Why should not Splash water in Eyes: आप कहीं बाहर से आ रहे हों या लैपटॉप या कंप्यूटर से काम करके उठे हों, अक्सर मुंह और आंखें धोने से ताजगी का अहसास होता है. बहुत सारे लोगों को अक्सर ही दिन में कई बार चेहरा धोने की आदत होती है. ऐसा करने से न केवल चेहरे की सफाई होती है बल्कि आंखों को भी आराम मिलता है. हालांकि देश के टॉप आई स्पेशलिस्ट की मानें तो 100 में से 90 लोग चेहरा धोने में एक बड़ी गलती कर बैठते हैं. जिसका उन्हें बाद में खामियाजा भुगतना पड़ता है और अस्पतालों के चक्कर काटने पड़ते हैं.
देश के जाने माने ऑप्थेल्मोलॉजिस्ट, पद्मश्री डॉ. जीवन एस तितियाल की मानें तो लोगों की मुंह धोते समय खुली आंखों में पानी के छींटे मारने की आदत उनकी आंखों के लिए खतरनाक हो सकती है. कई बार आंखों की ड्राइनेस, खुजली या चिपचिपाहट को दूर करने के लिए लोग आंखों में पानी के छींटे मारते हैं.
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डॉ. तितियाल कहते हैं, ‘अगर आपको लगता है कि आंखों में ड्राईनैस है और पानी का छींटा मार लें, इससे ड्राइनेस ठीक हो जाएगा तो ये गलत है, उल्टा इससे आंख की समस्या और बढ़ती है, क्योंकि हमें पता ही नहीं कि पानी का पीएच लेवल क्या है? आंसू का पीएच करीब 7 के आसपास होता है, वहीं जो आंख की दवाएं बनती हैं उनका पीएच न्यूट्रल यानि 7 होता है. जबकि हम लोग जो पानी पीते हैं, वह अल्कलाइन होता है और संभव है कि उसका पीएच 8 हो या फिर उससे भी ज्यादा हो या उसमें कोई कैमिकल मिला हो. पीने वाला पानी एल्कलाइन या एसिडिक हो, दोनों ही आंखों को नुकसान पहुंचाते हैं. यहां तक कि अल्कलाइन वॉटर आंखों के लिए ज्यादा गंभीर खतरा है.’
आंखों को बंद करके मार सकते हैं छींटें?
‘मैं हमेशा यह कहता हूं कि खुली आंख में पानी का छींटा कभी नहीं मारना चाहिए. अगर आपको मुंह धोना है और आंखों को पानी से धोने से आराम मिलता है तो आंख बंद करके छींटा मारिए. इससे कि आंखों का सरफेस खराब न हो. आंख में जो टियर फ्लूड होता है वह पानी से खराब न हो. बहुत सारे लोग घरों में कई चीजें रखते हैं. गुलाब जल, त्रिफला या कुछ आयुर्वेदिक प्रोडक्ट आदि रखते हैं, हो सकता है उनका फायदा होता हो लेकिन ये जरूरी है कि जब भी आप उन चीजों को इस्तेमाल करें तो वह फ्रेश होना चाहिए. अगर आप त्रिफला से आंखें धोते हैं तो यह अच्छा है लेकिन ध्यान रहे कि पानी शुद्ध होना चाहिए, ताकि इन्फेक्शन से बचा जा सके.’
क्या आरओ वॉटर या पीने वाला पानी आंखों के लिए सेफ है ?
डॉ. कहते हैं कि अक्सर लोग पीने वाले पानी का टीडीएस ही मापते हैं लेकिन आंख के मामले में टीडीएस से फर्क नहीं पड़ता, क्योंकि टीडीएस कम होने से पानी में कैल्शियम, फॉस्फेट आदि कम हो जाएंगे लेकिन हमें पीएच लेवल को ध्यान में रखना होता है.आजकल पानी का कोई भरोसा नहीं है कि उसमें क्या कैमिकल आ रहा है. अगर आप फिल्टर या आरओ वॉटर आंख धोने के लिए इस्तेमाल करते हैं तो यह भी ठीक नहीं है. अगर आपको फिर भी आंख या चेहरा साफ करना है तो रनिंग वॉटर यानि चलते हुए नल के पानी से कर सकते हैं.यह पानी रखे हुए पानी के मुकाबले आंखों के लिए ज्यादा सेफ है, क्योंकि इसमें प्रदूषण तत्व या पार्टिकल्स कम होते हैं.
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क्या होता है आंखों को खतरा?
डॉ. तितियाल बताते हैं कि आंखों को किसी भी तरह के पानी से धोने से आंखों को काफी नुकसान हो सकता है.सबसे बड़ी चीज है कि आंखों में इन्फेक्शन हो सकता है, एलर्जी हो सकता है. अगर पानी में कोई कैमिकल है तो वह आंखों के रेटिना से लेकर अन्य भाग को नुकसान पहुंचा सकता है. इससे आंख में खुजली, इरिटेशन, जलन हो सकती है. यहां तक कि आंखों की रोशनी भी जा सकती है. ज्यादा पीएच वाला अल्कलाइन पानी आंखों के कॉर्निया, लेंस और अंदरूनी स्ट्रक्चर को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है.
अगर पानी से आंख धोने पर किसी को इनमें से कोई परेशानी होती है तो तुरंत आंखों को सॉफ्ट टिश्यू से पोंछकर नेत्र विशेषज्ञ को दिखाना चाहिए.