझदारी बन चुकी है. लोग प्राकृतिक और केमिकल-फ्री विकल्पों को प्राथमिकता देने लगे हैं. यही वजह है कि पीतल-तांबे के पानी की मांग सर्दियों में हर घर में बढ़ती जा रही है.