सागर सेंट्रल जेल से 302 के 9 कैदी रिहा, एक ने लगा दिया डिग्री का ढेर तो एक बन गया लखपति, जानें कहानी

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Sagar Central Jail Story: गणतंत्र दिवस के मौके पर सागर सेंट्रल जेल से हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे 9 कैदियों को रिहा किया गया. अब इनमें से कुछ कैदियों की चर्चा खूब हो रही है. एक कैदी ने तो जेल में ही कई डिग्रियां हासिल कर लीं, वहीं एक ने लाखों रुपये कमा लिए. जानें कहानी…

Sagar News: सागर सेंट्रल जेल से गणतंत्र दिवस के मौके पर 9 कैदियों को रिहा किया गया. ये सभी हत्या में आजीवन कारावास की सजा काट रहे थे. लेकिन, सजा काटने के दौरान ये कैदी कुशल श्रमिक बन गए. कोई मिस्त्री बनकर बाहर निकला तो किसी ने फर्नीचर बनाना सीख लिया था. कोई लोहार गिरी का काम करने लगा तो कोई पेंटर बन गया. सबसे खास बात ये कि इनमें एक कैदी ने तो जेल में पढ़ाई करके डिग्रियों को ढेर लगा लिया. कैदियों ने जेल में काम करके खूब पैसा भी कमाया. एक कैदी ने सवा लाख तो एक ने 70000 जमा कर लिए थे, जिनकी राशि अकाउंट में ट्रांसफर की गई.

टूरिस्ट गाइड बनकर बाहर निकले
इन्हीं सब कैदियों में से एक राजेंद्र सिंह लोधी (38) की खूब चर्चा हो रही है. सागर के बरा गांव का रहने वाला राजेंद्रर पहले किराना दुकान और स्टेशनरी चलाकर कंपटीशन की तैयारी करता था. वह पुलिस में भर्ती होना चाहता था. लेकिन, किस्मत को कुछ और मंजूर था. एक दिन हुई अचानक घटना ने न सिर्फ उसके सपने चकनाचूर कर दिए, बल्कि सलाखों के पीछे डाल दिया गया. लेकिन, राजेंद्र ने पढ़ाई के प्रति अपने जुनून को कम नहीं होने दिया. साल 2014-15 में सोशियोलॉजी से पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री कंप्लीट की और इसके बाद यहां आने वाले कैदियों को भी पढ़ाने लगा. इसके बाद भी पढ़ाई को बंद नहीं किया. फिर स्वास्थ्य संबंधी डिप्लोमा किया. फिर टूरिज्म का डिप्लोमा किया. सर्टिफिकेट भी जल्द मिलने वाले हैं. राजेंद्र लोधी 24 साल की उम्र में सेंट्रल जेल पहुंचा था. 14 साल 9 महीने की सजा काटने के बाद रिहा हुआ.

ये है रिहाई की प्रकिया
जेल सुप्रिटेंडेंट मानवेंद्र सिंह परिहार बताते हैं कि सागर सेंट्रल जेल से 302 के मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे कैदियों के लिए अच्छे आचरण की वजह से 6 साल की माफी मिली और 14 साल सूखी सजा काटी इसके बाद यह रिहाई मिली है. बता दें कि यह रिहाई इतनी आसान नहीं होती है. किसी भी कैदी को रिहा करने से पहले जेल प्रबंधन को एक लंबी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है. करीब एक महीने का समय लगता है. सबसे पहले तो जिला स्तरीय एक कमेटी होती है, जिसमें कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक, जेल अधीक्षक, लोक अभियोजन अधिकारी शामिल रहते हैं. यह कमेटी पात्र हितग्राहियों का चयन करने के बाद प्रस्ताव बनाकर जेल मुख्यालय को भेजते हैं. जेल मुख्यालय से शासन के लिए जाती है. शासन अनुमति देता है. इसके बाद फिर इसी रास्ते से होकर वापस सेंट्रल जेल तक आती है. फिर तय तारीख पर इनको रिहा किया जाता है.

नर्मदा जल और श्रीमद्भागवत गीता मिली
जब कैदियों की रिहाई की गई तो उनके परिवार के लोग फूल माला लेकर जेल के बाहर खड़े थे. जैसे ही लाल गेट से बाहर निकले तो इन सभी कैदियों के हाथ में नर्मदा जल और श्रीमद्भागवत गीता भी दी गई थी. साथ ही जेल अधीक्षक द्वारा अपील की गई कि अब वह दोबारा इस तरह के अपराध न करें, बल्कि उन्होंने जेल के अंदर जो कार्य सीखे हैं, बाहर जाकर उसी से जीवन यापन करें.

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Rishi mishra

एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय. प्रिंट मीडिया से शुरुआत. साल 2023 से न्यूज 18 हिंदी के साथ डिजिटल सफर की शुरुआत. न्यूज 18 के पहले दैनिक जागरण, अमर उजाला में रिपोर्टिंग और डेस्क पर कार्य का अनुभव. म…और पढ़ें

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जेल से 302 के 9 कैदी रिहा, एक ने लगा दिया डिग्री का ढेर तो एक बन गया लखपति

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