Rupee vs Dollar: भारतीय रुपये में लगातार कमजोरी देखने को मिल रही है. शुक्रवार को मिड-डे ट्रेड के दौरान थोड़ी रिकवरी के बाद यह दोबारा डॉलर के मुकाबले फिसल गया. हफ्ते के पहले ही दिन यानी शुक्रवार को शुरुआती कारोबार में रुपया 16 पैसे टूटकर 90.11 के स्तर पर आ गया. कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और विदेशी पूंजी की लगातार निकासी इसकी मुख्य वजह मानी जा रही हैं.
विदेशी मुद्रा कारोबारियों का कहना है कि कंपनियों, आयातकों और विदेशी निवेशकों की ओर से अमेरिकी डॉलर की मजबूत मांग ने भारतीय मुद्रा पर भारी दबाव डाला है. अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया 90.07 पर खुला और बाद में गिरकर 90.11 प्रति डॉलर पर पहुंच गया, जो पिछले बंद भाव से 16 पैसे की गिरावट दर्शाता है. गुरुवार को रुपया 89.95 पर बंद हुआ था. इस बीच, छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की स्थिति को दर्शाने वाला डॉलर इंडेक्स 0.11 प्रतिशत की गिरावट के साथ 98.88 पर रहा.
रुपये में क्यों गिरावट?
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, रुपये में हालिया भारी गिरावट की एक वजह अमेरिका और भारत के बीच ट्रेड डील में प्रगति का न होना है. इसके अलावा, घरेलू बाजार में विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली ने भी रुपये को कमजोर किया है.
एनरिच मनी के सीईओ पोनमुडी आर. का कहना है कि भारत के लिए यूएस फेड रिजर्व का निर्णय काफी अहम रहने वाला है, क्योंकि इसी से रुपये की दिशा और विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) के रुख का निर्धारण होगा। हालांकि, आने वाले दिनों में रुपये पर दबाव बना रह सकता है। रुपये को आरबीआई की संभावित रेपो रेट कटौती, मजबूत जीडीपी वृद्धि दर और घरेलू बाजार में बेहतर लिक्विडिटी से कुछ समर्थन मिलने की उम्मीद है।
फिसला शेयर बाजार
शेयर बाजार के मोर्चे पर भी दबाव देखने को मिला. बीएसई सेंसेक्स शुरुआती कारोबार में 215.73 अंक टूटकर 85,741.24 अंक पर आ गया, जबकि एनएसई निफ्टी-50 भी 64.85 अंक की गिरावट के साथ 26,121.60 पर रहा. इंटरनेशनल स्टैंडर्ड ब्रेंट क्रूड 0.17 प्रतिशत की बढ़त के साथ 63.85 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था. शेयर बाजार के आंकड़ों के अनुसार, शुक्रवार को विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) शुद्ध रूप से 438.90 करोड़ रुपये के बिकवाल रहे.
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