भोपाल गैस कांड के 41 साल: ‘फैक्ट्री के पास गड्ढों में पड़ी थीं लाशें, सुबह लौटे तब…’, पीड़िता ने बयां किया दर्द

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Bhopal Gas Tragedy 41 years: भोपाल गैस कांड के 41 साल हो गए. 2-3 दिसंबर 1984 की रात MIC गैस रिसाव से हजारों मौतें हुई थीं. पीड़िता राज कौर ने गड्ढों में लाशों का मंजर बयां किया और बताया…

Bhopal News: दुनिया के सबसे भयावह औद्योगिक हादसों में शुमार भोपाल गैस त्रासदी को आज 41 साल पूरे हो गए. 2-3 दिसंबर 1984 की उस काली रात को यूनियन कार्बाइड की अमेरिकी फैक्ट्री से मिथाइल आइसोसाइनेट (MIC) गैस का रिसाव हुआ, जिसने भोपाल को मौत का शहर बना दिया.

आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, तत्काल 3,000 से अधिक लोग मारे गए, जबकि अनौपचारिक अनुमान 20,000 से ऊपर बताते हैं. लाखों प्रभावित हुए, जिनमें से कई आज भी सांस की बीमारियों, कैंसर और जन्मजात विकृतियों से जूझ रहे हैं. लेकिन 41 वर्षों बाद भी न्याय, मुआवजा और उचित चिकित्सा की आस बेकार साबित हो रही है.

गड्ढों में बेजान पड़े थे इंसान और भैसें
भोपाल गैस कांड को 41 साल बीत गए हैं, लेकिन इतने सालों बाद भी इस विभत्स घटना के पीड़ितों को ना तो अच्छा इलाज मिला और ना ही उचित मुआवजा. इसी गैस कांड की पीड़िता राज कौर (50) बताती हैं, घटना के समय मैं छोटी थी और जब गैस लीक हुई तो पापा हमें उठा-उठाकर ले गए थे. जब हम सुबह लौटे तो आंखें लाल थीं और यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री के आसपास खूब गड्ढे थे. उन गड्ढों में इंसान और भैसें मरी पड़ी थीं. हमारी 4 भैसों भी मर गई थीं. भैसों का पेट खूब फूल गया था.

कोई मदद नहीं मिली, सारा पैसा दवा में खर्च
राजधानी भोपाल में आज भी यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री के पास रहने वाली 50 वर्षीय राज कौर कहती हैं, भोपाल गैस कांड पीड़ितों की मदद होनी चाहिए. उनका प्राइवेट में अच्छा इलाज होना चाहिए. मुआवजा कुछ नहीं मिल रहा है. हम सब बीमार रहते हैं. जो पैसा है वो दवाई पर लग जाता है और बच्चों के लिए कुछ करने को बचता ही नहीं है. कई लोग अब काम करने लायक भी नहीं हैं. उनको मदद मिलनी चाहिए.

वहीं, पीड़ित संगठनों का कहना है कि डाउ केमिकल (यूनियन कार्बाइड की मालिक कंपनी) ने पर्यावरण सफाई नहीं की, जिससे मिट्टी-पानी जहरीला है. सुप्रीम कोर्ट ने 2023 में सफाई का आदेश दिया, लेकिन अमल नहीं हुआ. भोपाल गैस पीड़ित न्याय संघर्ष समिति की रशिदा बी ने कहा, “41 साल में कुछ नहीं बदला. नौजवानों में जन्म दोष बढ़े हैं. न्याय मिले, वरना आंदोलन तेज होगा.”

Rishi mishra

एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय. प्रिंट मीडिया से शुरुआत. साल 2023 से न्यूज 18 हिंदी के साथ डिजिटल सफर की शुरुआत. न्यूज 18 के पहले दैनिक जागरण, अमर उजाला में रिपोर्टिंग और डेस्क पर कार्य का अनुभव. म…और पढ़ें

एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय. प्रिंट मीडिया से शुरुआत. साल 2023 से न्यूज 18 हिंदी के साथ डिजिटल सफर की शुरुआत. न्यूज 18 के पहले दैनिक जागरण, अमर उजाला में रिपोर्टिंग और डेस्क पर कार्य का अनुभव. म… और पढ़ें

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