Infertility Crisis in the World: आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग अपनी सेहत को नजरअंदाज कर रहे हैं. इसकी वजह से कई बीमारियों का खतरा बढ़ गया है. हेल्थ प्रॉब्लम्स की बात होती है, तो लोग डायबिटीज, हाइपरटेंशन और हार्ट डिजीज की बात करते हैं, लेकिन कुछ परेशानियां चुपके से फैल रही हैं और लोगों को इनका अंदाजा ही नहीं लगता है. ऐसी एक ऐसमस्या इनफर्टिलिटी (Infertility) है. इनफर्टिलिटी दुनियाभर में एक गंभीर समस्या बन चुकी है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) का कहना है कि दुनिया की लगभग 17.5% आबादी किसी न किसी रूप में इनफर्टिलिटी का सामना कर रही है.
इनफर्टिलिटी की समस्या क्या है?
ग्रेटर नोएडा के फोर्टिस हॉस्पिटल की पूर्व गायनेकोलॉजिस्ट और IVF स्पेशलिस्ट डॉ. सोनाली गुप्ता ने News18 को बताया कि अगर कोई कपल लगातार 12 महीने तक लगातार अनप्रोटेक्टेड सेक्सुअल इंटरकोर्स करता है, लेकिन प्रेग्नेंसी कंसीव नहीं होती है, तब इस समस्या को इनफर्टिलिटी माना जाता है. कई बार पुरुष इनफर्टिलिटी का शिकार हो जाता है, जिससे प्रेग्नेंसी कंसीव नहीं हो पाती है, जबकि कुछ मामलों में महिलाओं की इनफर्टिलिटी संतान सुख में बाधा बन जाती है. इनफर्टिलिटी को ट्रीटमेंट के जरिए दूर किया जा सकता है और कई तकनीक के जरिए प्रेग्नेंसी कंसीव हो सकती है. हालांकि तमाम लोग शर्म के कारण इनफर्टिलिटी का ट्रीटमेंट नहीं कराते हैं. इनफर्टिलिटी कोई शर्म की बात नहीं, बल्कि एक मेडिकल कंडीशन है.
इनफर्टिलिटी की 5 सबसे बड़ी वजह
अनहेल्दी लाइफस्टाइल और खाने की खराब आदतें इनफर्टिलिटी की सबसे बड़ी वजह हैं. लगातार जंक फूड का सेवन, अत्यधिक शुगर और फैट वाला खाना, पोषक तत्वों की कमी, अनियमित समय पर खाना और शारीरिक गतिविधि की कमी रिप्रोडक्टिव हेल्थ पर बुरा असर डालती हैं. मोटापा पुरुषों में स्पर्म क्वालिटी को घटाता है, जबकि महिलाओं में अंडाशय का संतुलन बिगाड़ देता है. WHO ने भी चेतावनी दी है कि नियमित एक्सरसाइज, संतुलित डाइट और पर्याप्त नींद रिप्रोडक्टिव हेल्थ को बेहतर बनाने के लिए जरूरी है.
डॉक्टर सोनाली के अनुसार तनाव और मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं फर्टिलिटी को बुरी तरह प्रभावित कर रही हैं. आज के समय में काम का दबाव, पर्सनल लाइफ की दिक्कतें और लगातार मानसिक थकान शरीर के हार्मोनल संतुलन को प्रभावित करती हैं. इसके चलते महिलाओं में ओव्यूलेशन प्रभावित होता है और पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन का स्तर गिर सकता है. तनाव न केवल प्रेग्नेंसी की संभावना कम करता है, बल्कि IVF जैसे ट्रीटमेंट को भी बेअसर कर सकता है. इसलिए तनाव कंट्रोल करना बहुत जरूरी है.
एक्सपर्ट की मानें तो देर से शादी, करियर पर ज्यादा फोकस और परिवार बढ़ाने का फैसला टालते रहना आज सामान्य हो चुका है. हालांकि फर्टिलिटी उम्र के साथ तेजी से घटती है. महिलाओं में 35 के बाद एग्स की संख्या और क्वालिटी दोनों कम हो जाती हैं, जबकि पुरुषों में भी उम्र बढ़ने से स्पर्म की गति और गुणवत्ता प्रभावित होती है. उम्र-संबंधी इनफर्टिलिटी वैश्विक स्तर पर तेजी से बढ़ रही है. इस बारे में जागरूक होना बेहद जरूरी है.
इनफर्टिलिटी का एक बड़ा कारण हार्मोनल असंतुलन और स्वास्थ्य संबंधी बीमारियां भी हैं. PCOS, थायरॉयड, एंडोमेट्रियोसिस, फाइब्रॉइड, डायबिटीज और पुरुषों में कम स्पर्म काउंट जैसी समस्याएं सीधे फर्टिलिटी को प्रभावित करती हैं. बहुत से लोग इन बीमारियों के शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज कर देते हैं, जिसके कारण बाद में गंभीर समस्या पैदा होती है. नियमित हेल्थ चेकअप, समय पर इलाज और डॉक्टर की सलाह के अनुसार जीवनशैली में बदलाव से ऐसे मामलों में सुधार लाया जा सकता है.
एयर पॉल्यूशन, स्मोकिंग, शराब और नशीली आदतें भी फर्टिलिटी को बर्बाद कर सकती हैं. हवा में मौजूद रसायन, प्लास्टिक के माइक्रोपार्टिकल्स, कीटनाशकों और पर्यावरणीय प्रदूषकों का प्रभाव पुरुषों और महिलाओं दोनों की प्रजनन क्षमता पर पड़ता है. इसके अलावा धूम्रपान से स्पर्म क्वालिटी तेजी से घटती है और महिलाओं में ओवेरियन रिजर्व कम होने लगता है. अत्यधिक शराब और नशे की आदतें भी गर्भधारण को मुश्किल बनाती हैं. स्वस्थ आदतें अपनाना, प्रदूषण से बचाव और नशीली चीजों से दूरी फर्टिलिटी को बेहतर बनाने का सही तरीका है.