जरूरत की खबर- कहीं आपका मोबाइल चार्जर नकली तो नहीं: फेक चार्जर के 10 खतरे, इन 11 संकेतों से पहचानें चार्जर असली है या नकली

31 मिनट पहलेलेखक: शिवाकान्त शुक्ल

  • कॉपी लिंक

मोबाइल फोन आज हमारी जिंदगी का सबसे जरूरी हिस्सा बन चुका है। बातचीत करनी हो, प्रोफेशनल काम हो, बैंकिंग हो या एंटरटेनमेंट हर जरूरत मोबाइल पर ही निर्भर है। भारत सरकार के सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) के एक सर्वे के मुताबिक, देश में 85.5% परिवारों के पास कम-से-कम एक स्मार्टफोन है।

मोबाइल फोन यूज करने के लिए उसका चार्ज रहना जरूरी है। इसके लिए एक अच्छे चार्जर की जरूरत होती है। लेकिन आजकल बाजार में नकली चार्जर्स की बाढ़ आ गई है। ये चार्जर देखने में असली लगते हैं लेकिन इनमें घटिया कंपोनेंट्स, गलत वोल्टेज सपोर्ट, कमजोर वायरिंग और खराब मटीरियल का इस्तेमाल किया जाता है।

ऐसे चार्जर न सिर्फ मोबाइल को नुकसान पहुंचाते हैं, बल्कि आग लगने, बैटरी फटने, फोन के ओवरहीट होने और करंट लगने जैसी घटनाओं का कारण भी बन सकते हैं। ऐसे में असली और नकली मोबाइल चार्जर के बीच फर्क समझना बेहद जरूरी है।

तो चलिए, आज जरूरत की खबर में हम मोबाइल फोन चार्जर के बारे में विस्तार से बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि-

  • नकली चार्जर से किस तरह के खतरे हो सकते हैं?
  • असली और नकली चार्जर की पहचान कैसे करें?

एक्सपर्ट: आशीष जायसवाल, इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इंस्ट्रूमेंटेशन इंजीनियर, NTPC

सवाल- नकली मोबाइल चार्जर यूज करने के क्या खतरे हैं?

जवाब- नकली चार्जर में सुरक्षा मानकों का ध्यान नहीं दिया जाता है। इससे फोन ओवरहीट होना, बैटरी खराब या फटना, शॉर्ट सर्किट और घर में आग लगने तक का खतरा होता है। इसके अलावा कई बार करंट लगने से जान जाने तक का रिस्क होता है। नीचे दिए ग्राफिक से नकली चार्जर यूज करने के खतरों को समझिए-

सवाल- असली मोबाइल चार्जर की पहचान कैसे कर सकते हैं?

जवाब- इसके लिए चार्जर की बनावट, वजन, फिनिशिंग, पिन और उसके मार्किंग व टेक्स्ट पर ध्यान देना चाहिए। आइए इसे एक-एक करके समझते हैं।

वजन

नकली की तुलना में असली चार्जर थोड़ा ज्यादा वजनदार होते हैं। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि असली में ठोस धातु और हाई क्वालिटी वाले कंपोनेंट्स का यूज किया जाता है, जबकि नकली चार्जर में सस्ते और कम कंपोनेंट्स यूज होते हैं।

फिनिशिंग और बनावट

असली चार्जर का प्लास्टिक मैट, चिकना और एकसमान होता है, जिसमें कोई खुरदुरापन या किनारे नजर नहीं आते हैं। नकली चार्जर अक्सर चमकीले होते हैं और उनकी फिनिशिंग में असमानता दिखती है।

प्लग पिन की बनावट

असली चार्जर में तीनों पिन कनेक्टर बिल्कुल सही और प्लास्टिक केसिंग के साथ पूरी तरह से फ्लश फिट होते हैं। नकली चार्जर में पिन का प्लेसमेंट थोड़ा टेढ़ा-मेढ़ा हो सकता है या वे केसिंग में ढीले फिट हो सकते हैं।

मार्किंग और टेक्स्ट

चार्जर पर BIS मार्क, सेफ्टी साइन स्पष्ट और चमकदार होने चाहिए। नकली चार्जर में ये मार्क अक्सर धुंधले, टेढ़े-मेढ़े होते हैं या फिर पूरी तरह से गायब होते हैं। नीचे दिए ग्राफिक से असली चार्जर की पहचान समझिए-

सवाल- चार्जर के एडॉप्टर पर कुछ सिंबल होते हैं, उनका मतलब क्या है?

जवाब- कई मोबाइल कंपनियां स्मार्टफोन खरीदने पर एडॉप्टर और केबल नहीं देती हैं। ऐसे में लोग इसे ऑनलाइन या ऑफलाइन खरीदते हैं। कई बार वे अनजाने में सस्ता या डुप्लीकेट एडॉप्टर खरीद लेते हैं, जो कि मोबाइल की लाइफ कम कर देते हैं। हालांकि चार्जर के एडाप्टर पर कुछ सिंबल बने होते हैं, जो एडाप्टर की सेफ्टी को दर्शाते हैं। नीचे दिए ग्राफिक से इसे समझिए-

सवाल- नकली मोबाइल चार्जर की पहचान कैसे की जा सकती है?

जवाब- कुछ बातों काे ध्यान में रखकर आसानी से नकली चार्जर की पहचान की जा सकती है। इसे नीचे दिए ग्राफिक से समझिए-

सवाल- क्या नकली मोबाइल चार्जर पहचानने के लिए कोई सरकारी वेबसाइट या एप है?

जवाब- हां, नकली चार्जर की पहचान BIS केयर एप से की जा सकती है। एप में चार्जर का प्रोडक्ट रजिस्ट्रेशन नंबर (CRS नंबर) डालें। अगर एप में चार्जर रजिस्टर्ड नहीं दिखता है तो समझ लें कि वह नकली है।

सवाल- मोबाइल चार्जर खरीदते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

जवाब- चार्जर खरीदते समय सिर्फ कीमत नहीं, उसकी सुरक्षा और प्रमाणिकता पर ध्यान दें। चार्जर हमेशा ब्रांडेड या ऑथराइज्ड स्टोर से ही खरीदें। पैकिंग पर BIS मार्क, मॉडल, बैच नंबर और साफ प्रिंटिंग देखें। बहुत सस्ते या बिना कंपनी के नाम वाले चार्जर न खरीदें। ऐसे चार्जर नकली हो सकते हैं और फोन को नुकसान पहुंचाते हैं। सही चार्जर वही है, जो फोन के वोल्टेज और आउटपुट रेटिंग से मेल खाए।

सवाल- मोबाइल फोन चार्ज करते समय क्या सावधानियां बरतनी चाहिए?

जवाब- मोबाइल चार्ज करते समय थोड़ी सी लापरवाही बैटरी और फोन के लिए नुकसानदायक हो सकती है। इसके लिए कुछ बातों का खास ख्याल रखें। जैसेकि-

  • हमेशा ओरिजिनल चार्जर ही इस्तेमाल करें।
  • चार्जिंग के दौरान फोन का इस्तेमाल न करें, खासकर कॉल या गेमिंग के लिए। इससे फोन ओवरहीट हो सकता है।
  • चार्जिंग के समय फोन को बिस्तर, तकिए या कपड़ों पर न रखें क्योंकि गर्मी फंसने से ब्लास्ट का खतरा बढ़ सकता है।
  • चार्ज पूरा होने पर तुरंत प्लग निकाल दें। ओवरचार्जिंग से बैटरी लाइफ कम होती है।
  • गीले हाथों से चार्जर या फोन को न छुएं। इससे बिजली का झटका लग सकता है।
  • खराब या कटे चार्जिंग केबल का इस्तेमाल न करें। यह शॉर्ट सर्किट का कारण बन सकता है।
  • चार्जिंग पोर्ट और पिन साफ रखें। धूल या नमी से स्पार्किंग या धीमी चार्जिंग हो सकती है।
  • फोन को आउटडोर में चार्ज न करें। बैटरी ओवरहीट होकर ब्लास्ट हो सकती है।
  • रातभर चार्जिंग से बचें। लंबे समय तक चार्जर लगे रहने से सर्किट को नुकसान पहुंच सकता है।
  • फोन की बैटरी चार्जिंग प्रतिशत हमेशा 30% से 80% के बीच रखें। ओवरचार्ज करने से बचें और बैटरी को पूरी तरी डिस्चार्ज भी न होने दें।

…………………………

जरूरत की ये खबर भी पढ़िए

जरूरत की खबर- इलेक्ट्रिक ब्लैंकेट क्या है?: जानें यह कितना सेफ, ठंड में कैसे यूज करें, इस्तेमाल के दौरान न करें ये 7 गलतियां

इलेक्ट्रिक ब्लैंकेट एक खास कंबल होता है, जिसके अंदर पतला हीटिंग वायर लगा होता है। इसे बिजली से जोड़ते ही ये वायर गर्म होता है और पूरे ब्लैंकेट में एक समान गर्मी फैल जाती है। इसमें लगा थर्मोस्टेट ब्लैंकेट के टेम्प्रेचर को कंट्रोल करता है, ताकि ये जरूरत से ज्यादा गर्म न हो। पूरी खबर पढ़िए…

खबरें और भी हैं…

.

Source link

Share me..

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *