नई दिल्ली. आज के दौर में स्मार्टफोन सिर्फ कॉल करने का जरिया नहीं रहा, बल्कि पढ़ाई, काम, बैंकिंग और एंटरटेनमेंट सब कुछ इसी पर टिका है. मोबाइल में डेटा खत्म होते ही ऐसा लगता है जैसे रोजमर्रा की जिंदगी थम सी गई हो. लेकिन अब इसी जरूरत पर खर्च बढ़ने वाला है. देश की बड़ी टेलिकॉम कंपनियां रिलायंस जियो, भारती एयरटेल और वोडाफोन आइडिया मोबाइल रिचार्ज प्लान्स के दाम बढ़ाने की तैयारी में हैं. जानकारों का कहना है कि 2026 में यूजर्स को बड़ा झटका लग सकता है.
मॉर्गन स्टेनली की रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2026 में मोबाइल टैरिफ में 16 से 20 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हो सकती है. टेलिकॉम सेक्टर में आमतौर पर हर 2 साल में एक बार दाम बढ़ाए जाते हैं. आखिरी बार जुलाई 2024 में रिचार्ज महंगे हुए थे. ऐसे में अगली बढ़ोतरी का समय अब करीब आ चुका है.
4G और 5G दोनों प्लान्स होंगे महंगे
इस बार सिर्फ 5G नहीं बल्कि 4G प्लान्स के रेट्स भी बढ़ सकते हैं. कंपनियों का फोकस एक यूजर से मिलने वाली औसत कमाई यानी एआरपीयू बढ़ाने पर है. खास तौर पर रोजाना 2GB डेटा वाले प्लान्स को प्रीमियम कैटेगरी में डालने की तैयारी है. यानी हाई स्पीड डेटा इस्तेमाल करने वालों को ज्यादा पैसे चुकाने पड़ सकते हैं.
5G टेक्नोलॉजी बना सबसे बड़ा कारण
नेटवर्क मेंटेनेंस और इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश टेलिकॉम सेक्टर की पुरानी मजबूरी रही है, लेकिन इस बार 5G सबसे बड़ी वजह है. देशभर में 5G नेटवर्क तेजी से फैल रहा है. ज्यादा स्पीड और बेहतर क्वालिटी देने के लिए कंपनियां इन्वेस्टमेंट का बोझ सीधे यूजर्स पर डालने की तैयारी में हैं.
टेलिकॉम कंपनियों की कमाई क्यों बढ़ाना जरूरी
रेट्स बढ़ने से टेलिकॉम सेक्टर की कमाई में बड़ा उछाल आने की उम्मीद है, खासकर 2027 के फाइनेंशियल ईयर में. फिलहाल भारती एयरटेल एक कस्टमर से औसतन 256 रुपये कमाती है. अगर 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी होती है तो यह आंकड़ा 300 रुपये के पार जा सकता है. अगले 5 साल में एआरपीयू 400 रुपये तक पहुंचने की संभावना भी जताई जा रही है.
एयरटेल को सबसे ज्यादा फायदा, वोडाफोन आइडिया के लिए चुनौती
बढ़े हुए टैरिफ का सबसे ज्यादा फायदा भारती एयरटेल को मिल सकता है. रिलायंस जियो को भी इससे मजबूती मिलेगी. लेकिन पहले से वित्तीय दबाव झेल रही वोडाफोन आइडिया के लिए यह राह मुश्किल हो सकती है. महंगे प्लान्स के साथ कस्टमर्स को बनाए रखना उसके लिए बड़ी चुनौती होगा.
चर्न का डर, लेकिन कंपनियों को भरोसा
टैरिफ बढ़ते ही कई यूजर्स सस्ते नेटवर्क या छोटे प्लान्स की तरफ शिफ्ट हो जाते हैं, जिसे टेलिकॉम की भाषा में चर्न कहा जाता है. हालांकि कंपनियों का मानना है कि यह असर कुछ समय का होता है. पहले भी देखा गया है कि 2 से 3 तिमाही बाद यूजर्स नए रेट्स के आदी हो जाते हैं.
लंबे फायदे के लिए छोटा नुकसान मंजूर
टेलिकॉम कंपनियां मानकर चल रही हैं कि शुरुआती झटके के बाद उनकी कमाई स्थिर और मजबूत होगी. कम समय के नुकसान के बदले लंबे समय की ज्यादा कमाई के लिए वे यह रिस्क लेने को तैयार हैं. कुल मिलाकर, 2026 में मोबाइल चलाना आम आदमी के लिए और महंगा हो सकता है. हाई स्पीड इंटरनेट और नई टेक्नोलॉजी की कीमत अब जेब से चुकानी ही पड़ेगी.
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