रतलाम की कोर्ट ने नाबालिग सौतेली बेटी को हवस का शिकार बनाने वाले पिता को 20 साल की सजा सुनाई है। खास बात यह है कि बदनामी के डर और परिजनों के दबाव में आकर पीड़िता कोर्ट में अपने बयानों से पलट गई थी, लेकिन डीएनए रिपोर्ट और घटना के बाद दिए गए बयानों के आ
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अभियोजन के अनुसार, 16 साल की पीड़िता ने 6 जुलाई 2021 को डीडी नगर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। उसने बताया कि मां ने 7 साल पहले दूसरी शादी की थी। 29 मई 2021 को सौतेले पिता ने मां को मारपीट कर घर से भगा दिया, लेकिन मुझे नहीं जाने दिया। उसी रात उसने मेरे साथ गलत काम किया और किसी को बताने पर जान से मारने की धमकी दी। बाद में उसने मुझे नानी के घर छोड़ दिया।
मुंह में कपड़ा ठूंसा, हाथ बांधकर मिटाई हवस
8 जून 2021 को आरोपी उसे वापस नानी के घर से ले आया। जब मां कचरा बीनने बाहर गई थी, तब आरोपी ने बेटी का मुंह दबाकर कपड़ा ठूंस दिया और दुपट्टे से हाथ बांधकर फिर से रेप किया। 13 जून को फिर दरिंदगी की गई। तकलीफ बढ़ने पर बेटी ने मां को आपबीती सुनाई, जिसके बाद थाने में केस दर्ज करवाया गया।
पीड़िता मुकरी, लेकिन विज्ञान ने दिया साथ
विशेष लोक अभियोजक ने बताया कि कोर्ट में ट्रायल के दौरान पीड़िता दबाव के चलते होस्टाइल यानी पक्षद्रोही हो गई थी। लेकिन पुलिस ने जांच के दौरान डीएनए टेस्ट कराया था, जिसकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई। कोर्ट ने डीएनए रिपोर्ट और धारा 164 के तहत दर्ज बयानों को अहम सबूत मानते हुए आरोपी को सजा सुनाई। शासन की ओर से पैरवी विशेष लोक अभियोजक गौतम परमार ने की।
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