Last Updated:
नागौर में घुटनों और जोड़ों के दर्द से परेशान लोग हारश्रृंगार और मिर्ची पत्तों का काढ़ा अपना रहे हैं. यह देसी नुस्खा सूजन और जकड़न कम कर दर्द में राहत देता है. काढ़ा बनाना आसान है और ग्रामीण इलाकों में इसे रामबाण माना जा रहा है.
घुटनों का दर्द, जॉइंट्स की जकड़न और चलने-फिरने में तकलीफ़ आजकल आम समस्या बन गई है. लंबे समय तक बैठे रहना, बढ़ती उम्र, कैल्शियम की कमी या पुरानी सूजन ये सब कारण इस दर्द को बढ़ा देते हैं. ऐसे में आयुर्वेद में बताए गए कुछ घरेलू नुस्खे बेहद कारगर साबित होते हैं. इन्हीं में से एक है हारश्रृंगार (पारिजात) और मिर्ची के पत्तों से बना सरल लेकिन असरदार काढ़ा. यह काढ़ा दर्द से राहत दिलाने में सहायक माना जाता है.

हारश्रृंगार के पत्ते सूजन को कम करने, दर्द शांत करने और जोड़ों में जमा टॉक्सिन्स को बाहर निकालने के लिए प्रसिद्ध हैं. वहीं, मिर्ची के पत्ते शरीर की गर्मी को संतुलित करते हैं और दर्द वाले हिस्सों में रक्त संचार बढ़ाते हैं. इन दोनों का मिश्रण शरीर में जमी सूजन को धीरे-धीरे कम करता है और घुटनों को राहत देता है. इस तरह, यह काढ़ा संयुक्त रूप से दर्द और सूजन पर काम करता है.

सबसे पहले हारश्रृंगार और मिर्ची के पत्तों को साफ़ धो लेना है. इन्हें सिलबट्टे पर चटनी की तरह अच्छी तरह पीस लें. अब इस पेस्ट को 1 लीटर पानी में डालें. अब पानी को मध्यम आँच पर तब तक उबालें जब तक यह आधा न रह जाए. अब इसे छानकर पी सकते हैं.
Add News18 as
Preferred Source on Google

यह क्रम पहले 14 दिन तक चलेगा. इसके बाद 7 दिन का गैप देना है. फिर अगले 2 सप्ताह फिर से इसी तरह पीना है. शुरुआती 10-14 दिनों में ही राहत महसूस होने लगती है. इस पारंपरिक काढ़े का सेवन 3 महीने तक कर सकते हैं. 3 महीने के बाद 1 महीने का गैप ज़रूरी है.

यह काढ़ा घुटनों में सूजन को कम करता है और चलने-फिरने में होने वाले दर्द को जड़ से ख़त्म करता है. यह पुराने जॉइंट पेन के लिए रामबाण है. इसका सेवन करने से उम्र से संबंधित घुटनों की कमज़ोरी और बॉडी में यूरिक एसिड से संबंधित तकलीफ़ ख़त्म होती है. पुराने समय में जब दवाइयाँ नहीं होती थीं तो इसी तरह की औषधियों का उपयोग करके लोग अपने दर्द को जड़ से ख़त्म किया करते थे. यह एक औषधि गुणों से भरी हुई औषधि है, जिसे पीने से ना ही तो कोई साइड इफ़ेक्ट होता है और ना ही कोई नुकसान.

हारश्रृंगार और मिर्ची के पत्तों से बना यह काढ़ा सदियों से आयुर्वेद में उपयोग किया जाता रहा है. यह घुटनों और जोड़ों के दर्द को जड़ से कम करने में सहायक माना जाता है. नियमित सेवन और सही तरीके से कोर्स करने पर यह शरीर में जमा सूजन को घटाता है और जॉइंट्स को प्राकृतिक रूप से मज़बूत बनाता है. यह पारंपरिक नुस्खा एक प्राकृतिक और कारगर विकल्प है.