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Balaghat News: इंग्लैंड से आए दो भाइयों फिन और विल ने अपनी दिवंगत बहन रसेल की याद में बालाघाट में सद्भावना हॉकी मैच कराया. कान्हा नेशनल पार्क की यात्रा, खिलाड़ियों को दिए गिफ्ट और पूरे आयोजन की भावुक कहानी यहां पढ़ें.
बालाघाट में एक ऐसी मिसाल देखने को मिली, जिसकी चर्चा अब दूर-दूर तक हो रही है. इंग्लैंड से आए दो भाई फिन और विल अपनी दिवंगत बहन रसेल की याद में यहां एक अनोखी पहल लेकर पहुंचे. रसेल हॉकी प्लेयर थी और छह महीने पहले ब्रेन ट्यूमर की वजह से उसका निधन हो गया था. बीमारी से लंबी लड़ाई लड़ने के बाद उसने दुनिया को अलविदा कहा, लेकिन पीछे छोड़ गई अपने खेल के लिए दीवानगी और अपने भाईयों के दिल में उससे जुड़ी अनगिनत यादें.
इंग्लैंड में उसकी याद में लगातार चैरिटी हॉकी मैच कराए जा रहे हैं, लेकिन फिन और विल उन आयोजनों में शामिल नहीं हो पाए थे. भारत यात्रा पर होने के कारण दोनों ने मन बनाया कि बहन को श्रद्धांजलि देना यहीं से शुरू करेंगे. बस फिर क्या था वे बालाघाट पहुंचे और कान्हा नेशनल पार्क के पास एक सद्भावना हॉकी मैच कराने का फैसला किया.
इस पहल में स्थानीय समाजसेवी संगठन और नेहरू स्पोर्ट्स क्लब ने भी पूरा साथ दिया. नए बने होली स्टेडियम में मैच का आयोजन हुआ, जहां दो टीमों के बीच शानदार मुकाबला खेला गया. मैच की शुरुआत से लेकर आख़िर तक माहौल बिलकुल भावुक था हर पास, हर गोल रसेल को समर्पित. फिन और विल खुद ग्राउंड में मौजूद रहे और खिलाड़ियों का हौसला बढ़ाते रहे.
विल ने मैच के बाद स्टेडियम की जमकर तारीफ की. उन्होंने कहा कि भारत की मोहब्बत और अपनापन उन्हें दिल से छू गया. दोनों भाइयों ने खिलाड़ियों को हॉकी स्टिक और पूरा खेल कीट गिफ्ट किया, ताकि यहां की बच्चियां और खिलाड़ी आगे बढ़ सकें और रसेल की तरह बड़े सपने देख सकें.
उन्होंने कान्हा नेशनल पार्क की भी खूब सराहना की. बोले यहां जितने जानवर देखने मिले, उतना कहीं नहीं देखा. हम फिर से यहां आने की इच्छा रखते हैं. उनके शब्दों में सिर्फ खुशी नहीं, बल्कि इस जगह से एक आत्मिक जुड़ाव झलक रहा था. यह सद्भावना मैच सिर्फ खेल नहीं था यह एक बहन के लिए प्यार, उसकी यादों का सम्मान और देशों के बीच मोहब्बत का संदेश था. बालाघाट ने पहली बार महसूस किया कि खेल सिर्फ मैदान पर नहीं खेला जाता, दिलों में भी खेला जाता है.
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Shweta Singh, currently working with News18MPCG (Digital), has been crafting impactful stories in digital journalism for more than two years. From hyperlocal issues to politics, crime, astrology, and lifestyle,…और पढ़ें
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