Last Updated:
Jabalpur News: एक्सपर्ट मीनल दुबे ने लोकल 18 को बताया कि साइकोमेट्रिक लैब में छात्रों के आईक्यू लेवल से लेकर डिप्रेशन और स्ट्रेस को जानने के लिए अलग-अलग तरीके हैं. इससे आसानी से स्टूडेंट्स के डिप्रेशन को पहचान कर उन्हें इससे मुक्त किया जा रहा है.
जबलपुर. मध्य प्रदेश के जबलपुर की रानी दुर्गावती यूनिवर्सिटी में एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है. यूनिवर्सिटी के 50 फीसदी से ज्यादा स्टूडेंट स्ट्रेस और मानसिक तनाव से जूझ रहे हैं. यह खुलासा तब हुआ, जब साइकोमेट्रिक लैब से स्टूडेंट्स की जांच की गई. इसमें 50 फीसदी से ज्यादा छात्र स्ट्रेस और डिप्रेशन में मिले. लिहाजा अब यूनिवर्सिटी के कौशल विभाग में स्टूडेंट्स को साइकोमेट्रिक लैब में प्रशिक्षण दिया जा रहा है. प्रशिक्षक स्टूडेंट्स को स्ट्रेस और डिप्रेशन से दूर जाने का प्रशिक्षण दे रहे हैं. इतना ही नहीं, स्टूडेंट्स का टेस्ट भी किया जा रहा है, जिससे स्टूडेंट्स का डिप्रेशन और स्ट्रेस के बारे में पता चल सके. इसके बाद स्टूडेंट्स को उनकी स्ट्रेंथ के बारे में बताया जा रहा है.
प्रशिक्षक मीनल दुबे ने लोकल 18 को बताया कि ऐसे स्टूडेंट्स के लिए अलग-अलग थेरेपी भी दी जा रही है, जिसमें मोटिवेशनल थेरेपी, बिहेवियर थेरेपी के साथ स्टूडेंट के स्ट्रेस को दूर किया जा रहा है. स्टूडेंट्स को 45 मिनट के अलग-अलग सेशन में जानकारी दी जा रही है, जिससे वे पहले अपने आप को जान सकें.
मोबाइल बन रहा सबसे बड़ा कारण
एक्सपर्ट मीनल दुबे ने आगे बताया कि स्टूडेंट्स के स्ट्रेस और डिप्रेशन का सबसे बड़ा कारण मोबाइल बन रहा है. मोबाइल की रील देखते-देखते स्टूडेंट्स अपनी अलग ही दुनिया में चले जाते हैं. वे कल्पना से परे चीजें सोचने लगते हैं. इतना ही नहीं, कई ऐसे मामले भी हैं, जहां स्टूडेंट्स सुसाइड अटेम्प्ट तक करने की कोशिश कर लेते हैं. उन्होंने बताया कि अधिकांश स्टूडेंट्स ज्यादातर समय मोबाइल स्क्रीन पर ही गुजारते हैं, जो इसका सबसे बड़ा कारण बनता है. यही वजह है कि स्टूडेंट्स मन मुताबिक चीज न होने पर डिप्रेशन में चले जाते हैं और गलत निर्णय ले लेते हैं.
लैब में स्ट्रेस लेवल जानने के अलग-अलग तरीके
मीनल दुबे ने आगे बताया कि साइकोमेट्रिक लैब में स्टूडेंट्स के आईक्यू लेवल से लेकर डिप्रेशन और स्ट्रेस को जानने के लिए अलग-अलग तरीके हैं. इससे आसानी से स्टूडेंट्स के डिप्रेशन को पहचान कर दूर किया जा रहा है. यही कारण है कि यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट्स का टेस्ट लिया गया था, जिसमें 50 फीसदी से ज्यादा स्टूडेंट्स स्ट्रेस लेवल से गुजरते हुए नजर आए थे. तनाव में मिले छात्रों की बाकायदा काउंसलिंग की गई और उन्हें प्रशिक्षण देकर मुख्यधारा से जोड़ने का काम किया जा रहा है.
About the Author
राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.
.