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Balaghat News: ग्रामीणों ने लोकल 18 को बताया कि मास्टर जी महीने में एक या दो बार ही आते हैं. आकर एक बार में हाजिरी को पूरा भर लेते हैं. शिक्षक न सिर्फ शासन को चूना लगा रहे हैं बल्कि मासूम बच्चों के भविष्य के साथ भी खिलवाड़ कर रहे हैं.
बालाघाट. मध्य प्रदेश के बालाघाट पर करीब 35 लाल आतंक का कलंक लगा रहा लेकिन अब वह लगभग मिट ही गया है लेकिन नहीं मिट सकी है अशिक्षा. दरअसल बालाघाट के नक्सल प्रभावित गांवों में शिक्षा व्यवस्था दम तोड़ चुकी है. भले ही सरकार ने लाल आतंक का कलंक मिटा दिया है लेकिन अब अशिक्षा का कलंक माथे पर है. नतीजतन नक्सल प्रभावित इलाके के लोग पलायन करते हैं या फिर बेबसी में जीवन जीते हैं. लोकल 18 एक ऐसे ही नक्सल प्रभावित गांव चितालखोली पहुंचा, जहां के स्कूल में मास्टर आते ही नहीं हैं. आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के भरोसे प्राथमिक स्कूल चल रहा है.
आंगनवाड़ी भवन ही नहीं है
आंगनवाड़ी कार्यकर्ता कुंताबाई ने लोकल 18 को बताया कि गांव में आंगनवाड़ी भवन ही नहीं है. वह स्कूल में आंगनवाड़ी संचालित करती हैं. छात्र देवराज हल्की आवाज में बोला कि आज अर्जुन सर नहीं आए. वह तो आते हैं, हमें वही पढ़ाते हैं लेकिन राजकुमार सोनवाने सर तो स्कूल आते ही नहीं हैं. कल आए थे, पर वो 15-20 दिन में एक बार आते हैं. देवराज ने कहा कि सर नहीं आते हैं, तो हमारी पढ़ाई नहीं हो पाती है. आज दोनों नहीं आए, इसलिए हमें आंगनवाड़ी मैडम पढ़ा रही हैं.
मास्टर जी गुल लेकिन अटेंडेंस फुल
ग्रामीणों ने बताया कि मास्टर जी महीने में एक या दो बार ही आते हैं. आकर एक बार में अटेंडेंस को पूरा भर लेते हैं. मास्टर जी न सिर्फ शासन को चूना लगा रहे हैं बल्कि मासूम बच्चों के भविष्य को भी चूना लगा रहे हैं. नक्सल प्रभावित चैरिया पंचायत के ग्राम चितालखोली जोकि नक्सल प्रभावित इलाका है, यहां पढ़ाने वाले शिक्षक ही लापता हैं. ऐसे में यहां के बच्चों के शिक्षा का स्तर कितना विकसित होगा, आसानी से इसकी कल्पना की जा सकती है. स्कूल भवन जर्जर हालत में, आंगनवाड़ी के लिए अलग भवन नहीं और शिक्षक हफ्तों तक नदारद रहते हैं.
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राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.
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