कार्डबोर्ड का डिब्बा… पर दिमाग इंसानों से तेज! सरकारी स्कूल के छात्रों ने बनाया AI रोबोट, लोग दंग

Satna News: सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की प्रतिभा को अक्सर संसाधनों की कमी के तराजू पर तौला जाता है, लेकिन जब जज्बा, जिज्ञासा और नवाचार साथ हों तो साधारण साधन भी असाधारण परिणाम दे सकते हैं. कुछ ऐसा ही नजारा शासकीय विद्यालयों में आयोजित सृजन कार्यक्रम के दौरान देखने को मिला जहां कम उम्र के बच्चों ने अपनी बौद्धिक क्षमता और रचनात्मक सोच से सभी को चौंका दिया. विज्ञान, कला और नवाचार की इस प्रदर्शनी में कई मॉडल प्रस्तुत किए गए, लेकिन जिसने सबसे ज्यादा तालियां बटोरीं, वह था 11वीं कक्षा के दो छात्रों द्वारा तैयार किया गया एक हाईटेक रोबोट, जो न सिर्फ सवालों के जवाब देता है, बल्कि पोषण और विज्ञान को भी आसान भाषा में समझाता है.

विज्ञान मेले में दिखी नवाचार की झलक
सृजन कार्यक्रम के तहत विद्यालय परिसर में विज्ञान मॉडल, संरचना मॉडल, रंगोली, चित्रकला, कक्ष सज्जा और जादू नहीं विज्ञान जैसी प्रदर्शनी लगाई गई थी. छात्रों ने अपनी सृजनात्मक, रचनात्मक और कलात्मक प्रतिभा का बेहतरीन प्रदर्शन किया. हर स्टॉल पर कुछ नया देखने को मिल रहा था, लेकिन भीड़ जिस ओर बार-बार खिंच रही थी वह था एक साधारण कार्डबोर्ड से बना दिखने वाला लेकिन दिमाग से बेहद स्मार्ट रोबोट.

कार्डबोर्ड का रोबोट, दिमाग हाईटेक
शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय सज्जनपुर के 11वीं साइंस के छात्र सुजल तिवारी और अनुज केवट ने लोकल 18 को बताया, उन्होंने इस रोबोट को सीमित संसाधनों में जुगाड़ तकनीक से तैयार किया है. रोबोट के ऊपरी हिस्से में विभिन्न विटामिन्स के नाम लिखे गए हैं, जबकि निचले हिस्से में बदाम, अखरोट, आम, गाजर जैसे खाद्य पदार्थों के नाम दिए गए हैं. रोबोट के एक हाथ को किसी विटामिन पर और दूसरे हाथ को खाद्य पदार्थ पर स्पर्श कराने पर अगर उस पदार्थ में संबंधित विटामिन मौजूद होता है तो रोबोट के सिर पर लगी लाइट अपने आप जल उठती है.

सवाल पूछिए, दोस्त की तरह जवाब पाइए
इस रोबोट की खासियत यहीं खत्म नहीं होती. छात्र बताते हैं कि यह रोबोट पूछे गए सवालों का जवाब भी देता है और अच्छे दोस्त की तरह प्रतिक्रिया करता है. इसमें सेंसर और बेसिक एआई कॉन्सेप्ट का इस्तेमाल किया गया है, जो सवाल को एनॉलाइज कर डेटा स्टोर करता है और फिर उत्तर देता है. छात्रों का कहना है कि अगर थोड़ा और निवेश और बेहतर संसाधन मिल जाएं तो रोबोट के हाथ भी अपने आप काम करने लगेंगे और यह मॉडल और उन्नत हो सकता है.

शिक्षकों और छात्रों का सामूहिक प्रयास
क्लास टीचर नीलेश पाठक ने लोकल 18 से बातचीत में बताया कि यह रोबोट बच्चों की सोच, समझ और मेहनत का परिणाम है. उन्होंने कहा कि रोबोट कठिन से कठिन सवालों के जवाब देने में सक्षम है और इसमें इस्तेमाल किया गया एआई कॉन्सेप्ट छात्रों की वैज्ञानिक समझ को दर्शाता है. इस प्रोजेक्ट में सुजल तिवारी और अनुज केवट के साथ अजय कुशवाहा और अमन सिंह का भी सहयोग रहा. यह रोबोट न सिर्फ विज्ञान मेले का आकर्षण बना, बल्कि यह भी साबित कर गया कि सरकारी स्कूलों के छात्र किसी से कम नहीं हैं. सही मार्गदर्शन और थोड़े से संसाधन मिलें तो यही छात्र भविष्य के बड़े वैज्ञानिक और इनोवेटर बन सकते हैं.

.

Share me..

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *