500 जानवरों की जान बचाने वाली प्रणव बनीं हीरो! मिला कर्मवीर चक्र पुरस्कार

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Success Story : दिल्ली की 22 साल की एनिमल एक्टिविस्ट और रेस्क्यूअर प्रणव बॉक्सर ग्रोवर को 500 से ज्यादा बेज़ुबान जानवरों को बचाने और उनके पुनर्वास के लिए कर्मवीर चक्र पुरस्कार दिया गया है. प्रणव ग्रोवर की यहां तक की कहानी आसान नहीं थी. क्योंकि इनका सफर बचपन से ही कांटों भरा रहा है. आइये जानते हैं उनकी सफलता के बारे में…

प्रणव बॉक्सर ग्रोवर दिल्ली की ही रहने वाली हैं और दिल्ली के ही एक मिडिल क्लास परिवार से ताल्लुक रखती हैं. उन्होंने दिल्ली के एक जाने माने स्कूल से पढ़ाई की हैं. जब प्रणव का जन्म हुआ था तो डॉक्टरों ने परिवार से कहा था मुबारक हो आपको बेटा हुआ है, लेकिन स्कूल में इन्हें लोग हिजड़ा, छक्का और मीठा जैसे शब्दों से बुलाते थे.

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स्कूल हो या फिर मोहल्ले की गली, कोई भी बच्चा उनके साथ खेलने के लिए ही नहीं, बात करने के लिए तैयार नहीं होता था. घर में भी इन्होंने कई बार घरेलू हिंसा अपने माता-पिता के बीच देखी. जब परिवार को उनकी असली पहचान का पता चला तो परिवार ने भी उतना सपोर्ट नहीं किया, जितना कि उन्हें उम्मीद थी.

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प्रणव बॉक्सर ग्रोवर के मुताबिक बचपन में वह अपने आप को नुकसान पहुंचाने के बारे में सोच रही थी. कई बार उन्होंने ब्लेड से खुद पर हमला भी किया था. एक बार जब वह जानवरों का रेस्क्यू करने गई थी, तब उनको कॉल करने वाले ने जानबूझकर अपने घर पर बुलाया और उनके साथ गलत काम करने तक की कोशिश की थी, लेकिन वह बच गई थी.

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आपको बता दें की प्रणव बॉक्सर ग्रोवर ने बेजुबानों की आवाज बनने और उनको अपनाने का फैसला इसलिए लिया था. क्योंकि वह उनकी आवाज और उनके दर्द को समझ सकती हैं. अब फिलहाल बीते 5 सालों में उन्होंने 500 से ज्यादा बेजुबान जानवरों को पुनर्वास करके उनको बचाया है. इसी वजह से उन्हें कर्मवीर चक्र पुरस्कार से सम्मानित किया गया है.

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प्रणव बॉक्सर ग्रोवर अब जहां भी जाती हैं. वहां लोग उनको पहचानते हैं. उनके साथ फोटो लेते हैं. इंस्टाग्राम से लेकर के यूट्यूब तक उनके अच्छे फॉलोअर्स हैं और फिलहाल कई बड़े मंचों पर भी अब वह जाती रहती हैं. उनकी अब एक अलग पहचान बन चुकी है. यही नहीं अब उन्हें उनके रिश्तेदार और परिवार वाले भी पुराने वाले नजरिए से नहीं देखते हैं.

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प्रणव बॉक्सर ग्रोवर कहती हैं कि किसी का पहनावा उसकी पहचान को आईडेंटिफाई नहीं करता है. बल्कि इंसान के कामों से उसकी पहचान होती है. आज उनके काम की वजह से ही उनको अच्छी पहचान समाज में मिली है. अब वह सोशल एक्टिविस्ट हैं और जिन बेजुबानों के साथ लोग गंदा व्यवहार करते या उन्हें छोड़ देते हैं. वह उनकी वह आवाज बन चुकी हैं, उनको बचाती हैं और उन्हें नई जिंदगी दे रही हैं.

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