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World Disability Day 2025: खरगोन में एक ऐसा दिव्यांग युवक आयुष कुंडल रहता है, जिसने अपनी मजबूरी को ही अपनी ताकत बना लिया है. न वह सुन सकता है, न बोल सकता है और न ही चल फिर सकता है, लेकिन उसका हुनर इतना कमाल का है कि बड़े-बड़े कलाकार भी हैरान रह जाते हैं. सीएम से पीएम तक उसके टैलेंट की तारीफ कर चुके हैं.
मध्य प्रदेश के खरगोन के बड़वाह में रहने वाले आयुष कुंडल की जिंदगी एक गंभीर बीमारी के चलते पूरी तरह बदल गई. जन्म से ही दिव्यांग होने के बाद भी उसने अपनी कला के दम पर पूरी दुनिया को चौंका दिया है. आयुष की बनाईं पेंटिंग्स आज सोशल मीडिया से लेकर प्रदर्शनी तक हर जगह चर्चा में रहती हैं.

आयुष न सुन सकता है, न बोल सकता है और उसके शरीर का कोई भी अंग ठीक से काम नहीं करता. सिर्फ एक पैर की कुछ उंगलियां उसके सहारे हैं. इन्हीं उंगलियों से वह इतनी शानदार पेंटिंग बनाता है कि देखने वाला दंग रह जाता है. रंगों से खेलने का उसका तरीका बिलकुल अनोखा है.

27 साल के आयुष की पूरी देखभाल उसकी मां सरोज कुंडल करती हैं. मां और बेटे के बीच बातचीत का तरीका भी बेहद खास है. आयुष अपनी आंखों की हल्की-हल्की हरकतों से अपनी जरूरतें बताता है और सरोज उन इशारों को पढ़ लेती हैं. दोनों का ये रिश्ता देखने वालों की आंखें नम कर देता है.
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सरोज बताती हैं कि आयुष को बचपन से ‘पलीसकर सेलिपर’ नाम की बीमारी है. इस बीमारी ने धीरे-धीरे उसके पूरे शरीर को प्रभावित कर दिया. शुरुआत में आयुष को समझ पाना बहुत कठिन था, लेकिन, मां ने हार नहीं मानी. उन्होंने आयुष को आंखों की भाषा सिखाई ताकि वह अपनी बात कह सके.

जब आयुष थोड़ा बड़ा हुआ, तो उसे दिव्यांगों के लिए चलने वाले एक विशेष स्कूल में दाखिला दिलाया गया. यहां पढ़ाई के अलावा उसे पेंटिंग की ट्रेनिंग भी मिली. ब्रश पकड़ना तो दूर, खड़े होना भी उसके लिए मुश्किल था, लेकिन उसने पैर की उंगलियों से पेंटिंग करने का तरीका खुद खोज लिया.

स्कूल में उसकी पहली पेंटिंग देखकर शिक्षक भी हैरान रह गए थे. रंगों को मिलाने, स्ट्रोक बनाने और कैनवास पर बारीकी दिखाने की उसकी कला देखते ही देखते पूरे शहर में मशहूर हो गई. आयुष की पेंटिंग्स में भावनाओं की गहराई देखकर कोई भी अंदाजा नहीं लगा सकता कि उन्हें बनाने वाला बोल भी नहीं सकता.

धीरे-धीरे आयुष की कला सोशल मीडिया तक पहुंची और वहीं से बड़े कलाकारों और नेताओं की नजर उस पर पड़ी. मुख्यमंत्री मोहन यादव ने उसकी पेंटिंग्स देख कर उसकी खूब तारीफ की. इतना ही नहीं, नरेंद्र मोदी भी उसके टैलेंट की सराहना कर चुके हैं, जिससे आयुष का हौसला और बढ़ गया.

आज आयुष कई दिव्यांगों के लिए प्रेरणा बन चुका है. लोग दूर-दूर से उससे मिलने आते हैं और उसकी कला को करीब से देखना चाहते हैं. उसकी मां कहती हैं कि आयुष ने साबित कर दिया कि अगर मन में जज़्बा हो तो कोई भी कमी इंसान को आगे बढ़ने से नहीं रोक सकती.
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