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मध्यप्रदेश विधानसभा ने नगरीय निकाय चुनावों से संबंधित 2025 का संशोधन विधेयक पारित किया. अब नगर पालिका व नगर परिषद अध्यक्षों का चुनाव प्रत्यक्ष होगा. 2027 से मतदाता सीधे अध्यक्ष चुनेंगे. राइट टू रिकॉल की सुविधा से स्थानीय शासन में जवाबदेही व पारदर्शिता बढ़ेगी.
भोपाल. मध्य प्रदेश विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दूसरे दिन नगरीय निकाय चुनावों से संबंधित एक बड़ा बदलाव किया गया. नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने विधानसभा में नगरपालिका (द्वितीय संशोधन) विधेयक 2025 और नगर निगम (द्वितीय संशोधन) विधेयक 2025 को ध्वनिमत से पारित करा दिया. इस महत्त्वपूर्ण संशोधन के बाद अब राज्य में नगरपालिका और नगर परिषद के अध्यक्षों का चुनाव दोबारा प्रत्यक्ष प्रणाली (Direct System) से होगा, जिसका अर्थ है कि इन निकायों के मुखिया को मतदाता अब सीधे अपने वोट से चुनेंगे. इसके साथ ही, अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव (Right-to-Recall) लाने की समय सीमा को भी ढाई साल से बढ़ाकर तीन साल कर दिया गया है. विधेयक राज्यपाल के हस्ताक्षर के बाद कानून बन जाएगा, और यह बदलाव 2027 के आगामी नगरीय निकाय चुनावों से लागू होगा.
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सदन में इस कदम को स्थानीय स्वशासन को मजबूत करने वाला और 2022 के अप्रत्यक्ष चुनावों से उपजी समस्याओं का समाधान बताया, यह दावा करते हुए कि प्रत्यक्ष चुनाव से पारदर्शिता बढ़ेगी और स्थानीय नेतृत्व मजबूत होगा. वहीं, विधेयक पर चर्चा के दौरान भाजपा ने इस कदम का समर्थन किया, जबकि विपक्षी दल कांग्रेस ने इसे ‘पार्षदों की भूमिका कम करने का प्रयास’ बताते हुए आलोचना की. नगरीय विकास मंत्री भूपेंद्र सिंह ने स्पष्ट किया कि यह संशोधन नगरपालिका अधिनियम 1961 की धारा 43-क में किया गया है. सदन में बिना किसी वोटिंग के इस विधेयक को पारित कराना, सरकार की ओर से स्थानीय निकायों में जन भागीदारी बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा नीतिगत फैसला माना जा रहा है.
कैसे होगा डायरेक्ट चुनाव; विधेयक के प्रावधानों के अनुसार:
- 2027 में होने वाले अगले नगरीय निकाय चुनाव से पहले मतदान विधि बदलेगी.
- मतदाता अपने वार्ड-परिषद या नगर पालिका के अध्यक्ष पद के लिए सीधे वोट देंगे.
- यानी अब मतदाता पार्षद नहीं अध्यक्ष चुनेंगे.
संशोधन: पिछला और नया चुनावी सिस्टम
पिछले दौर में, 1999 से 2014 तक अध्यक्षों का चुनाव प्रत्यक्ष होता था. पर कोविड के बाद 2022 में यह प्रणाली बदल दी गई थी. तब चुनाव अप्रत्यक्ष हुआ- पार्षदों ने वोट डालकर अध्यक्ष चुना. अब सरकार ने पुन: प्रत्यक्ष चुनाव प्रणाली बहाल की है- क्योंकि अप्रत्यक्ष चुनाव में पार्षदों द्वारा दबाव व अन्य शिकायतें आती थीं.
संशोधन के साथ राइट टू रिकॉल और स्थानीय जवाबदेही
- नए बिल में न केवल चुनाव की प्रक्रिया बदली है, बल्कि राइट टू रिकॉल (लोक द्वारा निर्वाचित अध्यक्ष को हटाने का अधिकार) को भी सशक्त बनाने का प्रावधान है.
- इससे जनता को यह अधिकार मिलेगा कि वे अपने चुने हुए प्रतिनिधि से असंतुष्ट होने पर उन्हें वापस बुला सकें- स्थानीय शासन में जवाबदेही की भावना मजबूत होगी.
सुमित वर्मा, News18 में 4 सालों से एसोसिएट एडीटर पद पर कार्यरत हैं. बीते 3 दशकों से सक्रिय पत्रकारिता में अपनी अलग पहचान रखते हैं. देश के नामचीन मीडिया संस्थानों में सजग जिम्मेदार पदों पर काम करने का अनुभव. प…और पढ़ें
सुमित वर्मा, News18 में 4 सालों से एसोसिएट एडीटर पद पर कार्यरत हैं. बीते 3 दशकों से सक्रिय पत्रकारिता में अपनी अलग पहचान रखते हैं. देश के नामचीन मीडिया संस्थानों में सजग जिम्मेदार पदों पर काम करने का अनुभव. प… और पढ़ें
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