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Chana Moong Methi Paratha Recipe : झारखंड के गांवों में सर्दियों में चना, हरी मूंग और मेथी से बना पराठा लोकप्रिय है, जिसे हजारीबागा की फूड एक्सपर्ट रवीना कच्छप दादी-नानी की रेसिपी बताती हैं. यह पराठा सर्दियों का सूपरफूड माना जाता है.
सर्दियों में झारखंड की रसोई का स्वाद और भी बढ़ जाता है. खासकर गांवों में लोग ऐसे पकवान पसंद करते हैं, जो शरीर को गर्माहट दे और लंबे समय तक ऊर्जा बनाए रखे. इन्हीं पारंपरिक व्यंजनों में एक है चना, हरी मूंग और मेथी से बनने वाला पराठा, जिसे आज भी कई ग्रामीण परिवार नाश्ते में जरूर बनाते हैं.

रेसिपी साझा करते हुए आदिवासी महिला रवीना कच्छप बताती हैं कि यह पराठा पीढ़ियों से बनता आ रहा है. वह दादी-नानी की रेसिपी है. ठंड के मौसम में जब सुबह-सुबह खेत जाना होता है, तब यह पराठा पेट भरने के साथ ताकत भी देता है.

उन्होंने आगे बताया कि इस पराठे को बनाने की तैयारी रात से शुरू हो जाती है. सबसे पहले काले चने और हरी मूंग को रात भर पानी में भिगो दिया जाता है. इससे न केवल दालें फूल जाती हैं, बल्कि सुबह पीसने में भी आसानी होती है. सुबह भिगोई हुई दालों को दो चम्मच दही और दो चम्मच चावल के आटे के साथ मिक्सी में डालकर बारीक पीसा जाता है.
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उन्होंने आगे बताया कि इस बैटर में दही मिलाने का एक खास कारण है. दही से मेथी की कड़वाहट खत्म हो जाती है और पराठे का स्वाद और मुलायम हो जाता है. इसके बाद बैटर में बारीक कटी हरी मिर्च, हरा प्याज और नई तोड़ी हुई मेथी के पत्ते काटकर डाले जाते हैं. सर्दियों में मिलने वाली ताजी मेथी इस पराठे का स्वाद दोगुना कर देती है.

इसके बाद इसमें अजवाइन और स्वादानुसार नमक मिलाया जाता है, जिससे खुशबू और स्वाद दोनों बढ़ते हैं. र बैटर न तो बहुत पतला होना चाहिए और न बहुत गाढ़ा, तभी तवे पर अच्छे से फैलता है और पकने में भी समय नहीं लगता.

तवा गर्म होने पर हल्का तेल लगाकर बैटर को गोल आकार में फैलाया जाता है. इसे धीमी आंच पर दोनों तरफ से सेंका जाता है. ताकि मेथी और दालों की खुशबू अच्छी तरह पककर बाहर आए.

सर्दियों की सुबह यह पराठा अक्सर हरी धनिया की चटनी या दही के साथ परोसा जाता है. झारखंड का यह देसी पराठा आज भी ग्रामीण रसोई की पहचान बना हुआ है, यह खाने में बेहद स्वादिष्ट होता है. जिस कारण सब इसे पसंद करते है.
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