दिल और शुगर मरीजों के लिए रामबाण है काला गेहूं, जानिए क्यों माना जाता है औषधीय, लोगों में बढ़ी डिमांड

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Alwar News: अलवर जिले में काले गेहूं की खेती तेजी से लोकप्रिय हो रही है. जैविक तरीके से उगाए गए इस गेहूं को हार्ट. शुगर और उच्च रक्तचाप वाले मरीजों के लिए लाभकारी माना जा रहा है. अधिक उत्पादन और बढ़ती बाजार मांग के चलते किसान इसकी ओर आकर्षित हो रहे हैं.

Alwar News. अलवर जिले में खेती को लेकर किसानों में नवाचार का रुझान लगातार बढ़ रहा है. रबी सीजन में जहां पहले पारंपरिक गेहूं की ही बुवाई की जाती थी. वहीं अब किसान नई और पौष्टिक वैरायटियों की ओर रुख कर रहे हैं. इसी क्रम में जिले के कई किसानों ने काले गेहूं की खेती की शुरुआत की है. जिसे स्थानीय स्तर पर सराहना मिल रही है.

किसान बताते हैं कि काले गेहूं की फसल न केवल अच्छी उपज दे रही है बल्कि इसकी बाजार मांग भी बढ़ रही है. कई किसानों ने पहली बार इसे जैविक पद्धति से उगाया और अपेक्षा से अधिक उत्पादन प्राप्त किया. जो अन्य किसानों के लिए एक उदाहरण बन गया है.

क्यों बढ़ रही है काले गेहूं की लोकप्रियता
काला गेहूं स्वास्थ्य की दृष्टि से अत्यंत लाभकारी माना जाता है. इसमें मौजूद फाइबर. एंटीऑक्सीडेंट और कम ग्लाइसेमिक तत्व इसे सामान्य गेहूं से अधिक पौष्टिक बनाते हैं. विशेषज्ञों के अनुसार. यह गेहूं हार्ट. ब्लड शुगर और हाई BP वाले मरीजों के लिए लाभकारी साबित होता है.डॉ. रूप सिंह ने बताया कि कोविड के बाद लोगों का रुझान ऑर्गेनिक खेती और नेचुरल फूड की ओर बढ़ा है. काला गेहूं इसी कारण लोकप्रिय हुआ है. क्योंकि यह रासायनिक उर्वरकों से मुक्त और अधिक पौष्टिक होता है. इसकी उच्च पोषण प्रोफ़ाइल इसकी मांग को बढ़ा रही है.

हार्ट और शुगर मरीजों के लिए कैसे फायदेमंद
काले गेहूं में सामान्य गेहूं की अपेक्षा फाइबर अधिक होता है. जो पाचन क्रिया को धीमा कर शुगर लेवल नियंत्रित रखने में मदद करता है. इसमें मौजूद प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट्स दिल के मरीजों के लिए लाभकारी होते हैं और ब्लड सर्कुलेशन बेहतर बनाते हैं. जिससे हृदय रोग का जोखिम कम होता है.उच्च रक्तचाप वाले मरीज भी इसे सेवन करने से लाभ पाते हैं. क्योंकि इसमें सोडियम व अन्य ऐसे तत्व कम होते हैं जो BP को प्रभावित करते हैं. यह कब्ज. सूजन. हाइपरटेंशन और हृदय संबंधी जोखिम को भी कम करता है. हालांकि. डॉ. रूप सिंह ने यह भी बताया कि अत्यधिक फाइबर के कारण कुछ लोगों में हल्की एलर्जी या फाइबर रिएक्शन देखा जा सकता है. लेकिन यह बहुत मामूली होता है. सामान्य परिस्थितियों में यह बेहद लाभकारी साबित होता है.

किसानों में बढ़ रहा रुझान
अलवर जिले के कई किसान अब अपने खेतों में काले गेहूं की खेती कर रहे हैं और दूसरों किसानों को भी इसे अपनाने की सलाह दे रहे हैं. किसानों का कहना है कि काला गेहूं न केवल स्वास्थ्य के लिहाज़ से बेहतर है. बल्कि बाजार में इसकी अच्छी कीमत मिलने से उनकी आय भी बढ़ रही है. जो पारंपरिक गेहूं की तुलना में काफी अधिक है. फसल की बढ़ती लोकप्रियता से संकेत मिल रहा है कि आने वाले वर्षों में काले गेहूं की खेती अलवर की नई पहचान बन सकती है और कृषि अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान कर सकती है.

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