राइट्स फॉर चिल्ड्रेन के संस्थापक और अधिवक्ता भुवन ऋभु
मध्यप्रदेश के 41 जिलों में पिछले दो सालों में 36,838 बाल विवाह रोके गए, 4,777 बच्चों को ट्रैफिकिंग से बचाया और 1200 से ज्यादा पीड़ित बच्चों को न्याय दिलाया गया। ये आंकड़े जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रन के संस्थापक और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित अधिवक्ता
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ऋभु ने कहा कि मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य था जिसने बच्चियों से रेप पर मौत की सजा का प्रावधान किया था। अब यही सख्ती बाल विवाह पर भी दिखनी चाहिए। बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम बच्चों की सुरक्षा का धर्मनिरपेक्ष कानून है, इसे किसी भी पर्सनल लॉ से कमतर मानना बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। प्रदेश की 7.3 करोड़ आबादी में 40% बच्चे हैं। यहां बाल विवाह की दर 23.1% है, जो राष्ट्रीय औसत 23.3% से थोड़ी कम है। वहीं कई जिलों में हालात चिंताजनक हैं। ऋभु ने कहा कि इन जिलों में बच्चियां समय से पहले पढ़ाई छोड़ रही हैं और गरीबी व शोषण के अंतहीन चक्र में फंस रही हैं।
बाल विवाह की दर सबसे ज्यादा राजगढ़
- राजगढ़ : 46%
- श्योपुर : 39.5%
- छतरपुर : 39.2%
- झाबुआ : 36.5%
- आगर मालवा : 35.6%
जानकारी देते हुए जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रन के संस्थापक भुवन ऋभु।
अप्रैल 2023 से जुलाई 2025 के बीच
- 3.74 लाख बाल विवाह रोके
- 1 लाख बच्चों को ट्रैफिकिंग से मुक्त कराया
- 34 हजार बच्चों को मानसिक स्वास्थ्य सेवाएं दीं
- और 63 हजार मामलों में कानूनी कार्रवाई शुरू कराई।
2030 तक लक्ष्य-बाल विवाह मुक्त भारत मध्यप्रदेश में जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रन के साथ 17 सहयोगी संगठन बाल विवाह, ट्रैफिकिंग, बाल श्रम और यौन शोषण के खिलाफ दोहरी रणनीति-जागरुकता और कानूनी हस्तक्षेप पर काम कर रहे हैं। यह नेटवर्क चाइल्ड मैरिज फ्री इंडिया अभियान के साथ जुड़ा है, जिसका लक्ष्य 2030 तक भारत को बाल विवाह मुक्त करना है।
कानून क्या कहता है
- लड़की की न्यूनतम उम्र 18 साल
- लड़के की न्यूनतम उम्र 21 साल तय है।
- कानून में सिर्फ माता-पिता ही नहीं, बल्कि बारात में शामिल मेहमान, हलवाई, बैंड वाले, सजावट करने वाले और घोड़ी वाले तक को दोषी ठहराने का प्रावधान है, अगर वे बाल विवाह में सहयोग करते पाए जाते हैं।