Sprouted Potatoes: अंकुरित आलू खाने चाहिए या नहीं…? एक्सपर्ट से जानें खाने से होता है क्या!

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Sprouted Potatoes: आलू का इस्तेमाल हर घर में अलग-अलग तरह की डिश बनाने के लिए होता है. हम अक्सर देखते हैं कि आलू पर अंकुर निकल आते हैं, भले ही हम उन्हें इस्तेमाल करने वाले हों।. लेकिन क्या हमें अंकुर वाले आलू खाने से बचना चाहिए?

Sprouted Potatoes: आलू लगभग हर घर में मिलते हैं. चाहे आलू की कोई डिश हो या कुछ और, आलू बनाने के अनगिनत तरीके हैं. आलू के बारे में एक बात जो आप देखेंगे, वह यह है कि उनमें अंकुर निकल आते हैं, और अगर हम उन्हें इस्तेमाल करना चाहते हैं, तो हम उन्हें फिर से इस्तेमाल कर लेते हैं. हालांकि, एक्सपर्ट्स का कहना है कि अंकुरित आलू नहीं खाने चाहिए. आइए जानते हैं इसके बारे में विस्तार से…

कृषी तज्ज्ञांच्या मते, बटाटे जास्त काळ प्रकाश, उष्णता किंवा दमट वातावरणात ठेवले गेले तर त्यांच्यात नैसर्गिकरित्या काही विषारी घटक तयार होऊ लागतात. या घटकांना ‘ग्लायकोअल्कलॉइड’ असं म्हटलं जाते. त्यामध्ये सोलानाइन आणि चाकोनाइन हे दोन घटक विशेषतः घातक मानले जातात. बटाट्याचा रंग हिरवट होणे किंवा त्याला अंकुर फुटणं म्हणजे त्यामध्ये या विषारी द्रव्यांचे प्रमाण वाढल्याचं लक्षण असतं.

एक्सपर्ट्स के अनुसार, अगर आलू ज़्यादा समय तक रोशनी, गर्मी या कुछ खास चीज़ों के संपर्क में रहते हैं, तो उनमें नैचुरली कुछ ज़हरीले पदार्थ बन जाते हैं. इन पदार्थों को ग्लाइकोएल्कलॉइड्स कहते हैं. इनमें से दो, सोलानिन और चैकोनिन, खास तौर पर खतरनाक माने जाते हैं. आलू का हरा रंग या उसका रंग बदलना इस बात का संकेत है कि इन ज़हरीले पदार्थों का लेवल बढ़ गया है.

अंकुरलेले किंवा हिरवे बटाटे खाल्ल्यानंतर त्याचे परिणाम काही तासांतच दिसून येऊ शकतात. सुरुवातीला पोटात जडपणा, जळजळ आणि मळमळ जाणवते. त्यानंतर उलट्या, पोटदुखी आणि अतिसाराचा त्रास होऊ शकतो. काही लोकांना चक्कर येणे, डोकेदुखी आणि तीव्र अशक्तपणा जाणवतो. गंभीर परिस्थितीत ताप येणे, शरीरातील पाणी कमी होणे तसेच मज्जासंस्थेवर परिणाम होण्याची शक्यताही नाकारता येत नाही. लहान मुले, वृद्ध व्यक्ती आणि आधीपासून आजार असलेल्या लोकांसाठी हा धोका अधिक गंभीर ठरतो.

अंकुरित या कच्चे आलू खाने का असर कुछ ही घंटों में दिख सकता है. शुरुआत में, पेट में भारीपन, जलन और मतली महसूस हो सकती है। इसके बाद उल्टी, पेट दर्द और दस्त हो सकते हैं. कुछ लोगों को चक्कर आना, सिरदर्द और बहुत ज़्यादा थकान भी हो सकती है. गंभीर मामलों में, बुखार, डिहाइड्रेशन और नर्वस सिस्टम पर भी असर हो सकता है. छोटे बच्चों, बुज़ुर्गों और पहले से किसी बीमारी से पीड़ित लोगों के लिए जोखिम ज़्यादा गंभीर होते हैं.

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अनेकांना असं वाटतं की बटाटे उकळून, तळून किंवा नीट शिजवून घेतल्यास त्यातील विषारीपणा नष्ट होतो. मात्र, हा एक मोठा गैरसमज आहे. सोलानाइनसारखी विषारी संयुगे उच्च तापमानातही पूर्णपणे नष्ट होत नाहीत. त्यामुळे शिजवलेले असले तरी अंकुरलेले किंवा हिरवे बटाटे आरोग्यास हानीकारक ठरू शकतात. म्हणूनच पोषणतज्ज्ञ आणि डॉक्टर असे बटाटे वापरण्याचा सल्ला देत नाहीत.

बहुत से लोगों का मानना ​​है कि आलू को भूनने, तलने या अच्छी तरह पकाने से उनका ज़हर खत्म हो जाता है. हालांकि, यह एक बड़ी गलतफहमी है. सोलानिन जैसे ज़हरीले कंपाउंड ज़्यादा तापमान पर भी पूरी तरह खत्म नहीं होते हैं. इसलिए, अंकुरित या हरे आलू, पकाने के बाद भी सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकते हैं. यही वजह है कि न्यूट्रिशनिस्ट और डॉक्टर ऐसे आलू खाने से मना करते हैं.

दुसरं म्हणजे तुम्ही कंपोस्ट खतासाठी याचा वापर करू शकता. स्वयंपाकघरातील ओला कचरा असल्यास बटाटा लहान तुकड्यांत कापून कंपोस्टमध्ये टाका थेट कचर्‍यात फेकण्यापेक्षा पर्यावरणपूरक असा वापर. बागेमध्ये तुम्ही या बटाट्याचे तुकडे मातीत मिसळून ठेवू शकता. यामुळे जमिनीची ओल धरून ठेवण्यास मदत होईल.

लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि आप आलू फेंक दें. अंकुरित आलू खाने लायक नहीं होते, लेकिन आप उनका इस्तेमाल दूसरे तरीकों से कर सकते हैं. अंकुर एक नए पौधे की शुरुआत होती है. आप घर पर नए आलू उगा सकते हैं. आलू को 2-3 टुकड़ों में काट लें. हर टुकड़े में कम से कम एक अंकुर होना चाहिए. उन्हें एक दिन के लिए छांव में सूखने दें. फिर उन्हें मिट्टी में लगभग 3-4 इंच गहरा लगा दें. 2-3 महीनों में आपके पास नए आलू होंगे.

तुम्ही ग्रामीण भागात राहत असाल तर हा बटाटा गाई-म्हशी, जनावरांना शिजवून द्या. कच्चा देऊ नका. पण प्रमाणातच याचा वापर करा. मुलांना शाळेत प्रोजेक्ट देतात. जिथं बटाट्यापासून चित्र किंवा बटाट्यापासून झाड कसं बनतं, अंकुरण ही प्रक्रिया दाखवली जाते. त्यासाठी वापरू शकता.

Disclaimer : इस खबर में दी गई जानकारी और सलाह एक्सपर्ट्स से बातचीत पर आधारित है. यह सामान्य जानकारी है, पर्सनल सलाह नहीं. इसलिए किसी भी सलाह को अपनाने से पहले एक्सपर्ट से सलाह जरूर लें. किसी भी नुकसान के लिए News-18 जिम्मेदार नहीं होगा.

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