Last Updated:
आधुनिक जीवनशैली में गलत खानपान, अनियमित दिनचर्या और तनाव से शारीरिक व मानसिक समस्याएं बढ़ रही हैं. ऐसे में आयुर्वेद, जो प्राचीन काल से स्वास्थ्य का आधार रहा है, सरल और प्रभावी समाधान प्रस्तुत करता है. भारत सरकार का आयुष मंत्रालय भी रोजमर्रा की आदतों में आयुर्वेद के नवरत्नों को अपनाने की सलाह देता है. ये कोई दवाएं नहीं, बल्कि ऐसी आदतें हैं, जो तन और मन को निरोग बनाए रखती हैं और जीवन में संतुलन व ऊर्जा लाती हैं.
आज की भागदौड़ भरी जीवनशैली में अनियमित दिनचर्या, गलत खानपान और बढ़ता तनाव सेहत के लिए बड़ी चुनौती बन चुके हैं. ऐसे में आयुर्वेद जो सदियों से स्वास्थ्य का आधार रहा है. आधुनिक जीवन में संतुलन और स्वास्थ्य बनाए रखने का सरल, प्राकृतिक उपाय देता है. भारत सरकार का आयुष मंत्रालय आयुर्वेद के नवरत्नों को अपनाने की सलाह देता है. ये कोई दवाएं नहीं, बल्कि ऐसी आसान रोज़मर्रा की आदतें हैं, जो शरीर और मन को लंबे समय तक निरोग बनाए रखती हैं.

पहला रत्न: सुखद और पूरी नींद लेना स्वास्थ्य और खुशी का सबसे बड़ा स्रोत है. पर्याप्त नींद से शरीर को आराम मिलता है और मानसिक शांति बनी रहती है.

दूसरा रत्न: रोजाना तेल से पूरे शरीर की मालिश त्वचा को स्वस्थ रखती है और शरीर को ऊर्जा प्रदान करती है. यह रक्त संचार को बेहतर बनाकर मांसपेशियों को भी मजबूत बनाती है.
Add News18 as
Preferred Source on Google

तीसरा रत्न: नियमित योग और व्यायाम शरीर को चुस्त रखते हैं और रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करते हैं. यह मानसिक तनाव को कम कर मानसिक शांति भी बनाए रखता है.

चौथा रत्न: सुबह उठकर दोनों नासिका में तिल का तेल या गाय का घी डालना, जिसे नस्य कर्म कहते हैं, सिर, बाल और सांस संबंधी रोगों से बचाव में मदद करता है.

पांचवां रत्न: खाना हमेशा सही समय पर और उचित मात्रा में लेना चाहिए. न ज्यादा, न कम संतुलित आहार ही स्वास्थ्य और दीर्घायु का मूल आधार है.

छठा रत्न: मल-मूत्र के वेग को कभी भी बलपूर्वक नहीं रोकना चाहिए. आवश्यकता महसूस होते ही इसे परित्याग करना स्वास्थ्य के लिए अत्यंत आवश्यक है, अन्यथा इससे कई गंभीर रोग उत्पन्न हो सकते हैं.

सातवां रत्न: सुबह जल्दी उठना, रात को जल्दी सोना और मौसम के अनुसार खानपान बदलना आयुर्वेदिक दिनचर्या का हिस्सा है. इससे शरीर प्राकृतिक संतुलन में बना रहता है और रोग प्रतिरोधक क्षमता भी मजबूत होती है.

आठवां रत्न: च्यवनप्राश, अश्वगंधा और शिलाजीत जैसी आयुर्वेदिक औषधियों का नियमित सेवन शरीर को ऊर्जा और लंबी उम्र प्रदान करता है. जब ये आपके खानपान में नियमित तौर पर शामिल होंगी, तो शरीर को आवश्यक एनर्जी मिलेगी और अनावश्यक तनाव भी कम होगा.

नौवां रत्न: गर्मी, बरसात और सर्दी में अलग-अलग आहार और रहन-सहन अपनाना चाहिए. आयुर्वेद में बताए गए नियमों का पालन करने से मौसमी बीमारियों से बचाव होता है. यदि यह नहीं किया जाता, तो अक्सर सीजनल बीमारियों का सामना करना पड़ता है.

आयुर्वेदाचार्य बताते हैं कि इन नौ नवरत्नों को जीवन में अपनाने से शारीरिक और मानसिक समस्याएं दूर रहती हैं. ये न केवल स्वास्थ्य को बेहतर बनाते हैं, बल्कि जीवन में संतुलन और ऊर्जा भी लाते हैं. आधुनिक जीवनशैली में भी ये नवरत्न उतने ही प्रासंगिक हैं, जितने प्राचीन काल में थे.