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दुनिया में तमाम तानाशाह पैदा हुए हैं, जिसमें से एक तानाशाह ऐसा भी था जिसे डेड बॉडीज के साथ क्रूरता के लिए ‘कसाई’ का टैग मिला था. ये तानाशाह फ्रिज में अपने विरोधियों के कटे हुए सिर कलेक्ट करता था. सिर्फ विरोधी ही नहीं उसने अपनी पत्नी का जो हाल किया था, वो आम इंसान सुन भी नहीं पाएगा. उसकी मौत की कहानी किसी फिल्मी स्टोरी से कम नहीं है. आखिरी वक्त में उसे ‘अपनों’ ने ही पहचानने से इनकार कर दिया था.
कंपाला: एक देश की किस्मत में ऐसा राष्ट्रपति आया था, जिसे इतिहास ‘बुचर’ यानी कसाई के रूप में जानता है. लोगों को ‘हीरो’ के सपने दिखाकर ये बुचर सत्ता में आया था, जो बाद में दुनिया का सबसे खूंखार तानाशाह बन गया. अगर उसके खिलाफ किसी ने आवाज उठाई तो उसकी सिर्फ हत्या नहीं होती थी बल्कि ये तानाशाह उसका मांस खा जाता था. दावा तो यहां तक किया जाता है कि वो अपनी फ्रिज में कटे हुए सिर जमा करके रखता था. ये ‘कसाई’ कोई और नहीं बल्कि युगांडा के इतिहास का सबसे खूंखार तानाशाह ईदी अमीन है. उसके बारे में ऐसे-ऐसी किस्से हैं जिसे सुनकर इंसानियत कांप जाए.
पहले हत्या फिर शव के साथ करता था ये काम
ईदी अमीन को ‘बुचर ऑफ युगांडा’ कहा जाता था और ये नाम ऐसे ही नहीं मिला, उसके पूर्व सहयोगी और देश से जान बचाकर भागे लोगों ने खुलासा किया था कि ये तानाशाह अपने राजनीतिक विरोधियों को टॉर्चर करके मारता था और फिर उनका मांस खाता था. यही नहीं उनके कटे हुए सिर भी फ्रिज में रखता था. बताया जाता है शासन के 8 सालों में उसने कम से कम 5 लाख नागरिकों की हत्या करवाई थी.
ये वही तानाशाह है जिसने एशियाई मूल के लोगों को जान बचाकर भागने के लिए सिर्फ 3 महीने का समय दिया था, जिसमें से ज्यादातर भारतीय थे. इन लोगों को देश से निकालकर बाद ईदी अमीन ने खुद ही युगांडा की अर्थव्यवस्था तबाह कर दी.
नरभक्षी राष्ट्रपति ईदी अमीन
पत्नी का किया था ऐसा हाल
अमीन की क्रूरता केवल राजनीतिक विरोधियों तक ही सीमित नहीं थी, बल्कि उसके निजी जीवन में भी थी. उसने अपनी एक पत्नी के साथ घरेलू हिंसा की और मारपीट से जी नहीं भरा तो उसने पत्नी को मार डाला और उसके शरीर को टुकड़ों-टुकड़ों में काट दिया. बताया जाता है कि अमीन लोगों को मारकर उनका शरीर मगरमच्छों को खिला देता था.
जान बचाकर भागा ईदी अमीन
ईदी अमीन की सत्ता का अंत किसी फिल्मी स्टोरी से कम नहीं था. ईदी अमीन की क्रूरता और नीतियों की वजह से युगांडा और पड़ोसी देश तंजानिया के बीच तनाव चल रहा था. ये बवाल तब बढ़ा जब अमीन की सेना ने अचानक तंजानिया के एक क्षेत्र कागेरा सालिएंट पर कब्जा कर लिया और यही ‘बुचर ऑफ युगांडा’ की सबसे बड़ी भूल साबित हुई. तंजानिया के राष्ट्रपति जूलियस न्येरेरे ने अपनी सेना को खुली छूट देदी और ये सुनते ही ईदी कांप गया. उसे अपनी मौत का एहसास हो गया और वो देश छोड़कर भाग खड़ा हुआ.
बुचर ऑफ युगांडा
उसने सऊदी अरब में शरण ली लेकिन युगांडा ने कभी उसे माफ नहीं किया. 2003 में जब ईदी की मौत हुई तो उसके वतन उसका शरीर लेने से मना कर दिया और कसाई को आखिरी वक्त में अपने देश की मिट्टी तक नहीं मिली.
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