सुल्तानपुर की 5 महिलाएं जिन्होंने अपने दम पर बढ़ाया जिले का मान, जानिए कहानी

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कहते हैं मेहनत और दृढ़ संकल्प से कोई भी छोटा काम बड़ी पहचान बन सकता है. सविता श्रीवास्तव ने 2010 में अचार बनाने का छोटा सा काम शुरू किया था. शुरुआत में लोगों के ताने सुनने पड़े, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी. आज वह न सिर्फ 100 तरह के अचार बनाती हैं, बल्कि कई महिलाओं को प्रशिक्षण देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित भी कर रही हैं.

अरीबा मूल रूप से उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले की रहने वाली हैं. उनके पिता नोमान अहमद नेशनल इंश्योरेंस कंपनी में सुल्तानपुर में मैनेजर हैं, जबकि मां रुखसाना निकहत गृहिणी हैं. अरीबा ने शहर के स्टेला मॉरिस कॉन्वेंट स्कूल से 10वीं तक की पढ़ाई की और बाद में अपने मामू के साथ आगे की पढ़ाई के लिए दिल्ली चली गईं. अरीबा नोमान ने यूपीएससी 2021 में ऑल इंडिया 109वीं रैंक हासिल की, जिसके बाद उन्हें 2022 बैच से यूपी कैडर में पुलिस अधिकारी बनने का मौका मिला.

रिशा वर्मा एक ऐसी महिला हैं जो स्वयं दिव्यांग हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने सुल्तानपुर का नाम पूरी दुनिया में रोशन किया है. लोकल 18 से बातचीत में उन्होंने बताया कि शिक्षक रहे डॉ. जलालुद्दीन उनके प्रेरणास्रोत हैं. उन्होंने 1998 में रूरल इन्फॉर्मेटिव एंड सोशल हार्मोनी अकादमी नाम से संस्था की स्थापना की और 2001 से इसका संचालन शुरू किया. शुरुआत में उन्होंने सिर्फ 2 बच्चों से इस संस्था की शुरुआत की थी, जबकि आज यहां करीब 40 बच्चों को पढ़ाकर उनके जीवन को बेहतर बनाने का प्रयास किया जा रहा है. इस संस्था में मानसिक रूप से कमजोर बच्चों को शिक्षित करने का काम किया जाता है.

कुछ कहावतें हकीकत बयां करती हैं. उन्हीं में से एक कहावत है… पूत के पांव पालने में ही नजर आ जाते हैं. यह कहावत उत्तर प्रदेश की एक लड़की पर बिल्कुल फिट बैठती है. हम बात कर रहे हैं सुल्तानपुर में जन्मी प्रतिभा वर्मा की. उनके पिता सरकारी इंटर कॉलेज के रिटायर्ड प्रिंसिपल हैं और मां स्कूल टीचर हैं. घर में पढ़ाई-लिखाई का अच्छा माहौल मिलने के कारण वह स्कूल के दिनों से ही पढ़ाई में काफी होशियार थीं. साल 2019 में प्रतिभा वर्मा ने संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा में तीसरा स्थान हासिल कर टॉप किया और सुल्तानपुर का नाम पूरे देश में रोशन किया.

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प्रियंका मौर्या ने नारी होने का गौरव बढ़ाया है और बैंकिंग ट्रांजैक्शन के मामले में उत्तर प्रदेश में पहले स्थान पर काबिज हैं. लोकल 18 से बातचीत में प्रियंका ने बताया कि उन्होंने 2019 में ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल की. इसके बाद उन्होंने महिला स्वयं सहायता समूह से खुद को जोड़ा और आज वह हर महीने करोड़ों रुपये का बैंकिंग ट्रांजैक्शन कर रही हैं.

सविता श्रीवास्तव एक ऐसी महिला हैं जो अपने काम के लिए राज्यपाल से सम्मानित हो चुकी हैं. उन्होंने 2010 में अचार बनाने का काम शुरू किया था. उस समय आस-पड़ोस के लोगों ने उन्हें कई तरह के ताने भी दिए, लेकिन सविता ने उन बातों को नजरअंदाज करते हुए अपने काम पर दृढ़ संकल्प के साथ मेहनत जारी रखी. आज उसी मेहनत का परिणाम है कि वह खुद अचार बनाने के साथ-साथ कई अन्य महिलाओं को भी इसका प्रशिक्षण दे रही हैं और समाज के लिए प्रेरणा स्रोत बनकर उभरी हैं. उत्तर प्रदेश की राज्यपाल की ओर से सम्मानित सविता श्रीवास्तव कई प्रकार के अचार बनाती हैं, जिनमें आंवला, आम, लहसुन, कटहल, नींबू और करौंदा समेत करीब 100 तरह के अचार शामिल हैं. अपने इसी व्यावसायिक कौशल के कारण सविता श्रीवास्तव कई पुरस्कारों से भी सम्मानित हो चुकी हैं.

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