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Chhatarpur Top 5 Famous Sweets: अगर आप छतरपुर आएं तो यहां की ये टॉप 5 देसी मिठाइयां जरूर चखें. पीढ़ियों से ये बनाई जा रही हैं. आज भी इनको देसी तरीके से बनाया जाता है. इनका क्रेज इतना है कि लोग काजू कतली की जगह पहले इनको खरीदते हैं, क्योंकि इनका स्वाद मुंह को भा गया है. जानें खासियत और कीमत…
छतरपुर जिले में वो टॉप 5 मिठाइयां हैं, जिनकी डिमांड सालभर रहती है, तो चलिए आपको बताते हैं इन मिठाइयों के बारे में. क्यों लोग काजू कतली छोड़ इनको चुनते हैं…

छतरपुर में खोवा गजक बर्फी की मांग हमेशा बनी रहती है. इस बर्फी को देसी तरीके से बनाया जाता है. इसे शुद्ध दूध से बनाया जाता है. दूध से पहले मावा निकाला जाता है और फिर इस बर्फी को बनाया जाता है. इस बर्फी को बनाने में मेहनत लगती है, इसलिए इसकी कीमत भी ज्यादा होती है. यह बर्फी 300 रुपए किलो है.

छतरपुर में चॉकलेट बर्फी की डिमांड भी हमेशा बनी रहती है. इसे चॉकलेट की डिजाइन में बनाया जाता है, इसलिए इस बर्फी को चॉकलेट बर्फी कहा जाता है. ये बर्फी 100 रुपए किलो बाजार में मिल जाती है.
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छतरपुर जिले में रबा बर्फी की डिमांड भी खूब होती है. यह देसी तरीके से आज भी बनाई जाती है. इसे देसी बर्फी भी कहा जाता है. ये बर्फी स्वाद में मीठी होती है और मुलायम होती है.

छतरपुर में मलाई बर्फी की बहुत डिमांड में रहती है. मलाई बर्फी की खासियत होती है कि यह खाने में बेहद ही स्वादिष्ट होती है और लोगों को खूब पसंद आती है. इसके रेट की बात करें, तो ₹500 किलो यह मिठाई मिलती है. यह बेहद मुलायम होती है. बुजुर्ग भी खूब खाते हैं.

छतरपुर में मलाई बर्फी के साथ ही पेड़े की मांग भी बहुत ज्यादा रहती है. क्योंकि, लोगों को पेड़ा का स्वाद बहुत भाता है. खासकर, ठंड के महीने में पेड़े की बड़ी मांग रहती है.

इन बर्फी को बनाने में बहुत ही समय लगता है. शायद इसलिए इनकी कीमत भी बहुत ज्यादा होती है.

हलवाई सीताराम गुप्ता बताते हैं कि इन सभी मिठाइयों को पुराने देसी तरीके से ही बनाया जाता है. सबसे पहले शुद्ध दूध को गर्म किया जाता है. दूध गर्म करने के बाद गाढ़ी मलाई को जमा दिया जाता है. ये मिठाइयां 100 रुपए किलो से लेकर 300 रुपए किलो तक बिकती हैं.
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