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Winter Superfood: विंध्य में रहने वाले आदिवासी इस हरे साग को सर्दी का सुपरफूड मानते हैं. उनके भोजन में इसका इस्तेमाल होना तय है. दाल में, पराठे में, रायते में… क्योंकि ये साग ताकत का भंडार माना जाता है. आयुर्वेदिक एक्सपर्ट से जानें इसके फायदे.
Winter Superfood: सर्दी की ठंडक के साथ खेतों पर हरियाली की चादर बिछ जाती है. इसी हरियाली में छिपा है एक ऐसा पोषण भंडार जो न केवल स्वादिष्ट है, बल्कि आयुर्वेदिक दवा का काम भी करता है. बथुआ, जिसे मध्य प्रदेश का आदिवासी समुदाय सर्दियों का सुपरफूड कहते हैं. सीधी जिले के ग्रामीण इलाकों में ताकत का प्रतीक बन चुका है. गेहूं, चना और मटर के खेतों में स्वाभाविक रूप से उगने वाली यह हरी भाजी गांवों में भाजी, दाल-बथुआ और परांठों के रूप में बड़े चाव से खाई जाती है.
बथुआ खाने के इतने फायदे
सीधी के आदिवासी और ग्रामीण परिवारों में बथुआ सिर्फ भोजन नहीं, बल्कि स्वास्थ्य रक्षक है. सर्दियों में हर घर में इसकी खुशबू घुल-मिल जाती है. आयुर्वेदिक विशेषज्ञ डॉ. प्रमोद अग्रवाल बताते हैं, “बथुआ विटामिन A, C, कैल्शियम, आयरन और फाइबर का खजाना है. यह हड्डियों को मजबूत बनाता है, इम्यूनिटी बढ़ाता है, पाचन सुधारता है और यूरिन इंफेक्शन, पेट की समस्याओं से बचाव करता है.
महिलाओं के लिए जरूरी
महिलाओं के लिए खासतौर पर फायदेमंद, क्योंकि आयरन मासिक धर्म संबंधी दिक्कतों में राहत देता है. सर्दियों में इसका नियमित सेवन जरूरी है, ताकि मौसमी कमजोरी न पड़े.” डॉ. अग्रवाल के अनुसार, पुरानी आयुर्वेद ग्रंथों में बथुआ को रक्त शोधक और ऊर्जा स्रोत माना गया है.
50 रुपये किलो रेट
सीधी शहर के गांधी चौराहे पर सब्जी विक्रेता सोमनाथ गुप्ता (कुच्वाही गांव) ने बताया, “बथुआ खेतों में मुफ्त उगता है, लेकिन बाजार में 50-60 रुपये किलो बिकता है. शहरवासी इसके फायदे जानकर मुंह मांगा दाम देते हैं. खून साफ करता है, हड्डियां मजबूत बनाता है. पुराने जमाने में लोग इसी पर निर्भर थे.” सुरेश गुप्ता जोड़ते हैं, “महिलाएं खेतों से बथुआ तोड़कर बेचती हैं, इससे अतिरिक्त कमाई होती है.”
विंध्य के आदिवासी इलाकों में बथुआ की खेती को बढ़ावा देने के लिए कृषि विभाग ने जागरूकता अभियान शुरू किया है, ताकि यह स्थानीय अर्थव्यवस्था का हिस्सा बने. विशेषज्ञों का कहना है कि बथुआ जैसी देसी सब्जियां आधुनिक सुपरफूड्स से कहीं सस्ती और पौष्टिक हैं. सर्दी के इस मौसम में विंध्य की यह हरी चादर न केवल पेट भरती है, बल्कि जीवन को स्वस्थ बनाती है.
एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय. प्रिंट मीडिया से शुरुआत. साल 2023 से न्यूज 18 हिंदी के साथ डिजिटल सफर की शुरुआत. न्यूज 18 के पहले दैनिक जागरण, अमर उजाला में रिपोर्टिंग और डेस्क पर कार्य का अनुभव. म…और पढ़ें
एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय. प्रिंट मीडिया से शुरुआत. साल 2023 से न्यूज 18 हिंदी के साथ डिजिटल सफर की शुरुआत. न्यूज 18 के पहले दैनिक जागरण, अमर उजाला में रिपोर्टिंग और डेस्क पर कार्य का अनुभव. म… और पढ़ें
Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.