आंवला मुरब्बा बनेगा शुगर फ्री-टेस्टी, फॉलों करें बघेलखंडी दादी-नानी की रेसिपी

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Sugar free amla murabba : सर्दियों की दस्तक के साथ ही बघेलखंड की रसोईयों में फिर से लौट आया है दादी-नानी का पारंपरिक लेकिन मॉडर्न ट्विस्ट वाला शुगर-फ्री आंवला मुरब्बा. प्राकृतिक मिठास, झटपट पकने वाली तकनीक और खास स्थानीय तरीका इसे डायबिटिक मरीजों व हेल्थ-कॉन्शस लोगों के लिए सर्दियों का सबसे भरोसेमंद घरेलू नुस्खा बना रहा है.

सर्दियां शुरू होते ही पूरे विंध्य की बाजारों में आंवला खूब चमकने लगता है और इसी मौसम में बघेलखंड की दादी-नानी के नुस्खों वाला शुगर-फ्री आंवला मुरब्बा सुर्खियों में रहता है. डायबिटीज मरीजों के लिए तैयार किया गया यह हेल्दी मुरब्बा सिर्फ 10–15 मिनट में पक जाता है और अपने प्राकृतिक पोषक तत्वों के कारण शरीर के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है.

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डायबिटिक के अलावा भी बहुत से लोग बाज़ार वाली चीनी के मुरब्बे से बचते हैं. इसलिए गुड़, शहद और मिश्री से बनने वाला यह प्राकृतिक मिठास वाला मुरब्बा तेजी से लोकप्रिय हो रहा है. बघेलखंड निवासी कमला तिवारी लोकल 18 से बताती हैं कि यह मुरब्बा न सिर्फ स्वादिष्ट है बल्कि डायबिटीज रोगियों के लिए मीठे में बेहद सुरक्षित विकल्प भी है.

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भारतीय आयुर्वेद में आंवले को अमृत माना गया है. यह इम्यूनिटी बढ़ाने, सर्दी-जुकाम से बचाने, बालों को मजबूत करने, त्वचा को चमकदार बनाने और पाचन को सुधारने में मदद करता है. शुगर-फ्री मुरब्बे का सेवन इन सभी फायदों को बिना चीनी के नुकसान के देता है इसलिए यह आधुनिक समय का परफेक्ट विंटर हेल्थ टॉनिक बन गया है.

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इस मुरब्बे में चीनी की जगह गुड़, शहद या मिश्री का उपयोग होता है. गुड़ गर्माहट देता है और मिनरल्स से भरपूर होता है शहद एंटी-बैक्टीरियल गुणों वाला होता है और मिश्री प्राकृतिक मिठास का हल्का और डायबिटिक-फ्रेंडली विकल्प है. इन तीनों विकल्पों से मुरब्बा स्वादिष्ट भी रहता है और सेहतमंद भी.

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पारंपरिक मुरब्बे में घंटों लग जाते हैं, लेकिन दादी-नानी की तकनीक में आंवला पहले से स्टीम किया जाता है. इससे यह जल्दी नरम हो जाता है और चाशनी को आसानी से सोख लेता है. स्टीमिंग की वजह से मुरब्बा कम समय में तैयार हो जाता है और आंवला हल्का पारदर्शी दिखने लगता है.

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झटपट बनने वाले इस मुरब्बे की सबसे अहम प्रक्रिया है प्रिकिंग. कांटे से गहरे छेद करने से चाशनी अंदर तक जाती है. इसके बाद स्टीम किए आंवलों को गुड़ या मिश्री की धीमी आंच पर बनी चाशनी में तेज आंच पर पकाया जाता है. इसके बाद इलायची, सोंठ या काला नमक मिलाने से इसका स्वाद और बढ़ जाता है.

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शुगर-फ्री आंवला मुरब्बा विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर होता है. यह इम्यूनिटी को मजबूत करता है, पाचन को सुधारता है, कब्ज़ से राहत देता है और बालों को पोषण देता है साथ ही त्वचा को ग्लोइंग बनाने और आंखों की रोशनी बढ़ाने में भी आंवला एक बेहतरीन विकल्प माना जाता है.

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तैयार मुरब्बे को साफ, सूखे और एयरटाइट जार में भरकर महीनों तक सुरक्षित रखा जा सकता है. दादी-नानी की मानें तो रोज़ाना एक-दो पीस आंवला मुरब्बा खाने से शरीर को एंटीऑक्सीडेंट्स, प्राकृतिक मिठास और विटामिन सी का मिश्रण मिलता है जो पूरे साल स्वास्थ्य के लिए बेहद लाभकारी होता है.

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आंवला मुरब्बा बनेगा शुगर फ्री-टेस्टी, फॉलों करें बघेलखंडी दादी-नानी की रेसिपी

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