फिजिकल हेल्थ- ब्रेस्ट मिल्क में मिला यूरेनियम: ब्रेन–किडनी के लिए खराब, रुक सकती है ग्रोथ, जानें टॉक्सिन साफ करने के सही तरीके

36 मिनट पहले

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बिहार के कुछ जिलों में हुई हालिया स्टडी ने लोगों को चौंका दिया है। इस स्टडी में 17 से 35 साल की 40 ऐसी महिलाओं को शामिल किया गया, जो अपने बच्चों को स्तनपान कराती हैं। इन सभी महिलाओं के दूध के सैंपल लिए गए। जांच में सभी सैंपल्स में यूरेनियम पाया गया, जिसकी अधिकतम मात्रा 5.25 माइक्रोग्राम प्रति लीटर तक दर्ज की गई।

यूरेनियम केवल रेडियोएक्टिव नहीं होता, बल्कि यह एक खतरनाक केमिकल भी है। यह शरीर में पहुंचकर किडनी और हड्डियों को नुकसान पहुंचाता है। शिशुओं के लिए यह खतरा और ज्यादा है, क्योंकि उनके शरीर का इम्यून सिस्टम पूरी तरह विकसित नहीं होता है। ऐसे में दूध के जरिए यूरेनियम उनका विकास और दिमागी सेहत प्रभावित कर सकता है।

भारत में यह समस्या इसलिए गंभीर मानी जा रही है, क्योंकि बिहार समेत कई राज्यों में लोग पीने के लिए सीधे भूजल पर निर्भर हैं और कई इलाकों के पानी में पहले से यूरेनियम मिलने की पुष्टि हो चुकी है। दूषित पानी मां के शरीर से होकर सीधे बच्चे तक पहुंच सकता है। इसलिए यह बेहद चिंताजनक है।

इसलिए ‘फिजिकल हेल्थ’ में आज ब्रेस्ट मिल्क में मिले यूरेनियम की बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि-

  • यूरेनियम से किन अंगों को सबसे अधिक नुकसान होता है?
  • यूरेनियम वाले पानी को कैसे साफ किया जा सकता है?

एक्सपर्ट- डॉ. मनीष मित्तल, सीनियर कंसल्टेंट, नियोनेटोलॉजी, कोकून हॉस्पिटल, जयपुर

सवाल- ब्रेस्ट मिल्क में यूरेनियम मिलने का मतलब क्या है और यह बच्चे तक कैसे पहुंचता है?

जवाब- ब्रेस्ट मिल्क में यूरेनियम मिलने का मतलब है कि मां के शरीर में मौजूद यह मेटल दूध के जरिए बच्चे तक पहुंच रही है। यूरेनियम आमतौर पर दूषित पीने के पानी, खाने या धूल-मिट्टी के संपर्क से शरीर में प्रवेश करता है।

सवाल- यूरेनियम बच्चे के शरीर के किन अंगों को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाता है?

जवाब- यूरेनियम का सबसे ज्यादा असर बच्चे की किडनी पर पड़ता है, क्योंकि यही शरीर से टॉक्सिन्स निकालने का काम करती है। इसकी वजह से किडनी के फिल्टर कमजोर हो सकते हैं। इसके अलावा यूरेनियम हड्डियों में जमा होकर उनकी ग्रोथ को प्रभावित कर सकता है। नवजात शिशुओं में यह दिमागी विकास पर भी असर डाल सकता है, क्योंकि उनका नर्वस सिस्टम पूरी तरह विकसित नहीं होता है। लंबे समय में इससे कमजोरी, धीमी ग्रोथ और स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है।

सवाल- क्या ब्रेस्ट मिल्क में यूरेनियम मिलने पर दूध पिलाना तुरंत बंद कर देना चाहिए?

जवाब- ब्रेस्ट मिल्क में यूरेनियम मिलने की आशंका पर दूध पिलाना तुरंत बंद नहीं करना चाहिए। डॉक्टरों के अनुसार, ब्रेस्ट मिल्क शिशु के लिए सबसे सुरक्षित और पोषक आहार है। यूरेनियम का स्तर आमतौर पर इतना अधिक नहीं होता कि तत्काल नुकसान करे। बिना जांच और डॉक्टर की सलाह के दूध रोकना बच्चे के लिए ज्यादा नुकसानदेह हो सकता है। सही तरीका है कि मां और पानी की जांच कराई जाए और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ से मार्गदर्शन लिया जाए।

सवाल- ब्रेस्ट मिल्क में यूरेनियम मिलने पर मां को स्तनपान कराना चाहिए या नहीं, डॉक्टर क्या सलाह देते हैं?

जवाब- महिलाएं अपने शरीर या ब्रेस्ट मिल्क में यूरेनियम की जांच सरकारी मेडिकल कॉलेज, जिला अस्पताल या मान्यता प्राप्त लैब में करवा सकती हैं। इसके लिए आमतौर पर दूध, खून या पेशाब के सैंपल लिए जाते हैं, जिन्हें खास मशीनों से जांचा जाता है। जांच के लिए डॉक्टर की सलाह जरूरी होती है। रिपोर्ट आने पर वही तय करते हैं कि स्तर सुरक्षित है या इलाज और सावधानी की जरूरत है।

सवाल- सवाल- ब्रेस्ट मिल्क में यूरेनियम आता कहां से है, पानी, खाना या हवा से?

जवाब- ब्रेस्ट मिल्क में यूरेनियम का आमतौर पर दूषित पीने के पानी से होता है। जिन इलाकों के भूजल में यूरेनियम होता है, वहां वही पानी पीने से यह मां के शरीर में पहुंच जाता है। कम मात्रा में यह खाने की चीजों के जरिए भी आ सकता है, खासकर पानी से उगी फसलों से होता है। सांस के जरिए इसका जोखिम बहुत कम होता है। शरीर में पहुंचकर यूरेनियम ब्लड के साथ मिल्क ग्लैंड्स तक पहुंच जाता है।

सवाल- किन इलाकों में रहने वाली महिलाओं को ज्यादा सावधान रहने की जरूरत है?

जवाब- उन इलाकों में रहने वाली महिलाओं को ज्यादा सावधान रहना चाहिए जहां भूजल में यूरेनियम की पुष्टि हो चुकी है। बिहार के कुछ जिले, राजस्थान, पंजाब, हरियाणा और तेलंगाना के कई हिस्से ऐसे क्षेत्र माने जाते हैं। जहां लोग सीधे बोरिंग या हैंडपंप का पानी पीते हैं, वहां खतरा बढ़ जाता है। प्रेग्नेंट और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को ऐसे क्षेत्रों में पानी की नियमित जांच करानी चाहिए और सुरक्षित फिल्टर या शुद्ध स्रोत का ही उपयोग करना चाहिए।

सवाल- क्या घर पर उबला हुआ पानी पीने से यूरेनियम का खतरा कम हो जाता है?

जवाब- घर पर पानी उबालने से यूरेनियम का खतरा कम नहीं होता है। उबालने से सिर्फ बैक्टीरिया और कीटाणु मरते हैं, लेकिन यूरेनियम एक मेटल एलिमेंट है, जो पानी में घुला रहता है और उबालने से नष्ट नहीं होता है। बल्कि पानी उबलने पर मात्रा घटने से इसकी डेंसिटी हल्की बढ़ भी सकती है। इसलिए यूरेनियम से बचाव के लिए उबालना काफी नहीं, उचित वॉटर फिल्टर या सुरक्षित जल-स्रोत होना जरूरी है।

यूरेनियम फिल्टर करने की ये सभी तकनीक कैसे काम करती हैं, विस्तार से समझिए।

RO फिल्टर

RO फिल्टर सेमी-पर्मिएबल मेम्ब्रेन की मदद से पानी में घुले यूरेनियम जैसी भारी धातुओं को अलग कर देता है। यह यूरेनियम रिमूवल का सबसे असरदार घरेलू तरीका माना जाता है।

आयन एक्सचेंज सिस्टम

यह सिस्टम पानी में मौजूद यूरेनियम आयनों को सुरक्षित आयनों से बदल देता है। इससे पानी में यूरेनियम की मात्रा कम होती है और पानी पीने योग्य हो जाता है।

एक्टिवेटेड एलुमिना फिल्टर

एक्टिवेटेड एलुमिना यूरेनियम को अपनी सतह पर सोख लेता है। यह खासतौर पर ग्राउंडवाटर से यूरेनियम हटाने में प्रभावी और वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित तकनीक है।

डिस्टिलेशन

डिस्टिलेशन में पानी को उबालकर भाप बनाई जाती है। यूरेनियम जैसे भारी तत्व पीछे रह जाते हैं, जिससे कंडेंस हुआ पानी ज्यादा सुरक्षित और साफ होता है।

कॉगुलेशन फिल्ट्रेशन

इस प्रक्रिया में केमिकल मिलाकर यूरेनियम कणों को बड़े कणों में बदला जाता है। बाद में फिल्ट्रेशन से इन्हें हटाकर पानी को साफ किया जाता है।

एब्जॉर्प्शन मीडिया फिल्टर्स

इन फिल्टर्स में खास मीडिया होता है, जो यूरेनियम को केमिकल बांड के जरिए पकड़ लेता है। यह तकनीक पानी से भारी धातुएं हटाने में कारगर मानी जाती है।

कम्युनिटी वाटर ट्रीटमेंट प्लांट

ये प्लांट बड़े स्तर पर RO, आयन एक्सचेंज और फिल्ट्रेशन तकनीक मिलाकर यूरेनियम हटाते हैं। इससे पूरे इलाके को सुरक्षित और नियंत्रित पानी सप्लाई होता है।

सवाल- घर के RO या दूसरे वॉटर फिल्टर क्या सच में यूरेनियम रोक पाते हैं?

जवाब- घरेलू RO (रिवर्स ऑस्मोसिस) फिल्टर यूरेनियम को काफी हद तक रोक पाते हैं, क्योंकि यह घुली हुई भारी धातुओं को पानी से अलग कर देता है। हालांकि सामान्य कैंडल फिल्टर या UV फिल्टर यूरेनियम नहीं हटा पाते। सही सुरक्षा के लिए ऐसा RO सिस्टम जरूरी है जो हेवी मेटल रिमूवल सर्टिफाइड हो और जिसकी नियमित सर्विसिंग की जाए। बिना मेंटेनेंस के फिल्टर भी असरदार नहीं रहते।

सवाल- बच्चे में यूरेनियम का असर होने पर शुरुआत में क्या लक्षण दिखते हैं?

जवाब- बच्चे में यूरेनियम के असर के शुरुआती लक्षण अक्सर स्पष्ट दिखाई नहीं देते, लेकिन धीरे-धीरे बार-बार उल्टी, सुस्ती, भूख कम लगना, वजन न बढ़ना, पेशाब में बदलाव या असामान्य थकान दिख सकती है। कुछ बच्चों में बार-बार संक्रमण, हड्डियों में कमजोरी या विकास की गति धीमी होने के संकेत भी मिल सकते हैं। ऐसे लक्षण लंबे समय तक रहने पर किडनी और दिमागी विकास प्रभावित होता है।

सवाल- अगर बच्चे में कोई लक्षण दिखे तो सबसे पहले क्या करना चाहिए?

जवाब- ऐसे लक्षण दिखते ही सबसे पहले बच्चे को नजदीकी सरकारी अस्पताल या बाल-विशेषज्ञ को दिखाएं। खुद से दवा न दें। डॉक्टर बच्चे की जांच कर खून, पेशाब या अन्य जरूरी टेस्ट करवा सकते हैं। साथ ही मां के पीने के पानी और स्वास्थ्य की जांच भी सुझाई जाती है। समय पर इलाज और सही सलाह से गंभीर नुकसान से बचा जा सकता है, इसलिए देरी करना खतरनाक हो सकता है।

सवाल- क्या ऐसे मामलों में फॉर्मूला मिल्क बच्चे के लिए सुरक्षित विकल्प हो सकता है?

जवाब- डॉक्टर की सलाह पर साफ पानी से तैयार किया गया फॉर्मूला मिल्क अस्थायी विकल्प हो सकता है, लेकिन बिना जांच और सलाह के ब्रेस्ट मिल्क छोड़ना सही नहीं होता है।

सवाल- प्रेग्नेंट महिलाओं को यूरेनियम से बचने के लिए क्या-क्या खास सावधानियां अपनानी चाहिए?

जवाब- केवल RO या सुरक्षित पानी पिएं, बोरिंग या हैंडपंप का सीधा पानी न लें। डॉक्टर से जांच करवाएं और संतुलित आहार के साथ नियमित एंटीऑक्सिडेंट युक्त भोजन लें।

सवाल- रोज के खाने में कौन-सी चीजें जोखिम बढ़ा सकती हैं और कौन-सी बचाव में मदद करती हैं?

जवाब- दूषित पानी से उगी सब्जियां या अनजान स्रोत का खाना जोखिम बढ़ा सकता है, जबकि फल, हरी सब्जियां, दूध, दाल और विटामिन-C युक्त आहार शरीर को बचाव में मदद करता है।

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