दिल्ली में प्रदूषण से इन मरीजों को आ रहे अटैक, एम्स की ओपीडी में बढ़ी मरीजों की संख्या

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दिल्ली और एनसीआर में प्रदूषण स्‍तर बढ़ने से एक्यूआई 600 के पार पहुंच गया है. कई इलाकों में लोगों को घर से बाहर सांस लेने में दम घुटने की समस्‍या हो रही है और आंखों में जलन महसूस हो रही है. इतना ही नहीं एम्स और डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल में मरीजों की भीड़ पहुंच रही है. एम्‍स के पल्‍मोनरी एक्‍सपर्ट डॉ.. सौरभ मित्तल ने मास्क पहनने की सलाह दी है.

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एम्‍स की ओपीडी में भारी संख्‍या में मरीज पहुंच रहे हैं.

Delhi AQI: दिल्ली ही नहीं पूरे एनसीआर में प्रदूषण का स्तर अब खतरनाक स्थिति में पहुंच गया है. दिल्ली के कई इलाकों सहित पड़ौसी शहरों में भी एक्यूआई 600 के पार दर्ज किया जा रहा है. दोपहर के बाद भी मौसम में धुंध और धूल के गुबार उड़ते रहते हैं और लोगों को सांस लेने में भी भारी घुटन का सामना करना पड़ रहा है. बेहद खराब एयर क्वालिटी की वजह से स्वस्थ लोग भी अब मरीज बनकर अस्पतालों में पहुंच रहे हैं. दिल्ली के कई अस्पतालों में भारी भीड़ पहुंच रही है.

ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज नई दिल्ली के अलावा डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल के रेस्पिरेटरी और पल्मोनरी मेडिसिन विभागों की ओपीडी में मरीजों की संख्या दोगुनी से ज्यादा हो गई है. इनमें ज्यादातर मरीज खांसी, जुकाम, गले में खराश की परेशानी लेकर आ रहे हैं जबकि बहुत सारे गंभीर मरीज भी हैं. यहां तक कि अस्पतालों की इमरजेंसी में देखा जा रहा है कि सीओपीडी और अस्थमा से जूझ रहे मरीजों को पैनिक अटैक पड़ रहे हैं.

इस बारे में एम्स के के पल्मोनरी मेडिसिन के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. सौरभ मित्तल ने बताया कि पिछले कुछ दिनों से प्रदूषण स्तर बढ़ने से अस्पताल की ओपीडी में मरीजों की संख्या बढ़ गई है. ओपीडी में ऐसे मरीज भी आ रहे हैं जिन्हें पहले कोई स्वास्थ्य संबंधी समस्या नहीं थी लेकिन अब उन्हें खांसी, गले में खराश और जुकाम की परेशानी हो रही है.

इसके साथ ही ऐसे भी मरीज देखे जा रहे हैं जिन्हें पहले अस्थमा या सीओपीडी की बीमारी थी लेकिन अब प्रदूषण स्तर की वजह से उन्हें अटैक आ रहे हैं और उनकी दिक्कतों को कंट्रोल करने के लिए उन्हें इनहेलर, नेबुलाइजर या ओरल स्टेरॉयड देने पड़ रहे हैं.

वहीं आरएमएल अस्‍पताल के रेस्‍प‍िरेटरी डॉक्‍टर अम‍ित जिंदली ने बताया क‍ि रेस्‍प‍िरेटरी व‍िभाग की ओपीडी में रोजाना काफी भीड़ आ रही है. सौ से ज्‍यादा लोग एक-एक द‍िन में वायरल इन्‍फेक्‍शन और खांसी-जुकाम की परेशानी के आ रहे हैं. प्रदूषण की वजह से इन मरीजों की संख्‍या में इजाफा हुआ है.

डॉ. मित्तल कहते हैं कि यह पॉल्यूशन सभी को प्रभावित कर रहा है. जबकि बच्चों और बुजुर्गों के लिए ज्यादा परेशानी पैदा कर रहा है. अगर यह लंबे समय तक जारी रहता है तो सर्दी, जुकाम और खांसी से जूझ रहे सामान्य मरीजों को भी अस्थमा और सीओपीडी जैसी बीमारियां होने का खतरा है. खुद को बचाने का सबसे अच्छा तरीका यह है कि जब बहुत जरूरी हो तभी बाहर जाएं और अगर आपको बाहर जाना ही पड़े तो N95 मास्क पहनकर ही बाहर निकलें.

बचाव के लिए घर के अंदर रहें और अपनी खिड़कियां और दरवाजे बंद रखें.अगर मुमकिन हो और अगर आपके कमरे का साइज छोटा है और आप उसके खिड़की दरवाजों को बंद रख सकते हैं तो आप एयर प्यूरीफायर का इस्तेमाल कर सकते हैं, जिससे आपके कमरे की हवा की क्वालिटी बेहतर हो सकती है.

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प्रिया गौतमSenior Correspondent

अमर उजाला एनसीआर में रिपोर्टिंग से करियर की शुरुआत करने वाली प्रिया गौतम ने हिंदुस्तान दिल्ली में संवाददाता का काम किया. इसके बाद Hindi.News18.com में वरिष्ठ संवाददाता के तौर पर काम कर रही हैं. हेल्थ एंड लाइफस्…और पढ़ें

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