न दवा, न इंजेक्शन, ऋषिकेश का ये तरीका हर दर्द का इलाज, कोई साइड इफेक्ट नहीं, जानें

ऋषिकेश. योग और अध्यात्म की राजधानी माने जाने वाले ऋषिकेश में बीते कुछ वर्षों से एक नई हीलिंग तकनीक तेजी से लोकप्रिय हो रही है. इसे कहा जाता है ध्वनि उपचार या साउंड थेरेपी. इस उपचार में न किसी दवा की जरूरत होती है और न इंजेक्शन की. सिर्फ कंपन से उत्पन्न ध्वनि शरीर और मन दोनों को शांत करती है. शहर के योग केंद्रों, आश्रमों और वेलनेस स्टूडियो में लोग तनाव कम करने, दर्द घटाने और नींद सुधारने के लिए इस थेरेपी का सहारा ले रहे हैं. साउंड थेरेपी में उपयोग किए जाने वाले तिब्बती बाउल, घंटियां और ट्यूनिंग फोर्क शरीर के भीतर एक ऐसी तरंग पैदा करते हैं, जो दिमाग और नसों पर सीधा प्रभाव डालकर शरीर की परेशानी को कम कर देती है.

कैसे करती है काम

लोकल 18 के साथ बातचीत के में ऋषिकेश के आयुष चिकित्सक डॉ. राजकुमार बताते हैं कि ध्वनि चिकित्सा की खूबी है कि ये मन और शरीर के बीच संतुलन बनाती है. हमारे दिमाग में लगातार विचारों का शोर बना रहता है. यही शोर कई बार तनाव, चिंता, अनिद्रा, बेचैनी और सिरदर्द का कारण बनता है. जब तिब्बती बाउल या घंटियों की ध्वनि हमारे आसपास गूंजती हैं, तो इसकी कंपन त्वचा से होकर नसों तक पहुंचती है. शरीर में यह कंपन माइंड सिग्नल्स को धीमा करती है और दिमाग को रिलैक्स होने का संदेश देती है. धीरे-धीरे मांसपेशियां ढीली होती हैं, सांसें हल्की पड़ती हैं और तनाव कम होने लगता है. ये ध्वनि कंपन शरीर के भीतर सूजन कम करके ब्लड सर्कुलेशन बढ़ा देती है. इससे माइग्रेन, थकान, गर्दन या कंधे के दर्द, नींद की कमी, तनाव और डिप्रेशन जैसे कई मानसिक और शारीरिक समस्याओं में सुधार दिखाई देता है.

खुद को रिचार्ज करती हैं कोशिकाएं

ऋषिकेश में साउंड थेरेपी सिखाने वाली साउंड हीलर माया कहती हैं कि ध्वनि उपचार नया नहीं बल्कि सदियों पुरानी प्राचीन पद्धति है. वे बताती हैं कि उन्होंने अलग-अलग देशों में मॉन्क्स, साधुओं और विशेषज्ञों के साथ रहकर यह ज्ञान सीखा. माया का कहना है कि जैसे हम अपने मन को शांत करने के लिए संगीत सुनते हैं, उसी तरह विशेष प्रकार की ध्वनियां शरीर को उपचार देने का काम करती हैं. प्राचीन समय में ध्वनि के प्रयोग सिर्फ धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं थे. मौसम परिवर्तन, वर्षा करने और उपचार करने के लिए भी ध्वनियों का उपयोग किया जाता था. साउंड थेरेपी के जरिए शरीर की सभी कोशिकाएं खुद को रिचार्ज करना शुरू कर देती हैं. यह प्रक्रिया पूरी तरह प्राकृतिक है और इसके किसी साइड इफ़ेक्ट की संभावना नहीं है.

कितना जरूरी

यह तकनीक शरीर में मौजूद ब्लॉकेज को हटाकर ऊर्जा का प्रवाह बढ़ा देती है. इसलिए इसे आज योग रिट्रीट्स, वेलनेस टूरिज्म और थेरेपी सेंटर्स में विशेष स्थान दिया जा रहा है. ऋषिकेश आने वाले विदेशी पर्यटक इसे योग, ध्यान और आयुर्वेद जितना ही जरूरी मानने लगे हैं.

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