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Fish without kanta: नॉनवेज खाने वालों को मछलियों का सेवन करना खूब पसंद होता है. प्रोटीन से भरपूर मछली सेहत के लिए काफी हेल्दी होती है. कई तरह की छोटी-बड़ी मछलियां होती हैं, जो स्वाद में बेहद लाजवाब होती हैं, लेकिन कुछ मछलियों में कांटे इतने होते हैं कि काफी लोग इन कांटों के डर से ही मछली खाने से बचते हैं. उन्हें लगता है कि एक बार गर्दन में ये कांटे फंस गए तो फिर लेने के देने पड़ जाएंगे. लेकिन, आप कुछ मछलियों को बेफ्रिक होकर खा सकते हैं, क्योंकि इसमें कांटा बिल्कुल नहीं होता या फिर सिर्फ एक लंबा सा कांटा बीच में होता है. जानिए कौन सी हैं ये मछलियां…
सैल्मन मछली- आपको मछली खाना पसंद है, लेकिन आप कांटे के डर से मछली खाने से परहेज करते हैं तो आप सैल्मन खाकर देखिए. इस मछली में आपको एक भी कांटा नहीं मिलेगा. कांटे होंगे भी बेहद छोटे और सॉफ्ट, जिन्हें आप आसानी से चबा सकते हैं. बच्चे भी सैल्मन फिश खा सकते हैं. सैल्मन ओमेगा-3 फैटी एसिड, प्रोटीन, विटामिन बी3,6, बी 12, डी, पोटैशियम, फॉस्फोरस, सेलेनियम आदि होते हैं.

कॉड फिश- कॉड मछली (Cod fish) बेहद कम कांटे वाली होती है. इसका स्वाद हल्का होता है. आमतौर पर लोग इसे बेक करके या फ्राई करके खाना पसंद करते हैं. कॉड मछली में प्रोटीन, विटामिन बी6, बी12, सेलेनियम, ओमेगा-3 फैटी एसिड, आयोडीन, फॉस्फोरस आदि भरपूर होते हैं. कॉड मछली के लिवर से तैयार कॉड लिवर ऑयल हार्ट, आंखों, हड्डियों आदि के लिए बेहद फायदेमंद है.

सिंघी मछली- इस मछली में भी कांटे नहीं होते हैं. इसमें प्रोटीन, विटामिन बी12, डी, जिंक, ओमेगा-3 फैटी एसिड भरपूर होते हैं, जो मसल्स, हार्ट, स्किन, बालों के लिए बेहद फायदेमंद हैं. सिंघी मछली को खाने से शरीर की कमजोरी दूर होती है. देश में सिंघी मछली खाने वालों की कमी नहीं है. हालांकि, इसके सिर के किनारों पर नुकीले दो कठोर कांटे होते हैं, जिनसे ये डंक मारती है, इसलिए इसे काटते समय सावधानी बरतनी होती है. इसका मांस बहुत ही सॉफ्ट, स्वादिष्ट होता है. दूसरी मछलियों की तुलना में इसमें बड़े-छोटे कांटे नहीं, बल्कि रीढ़ की हड्डी से जुड़ी मुख्य कांटे होती हैं, जिन्हें आप आसानी से पकाते या खाते समय निकाल सकते हैं.
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ट्राउट फिश- इस मछली में भी कांटा बिल्कुल नहीं होता है. बीच में इसमें एक लंबा सा कांटा होता है, जिसे आप आसानी से निकाल सकते हैं. इसे आप आसानी से चिकन, मटन की तरह पका कर खा सकते हैं. इसका मांस बेहद ही स्वादिष्ट होता है. प्रोटीन, ओमेगा-3 फैटी एसिड काफी होता है, जो हार्ट, ब्रेन, डायबिटीज में फायदेमंद है.

इनके अलावा, बांगड़ा (Mackerel) या मैकरेल मछली भी बेहद स्वादिष्ट होती है. इसमें कांटे बेहद कम होते हैं. कई तरह के पौष्टिक और स्वास्थ्य गुणों से भरपूर इस मछली को खाने से हार्ट डिजीज का जोखिम काफी कम होता है. इसमें प्रोटीन, ओमेगा-3 फैटी एसिड भरपूर होते हैं. वसा काफी कम होता है. रूमेटॉइड अर्थराइटिस के लक्षणों को कम कर सकती है.

साथ ही, स्नैपर (Snapper), ग्रुपर (grouper), डोरी (Dory), तिलापिया आदि मछलियां भी बिना कांटे वाली होती हैं. इनका सेवन शरीर को कई तरह से लाभ पहुंचाता है. स्नैपर में कांटे बड़े होते हैं, जिसे आप आसानी से निकाल सकते हैं. डोरी फिश सॉफ्ट होती है, जो फिलेट्स में मिलती है.