68 साल की महिला का न हिलता था हाथ, न सीधी होती थी कोहनी, फिर डॉक्टरों ने निकाला तोड़

Elbow Replacement: 68 साल की मुन्नी देवी लंबे समय से बाईं कोहनी के असहनीय दर्द को झेल रही थीं, लेकिन इससे भी ज्यादा खराब था कि उनका हाथ पूरा सीधा ही नहीं होता था.इसकी वजह से वे हाथ से पूरा काम भी नहीं कर पाती थीं.आखिरकार वे गुरुग्राम के सिल्वर स्ट्रीक हॉस्पिटल पहुंचीं, जहां जांच में पता चला कि उनका हाथ सिर्फ 120 डिग्री तक ही सीधा होता था.

मुन्नी देवी को ऑर्थोपेडिक ओपीडी में ले जाया गया जहां उन्होंने बताया कि वे इस हाथ से अपने दैनिक काम भी पूरे नहीं कर पातीं. इसके बाद चिकित्सकीय जांच और एक्स-रे के आधार पर डॉक्टरों ने बताया कि उनके हाथ में उल्नो-ह्यूमेरल और रेडियो-कैपिटेलर जॉइंट में एडवांस्ड ऑस्टियो-आर्थराइटिस की परेशानी थी.

मरीज की उम्र और बीमारी की गंभीरता को देखते हुए चिकित्सकीय टीम ने टोटल एल्बो रिप्लेसमेंट को चुना और सर्जरी से पहले कार्डियोलॉजी और एनेस्थीसिया क्लीयरेंस सहित सभी जरूरी जांचें की गईं, ताकि किसी भी प्रकार का रिस्क न रहे.

सर्जरी जनरल एनेस्थीसिया के तहत पोस्टेरियर ट्राइसेप्स-स्प्लिटिंग तकनीक से की गई. हड्डियों की उम्रजनित कमजोरी के बावजूद सर्जनों ने सावधानीपूर्वक सेमी-कंस्ट्रेन्ड प्रोस्थेसिस ट्रांसप्लांट किया. ऑपरेशन के दौरान ही कोहनी को 180 डिग्री तक सीधा कर लिया गया, जो जबर्दस्त परिणाम का संकेत रहा.

ऑपरेशन के बाद महिला को ट्राइसेप्स की हीलिंग के लिए दो सप्ताह तक स्प्लिंट सपोर्ट दिया गया. डिस्चार्ज के सातवें दिन ड्रेसिंग बदली गई और विशेषज्ञ निगरानी में पैसिव मूवमेंट शुरू कराया गया. दो सप्ताह बाद टांके हटाकर स्प्लिंट हटा दिया गया और सक्रिय फिजियोथेरेपी शुरू हुई.

एक महीने के फॉलो-अप में मरीज ने उल्लेखनीय सुधार दिखाया. अब वे कोहनी को 150–160 डिग्री तक सीधा कर पा रही हैं. दर्द और सूजन नहीं है, साथ ही सर्जिकल घाव भी ठीक तरह से भर रहा है.

सर्जरी करने वाले ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ प्रतीक बंसल ने कहा कि जब दवाइयों और अन्य उपचारों से राहत नहीं मिलती, तब टोटल एल्बो रिप्लेसमेंट जॉइंट डीजेनेरेशन से जूझ रहे मरीजों के लिए प्रभावी समाधान साबित होता है. विशेषकर बुजुर्ग मरीजों में सर्जरी से पहले की बारीक योजना और ऑपरेशन के बाद की देखभाल बेहद अहम होती है. समय पर इंटरवेंशन और व्यवस्थित फिजियोथेरेपी की मदद से हम मरीज के हाथ के फंक्शन को लगभग सामान्य स्तर तक वापस लाने में सफल रहे, जिससे उनकी क्वालिटी लाइफ में बेहतर सुधार हुआ है.

वहीं मिनिमल एक्सेस एवं जीआई सर्जरी, डॉ. उत्कर्ष गुप्ता ने कहा कि एडवांस्ड एल्बो आर्थराइटिस के प्रबंधन में टोटल एल्बो आर्थ्रोप्लास्टी आज भी एक विश्वसनीय विकल्प है, खासकर उन बुजुर्ग मरीजों के लिए जिनकी कार्यक्षमता काफी प्रभावित हो चुकी हो. सही मरीज का चुनाव, सर्जरी की सटीकता और ऑपरेशन के बाद सुव्यवस्थित रिहेबिलिटेशन के साथ, दर्द से राहत और हाथ के मूवमेंट में संतोषजनक परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं.

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