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Saharsa Top 5 Makhana Exporters Success Story: आज हम सहरसा के पांच उन टॉप मखाना कारोबारी के बारे में बताने जा रहे हैं, जिन्होंने शून्य से शुरू किया. आज लाखों करोड़ों तक उनका टर्नओवर पहुंच चुका है. जी हां पांच ऐसे मखाना कारोबारी जिसके यहां से तैयार होने वाला मखाना राज्य भर ही नहीं विदेशों तक सप्लाई होती है.
मो.आलम, जो 24 साल के हैं और महिषी प्रखंड से हैं. मखाना और सिंघाड़ा की खेती करते हैं. उनकी मुख्य फसल मखाना है क्योंकि यह कम लागत में अच्छा मुनाफा देती है. उन्होंने एक कट्ठा से मखाना की खेती शुरू की और अब 10 बीघा में खेती कर रहे हैं. उनके घर में मखाना का छोटा प्रोसेसिंग यूनिट है, जिससे मखाना तैयार करते हैं. सरकारी सहायता से उन्होंने अपने कारोबार को बढ़ाया और अब अपनी आर्थिक स्थिति सुधारकर परिवार का भरण-पोषण कर रहे हैं. मखाना की खेती के अलावा अन्य फसलों से भी उन्हें अच्छी कमाई हो जाती है. एक सीजन में उनकी कमाई तीन से चार लाख रुपये हो जाती है.

सहरसा जिले के कहरा प्रखंड स्थित बलहा गढ़िया गांव की रेणु मिश्रा ने चार्टर्ड अकाउंटेंट की नौकरी छोड़कर मखाना कारोबार में कदम रखा. पांच साल में 7.5 करोड़ रुपये का टर्नओवर हासिल कर करोड़पति बन गईं. उन्हें उद्योग विभाग के माध्यम से 25 लाख रुपये का पीएमईजीपी लोन मिला. अक्टूबर 2020 से मखाना आयात-निर्यात का कारोबार शुरू किया. उन्होंने सहरसा, पूर्णिया, दरभंगा में छोटी प्रोसेसिंग यूनिट और नोएडा में बड़ी यूनिट स्थापित की. उनके 13 फ्लेवर्ड मखाना और रेडी-टू-ईट मखाना खीर को बाजार में पहचान मिली. आज उनकी कंपनी के उत्पाद दिल्ली, नोएडा, झारखंड, ओडिशा सहित कई राज्यों और ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन, जापान में निर्यात हो रहे हैं. रेणु मिश्रा ने बताया कि जनवरी 2026 से वह अपनी कंपनी ‘सियाराम फूड इंडस्ट्रीज’ के नाम से सीधे अंतरराष्ट्रीय बाजार में निर्यात शुरू करेंगी.

सहरसा के महिषी प्रखंड के नहरवार के किसान विनोद मुखिया ने मखाना के क्षेत्र में नई मिसाल कायम की है. प्रधानमंत्री खाद्य उन्नयन योजना के तहत उन्हें 7 लाख का लोन मिला, जिससे उन्होंने मखाना प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित की. यहां से प्लेन मखना, मखना सूप, खीर मखाना, फ्राई मखाना और मखाना पाउडर तैयार करते हैं. मार्केट में सप्लाई करते हैं. उनकी सफलता से इस कारोबार की मांग राज्य स्तर तक पहुंच गई है. विनोद अब हर महीने 40 से 50 हजार की कमाई कर लेते हैं. वे छोटे किसानों से मखाना खरीदते हैं और उसे तैयार कर मार्केट में बेचते हैं. उन्होंने एक एकड़ से शुरुआत की थी और अब कई तालाबों में मखाना की खेती कर रहे हैं.
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सहरसा के नौहट्टा प्रखंड के निवासी दिलीप सदा ने मखाना के कारोबार से अपनी किस्मत बदल ली. मध्यम परिवार से ताल्लुक रखने वाले दिलीप ने 10 साल पहले मखाना का कारोबार शुरू किया था. आज वे एक बीघा में मखाना की खेती कर रहे हैं, जिससे एक सीजन में ₹50000 की कमाई हो रही है. मखाना निकालकर सीधे व्यापारियों को भेजते हैं, जिससे उन्हें बेहतर लाभ मिलता है.

सौर बाजार, सहरसा के युवा उद्यमी विवेकानंद झा ने पुणे से एग्रीकल्चर में डिग्री हासिल करने के बाद मखाना कारोबार में कदम रखा. उन्होंने मेहनत और लगन से काम करते हुए एक बड़ा प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित किया, जिससे कई लोगों को रोजगार मिला. दिल्ली में उनका खुद का वेयरहाउस है, जहां से वह विभिन्न स्थानों पर मखाना की आपूर्ति करते हैं. मखाना कारोबार ने उनकी किस्मत बदल दी. अब उनका महीने का टर्नओवर 10 लाख से अधिक है. वह विभिन्न जिलों के छोटे मखाना किसानों से मखाना खरीदते हैं. अपने प्रोसेसिंग यूनिट में तैयार कर अलग-अलग राज्यों में सप्लाई करते हैं.
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