विदिशा में जैन समाज की पहल पर 50 हजार बच्चों को निशुल्क स्वर्ण प्राशन कराया जाएगा। यह आयुर्वेदिक औषधि बच्चों के शारीरिक, मानसिक और बौद्धिक विकास को सशक्त बनाने के उद्देश्य से दी जाएगी। इसका वितरण स्कूलों और आंगनवाड़ियों के माध्यम से होगा। यह आयोजन पु
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इस अभियान की शुरुआत 8 जनवरी से विदिशा नगर में जनसेवा कार्य के रूप में की जा रही है। यह आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के द्वितीय समाधि दिवस (27 जनवरी) के अवसर पर आयोजित किया जा रहा है। नगर की 139 प्राथमिक व माध्यमिक शालाओं और 140 आंगनवाड़ियों के माध्यम से बच्चों को स्वर्ण प्राशन पिलाया जाएगा।
अभियान को सफल बनाने के लिए लगभग 500 स्वयंसेवक तैनात किए गए हैं। जो बच्चे स्कूल या आंगनवाड़ी से जुड़े नहीं हैं, उन्हें माधवगंज केंद्र पर स्वर्ण प्राशन की खुराक दी जाएगी। बच्चों को औषधि पिलाने से पहले अभिभावकों की अनुमति लेना अनिवार्य होगा।
निर्यापक श्रवण मुनि श्री संभवसागर जी महाराज ने बताया कि भारत ऋषि-मुनियों की भूमि है और आयुर्वेद भारतीय संस्कृति का अभिन्न अंग है। उन्होंने आचार्य गुरुदेव की भावना का उल्लेख किया कि आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति को घर-घर तक पहुंचाया जाए, जिसकी भूमिका कोरोना काल में भी महत्वपूर्ण रही है।
स्वर्ण प्राशन संस्कार हजारों वर्षों से भारतीय ऋषि-मुनियों द्वारा बताए गए 16 संस्कारों में से एक है। इसमें शिशुओं को स्वर्ण भस्म, घी और अन्य औषधियों का मिश्रण दिया जाता है। आयुर्वेद के अनुसार, यह बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है, हड्डियों और मांसपेशियों को मजबूत करता है, तथा वजन व लंबाई के संतुलित विकास में सहायक है। यह पाचन तंत्र को बेहतर बनाने के साथ-साथ सर्दी, जुकाम, बुखार और अतिसार जैसी मौसमी बीमारियों से भी बचाव करता है।
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