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Agriculture News: इसका प्रभाव दो से तीन दिनों में दिखने लगता है और प्याज के पौधे फिर से हरे होने लगते हैं. नर्सरी तैयार करने से पहले ही खेत में खाद डालनी चाहिए ताकि पौध निकलते ही उसे सही पोषण मिल सके. ऐसा न करने पर बीमारी और कीटों का खतरा बढ़ जाता है.
सीधी. मध्य प्रदेश के विंध्य क्षेत्र में प्याज की खेती के लिए दिसंबर से जनवरी का समय अत्यधिक उपयुक्त है. इस समय तक किसान प्याज की नर्सरी (ब्याहन) तैयार कर लेते हैं लेकिन इस बार किसानों के सामने बड़ी मुश्किल पैदा हो गई है. नर्सरी में पौधे दो से तीन इंच की ऊंचाई पर पहुंचते ही पीले पड़ने लगे हैं और कुछ ही दिनों में सूखने लगे हैं. कृषि अधिकारी संजय सिंह के अनुसार, यह बीमारी गलका रोग है, जिसे डैंपिंग ऑफ भी कहा जाता है. यह बीमारी इतनी तेजी से फैलती है कि सिर्फ दो से तीन दिनों में पूरी नर्सरी को चौपट कर सकती है.
किसान इस बीमारी के चलते चिंतित हैं क्योंकि पौध तैयार होने में 35 से 40 दिन लगते हैं और इस समय बीमारी का हमला सबसे ज्यादा होता है. किसान सलाहकार अनुपम चतुर्वेदी ने लोकल 18 को जानकारी देते हुए बताया कि नर्सरी तैयार होने के बाद ही इस रोग का खतरा बढ़ जाता है, इसलिए इस अवस्था में किसानों को बेहद सतर्क रहने की जरूरत है. उन्होंने बताया कि लगातार पानी देने और खाद देर से डालने की वजह से नर्सरी कमजोर हो जाती है और फफूंद का अटैक शुरू हो जाता है. ऐसे में पौधे पीले पड़ जाते हैं और धीरे-धीरे सूख जाते हैं.
नर्सरी तैयार करने से पहले खेत में डालें खाद
अनुपम चतुर्वेदी ने आगे बताया कि इस बीमारी से बचाव के लिए टैबुकेनाजोल 50% और ट्राइफ्लॉक्सीस्ट्रोबिन का स्प्रे प्रभावी माना जाता है. इसके लिए ट्राइफ्लॉक्सीस्ट्रोबिन या इमिडाक्लोप्रिड 70% को पानी में घोलकर नर्सरी में गहरा छिड़काव करना चाहिए, जिससे दवा सीधे जड़ों तक पहुंचे. उन्होंने बताया कि इसका प्रभाव दो से तीन दिनों में दिखने लगता है और पौधे फिर से हरे होने लगते हैं. नर्सरी तैयार करने से पहले ही खेत में खाद डालनी चाहिए ताकि पौध निकलते ही उसे उचित पोषण मिल सके, नहीं तो बीमारी और कीटों का खतरा बढ़ जाता है. चतुर्वेदी का मानना है कि अगर किसान समय रहते सावधानी बरतें और दवाइयों का सही तरीके से उपयोग करें, तो नर्सरी को इस बीमारी से बचाया जा सकता है.
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राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.
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