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फिजियोथैरेपी एक ऐसा विज्ञान है जो शरीर की मांसपेशियों, हड्डियों, नसों और जोड़ों की समस्या को प्राकृतिक तरीके से ठीक करने में मदद करता है. झरिया फिजियोथेरेपी केंद्र आसपास के गांवों और इलाकों के लिए एक बड़ा राहत का केंद्र बन गया है.
धनबाद. भागदौड़ भरी जिंदगी में हड्डियों और जोड़ों का दर्द आम समस्या बन चुकी है. खासकर कमर, गर्दन, घुटने और कंधे का दर्द कई लोगों की दिनचर्या को प्रभावित कर रहा है. ऐसे में झरिया के चार नंबर टैक्सी स्टैंड स्थित कश्मीर श्री राम लॉज परिसर में संचालित फिजियोथेरेपी उपचार केंद्र लोगों के लिए बड़ा सहारा साबित हो रहा है. यहां पिछले 27 साल से लगातार उपचार सेवाएं प्रदान की जा रही हैं.
यह फिजियोथेरेपी केंद्र झरिया से लेकर आसपास के इलाकों सिंदरी, सासाराम और 10 किलोमीटर के दायरे में आने वाले सभी क्षेत्रों के मरीजों के लिए महत्वपूर्ण केंद्र बन चुका है. खास बात यह है कि यहां बिना ऑपरेशन और बिना दवा के, महज एक्सरसाइज, मशीन और तकनीक के जरिए दर्द से निजात दिलाई जाती है.
पैर, घुटने और मकर दर्द का मिलेगा बेहतर इलाज
केंद्र से जुड़े विशेषज्ञों के अनुसार, फिजियोथेरेपी एक ऐसा विज्ञान है जो शरीर की मांसपेशियों, हड्डियों, नसों और जोड़ों की समस्या को प्राकृतिक तरीके से ठीक करने में मदद करता है. नियमित सत्र लेने पर पुराने और गंभीर दर्द में भी आराम मिलता है. पैर का दर्द हो या घुटने का, कमर की तकलीफ हो या सर्वाइकल के कारण होने वाली समस्या फिजियोथेरेपी से बेहतर सुधार संभव है. यहां तक कि दिव्यांग व्यक्तियों के प्रभावित अंगों को भी विभिन्न व्यायामों के माध्यम से सक्रिय और सुचारू बनाने का प्रयास किया जाता है.
स्थानीय लोग बताते हैं कि झरिया के इस फिजियोथेरेपी सेंटर ने वर्षों से कई मरीजों की जिंदगी में सुधार लाया है. शहर में ऐसे केंद्र कम हैं, इसलिए आसपास के गांवों और इलाकों से भी लोग यहां बड़ी संख्या में उपचार के लिए पहुंचते हैं. आर्थिक रूप से भी यह सेवा किफायती मानी जा रही है. यहां फिजियोथेरेपी सत्र की कीमत लगभग प्रतिदिन 250 रुपये है, जिससे आम आदमी भी बिना ज्यादा खर्च के अपना इलाज करा सकता है.
दर्द को न करें नजरअंदाज
केंद्र संचालक का कहना है कि दर्द को नजरअंदाज करने से समस्या गंभीर हो जाती है. इसलिए यदि शरीर के किसी भी अंग में लगातार दर्द हो या चलने-फिरने में परेशानी आए, तो देर न करें और विशेषज्ञ फिजियोथैरेपिस्ट की मदद जरूर लें. झरिया में वर्षों से संचालित यह केंद्र ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के मरीजों के लिए राहत का ठिकाना बन चुका है. फिजियोथैरेपी के जरिए अपना स्वास्थ्य सुधारने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है. जो यह साबित करता है कि यह उपचार पद्धति आज स्वास्थ्य सेवाओं का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है.
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